विद्या ददाति विनयम्

Blog ( लेख )

मानक भाषा क्या है || मानक भाषा के तत्व, शैलियाँ एवं विशेषताएँ || मानक हिन्दी भाषा उपयोगिता और महत्व

मानक भाषा से आशय ऐसी भाषा से है जो सभी जगह मान्य हो। इसका प्रयोग करने पर विचारों या भावों को स्पष्टतया आसान ढंग से ग्रहण कर सके।

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हिन्दू (हिन्दु) शब्द का अर्थ एवं हिन्दी शब्द की उत्पत्ति || Meaning of the word Hindu and the origin of the word Hindi

परम्परावादी संस्कृत विद्वान 'हिन्दु' शब्द का अर्थ इस शब्द को तोड़कर करते हैं। हिन्दु = हिन् + दु। यहाँ पर 'हिन्' का अर्थ है 'नष्ट करना' एवं 'दु' का अर्थ है।

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हलन्त का अर्थ, इसके उपयोग एवं प्रयोग के नियम || हलन्तयुक्त एवं हलन्तरहित शब्दों के अर्थ में अंतर || Meaning of Halant and its uses and rules

हिन्दी एवं संस्कृत भाषा में प्रयुक्त एक ऐसा चिन्ह जो वर्णमाला के व्यन्जन वर्णों के नीचे तिरछी रेखा (्) के रूप में लगाया जाता है उसे हलन्त कहते हैं।

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भाषा के विभिन्न रूप - बोली, भाषा, विभाषा, उप-भाषा, मानक भाषा एवं भाषा के अन्य रूप || Bhasha ke Rup

मानव भाषा के विभिन्न रूपों - बोली, भाषा, विभाषा, उप-भाषा, मानक भाषा आदि के अलावा भाषा के अन्य रूपों का प्रयोग करता है।

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स्वरों के वर्गीकरण के छः आधार || जिह्वा के व्यवहृत, ओठों, कोमल तालु, स्वरतन्त्रिय, मात्रा काल के आधार पर

हिन्दी वर्णमाला के स्वरों का वर्गीकरण के छः आधारों - जिह्वा के व्यवहृत भाग, ओठों, कोमल तालु, स्वरतन्त्रिय, मात्रा काल के आधार पर किया गया है।

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भारत में लिपि का विकास || देवनागरी लिपि एवं इसका नामकरण || भारतीय लिपियाँ- सिन्धु घाटी लिपि, ब्राह्मी लिपि, खरोष्ठी लिपि

विद्वानों के मतानुसार भारत में लेखन कला का विकास ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में हुआ। ध्वनि मूलक लिपि 'लिपि-विकास' की चरम परिणति मानी जा सकती है।

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भाषा शब्द की उत्पत्ति || भाषा के स्वरूप - मौखिक, लिखित एवं सांकेतिक

संस्कृत हिन्दी भाषा की जननी है अर्थात हिन्दी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत से उत्पन्न हुई है। शब्द 'भाषा' संस्कृत के 'भाष' धातु से बना हुआ है।

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मात्रा किसे कहते हैं? हिन्दी स्वरों की मात्राएँ || ऑ ध्वनि, अनुस्वार, अनुनासिक, विसर्ग एवं हलन्त के चिह्न

व्यन्जन के साथ स्वर का मेल होने पर स्वर का जो रूप होता है, उसे मात्रा कहा जाता है। दूसरे शब्दों में स्वर के उच्चारण में लगने वाले समय को मात्रा कहते हैं।

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व्यन्जनों का वर्गीकरण || व्यन्जनों के प्रकार - प्रयत्न, स्थान, स्वरतंत्रीय, प्राणत्व के आधार पर

हिन्दी भाषा में व्यन्जनों का वर्गीकरण प्रयत्न, स्थान, स्वरतन्त्रिय, प्राणत्व के आधार पर किया जाता है।

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वर्ण संयोग - व्यन्जन वर्ण से व्यन्जन के संयोग के नियम || 'र' वर्ण के संयोग नियम || वर्ण-विच्छेद

व्यन्जन तथा व्यन्जन के मेल से जब संयुक्त ध्वनियाँ बनती हैं तो उसे व्यन्जन तथा व्यन्जन का संयोग कहा जाता है।

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हिन्दी भाषा में स्वर और व्यन्जन || स्वर एवं व्यन्जनों के प्रकार, इनकी संख्या एवं इनमें अन्तर

मानव की भाषायी ध्वनियों को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए जिन चिह्नों (प्रतीकों) का प्रयोग किया जाता है उन ध्वनि चिह्नों को 'वर्ण' कहते हैं।

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भाषा का आदि इतिहास || भाषा उत्पत्ति एवं इसका आरंभिक स्वरूप

ब्रह्माण्ड में हमारे सौरमण्डल की उत्पत्ति एवं पृथ्वी के अस्तित्व में आने के पश्चात धीरे-धीरे जीवों का आविर्भाव हुआ। धरती पर जीवों की वंश-वृद्धि

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वाणी - यन्त्र (मुख के अवयव) के प्रकार || ध्वनि यन्त्र (वाक्-यन्त्र) के मुख में स्थान

मानव मुख के अवयवों अर्थात मुखांगों का वर्णन किया गया है जो कि विभिन्न प्रकार की ध्वनियों के उच्चारण में सहायक होते हैं।

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आगत (विदेशी / विदेशज) शब्द - फारसी, अरबी, तुर्की, पुर्तगाली, अंग्रेजी, चीनी, ग्रीक, जापानी, फ्रेंच, डच, रूसी, स्पेनी शब्द || अपभ्रंश शब्द

दूसरे देशों के अर्थात दूसरे देशों की भाषाओं के ऐसे शब्द जो हिन्दी भाषा में समाहित हो गए हैं और इनका प्रयोग हिन्दी भाषी लोगों के द्वारा अपने दैनिक व्यवहार में प्रयोग किया जाता है, उन्हें विदेशी या विदेशज शब्द कहते हैं।

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विश्व की प्रारंभिक लिपियाँ || भारत की प्राचीन लिपियाँ || देवनागरी लिपि के वैज्ञानिक आधार

मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ लिपियों का भी विकास हुआ। यहाँ विश्व की प्रारम्भिक लिपियों के साथ-साथ भारत की प्राचीन लिपियों का अध्ययन आवश्यक है।

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तत्सम शब्द का शाब्दिक अर्थ, अवधारणा और इतिहास || Tatsam Shabd Meaning and Examples

संस्कृत में प्रयुक्त रूप के समान जब कोई शब्द अविकृत रूप (बिना बदलाव के) ज्यों का त्यों रूप हिन्दी में प्रयुक्त होता है तब वह 'तत्सम्' कहा जाता है।

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अनेकार्थी (अनेकार्थक) शब्द किन्हें कहते हैं? इनके उदाहरण || Anekarthi (Anekarthak) Shabd suchi

ऐसे शब्द जिनके एक से अधिक अर्थ हों तथा वे अलग-अलग भावों या अर्थों के प्रदर्शन हेतु वाक्यों में प्रयुक्त होते हों, उन्हें 'अनेकार्थी' शब्द कहते हैं।

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हिन्दी शब्दों का वर्गीकरण (हिन्दी शब्दों के विभिन्न प्रकार) || Classification of Hindi words (Different types of Hindi words)

भाषा शब्दों पर आधारित होती है। हिन्दी भाषा में शब्द अलग-अलग स्रोतों से आए हैं। इन्हीं स्रोतों या निर्माण के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण किया गया है।

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ध्वनि उच्चारण में 'प्रत्यन' क्या है? || प्रयत्नों की संख्या || 'प्रयत्न' के आधार पर हिन्दी व्यन्जन के भेद

वर्णों या ध्वनियों के उच्चारण में जो प्रयास या रीति का प्रयोग किया जाता है, उसे 'प्रयत्न' कहते हैं।

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शब्द तथा पद क्या है? इसकी परिभाषा एवं विशेषताएँ || 'शब्द' का महत्त्व || What is 'Shabd' and 'Pad'?

भाषा की वह मौलिक अथवा लघुतम इकाई जो एक या एक से अधिक अक्षरों (वर्णों) के योग से निर्मित हो और उसके स्वतन्त्र रुप से या वाक्य में प्रयुक्त होने के पर एक निश्चित अर्थ प्रदान कर रहा हो शब्द कहलाता है।

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व्याकरण क्या है? अर्थ एवं परिभाषा || व्याकरण के लाभ || व्याकरण के विभाग

भाषा के बोलने, लिखने और पढ़ने में जिन नियमों-विनियमों का पालन किया जाता है, उन नियमों-विनियमों का अध्ययन ही व्याकरण है।

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रचना या बनावट की दृष्टि से शब्दों के प्रकार - रूढ़, यौगिक एवं योगरूढ़ || यौगिक एवं योगरूढ़ में अंतर || Rachna ke aadhar par Rudh, Yougik, Yogrudh

रचना या बनावट की दृष्टि से शब्दों के प्रकार - रूढ़, यौगिक एवं योगरूढ़। यौगिक एवं योगरूढ़ शब्दों में क्या अन्तर है?

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तद्भव शब्द - अर्थ, अवधारणा एवं उदाहरण || Tatbhav Shabd ka arth, paribhasha and examples

सामान्यतः संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द जिनमें मात्रा, वर्ण में आंशिक परिवर्तन होकर एक सरल रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं तो ऐसे शब्दों को तद्भव शब्द कहा जाता है।

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एकार्थी (एकार्थक) शब्द - एक ही अर्थ के लिए प्रयुक्त शब्दों के अर्थों में सूक्ष्म अन्तर || Ekarthi (Ekarthak) shabd - अर्थ के आधार पर

नाम से स्पष्ट है - एक अर्थ वाला। यदि हम शब्द एकार्थी का विच्छेद करें तो एक+अर्थी अर्थात एक अर्थ प्रदान करने वाला होगा।

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वाचक / वाच्यार्थक / अभिधार्थ, लाक्षणिक / लक्षक / लक्ष्यार्थ, व्यन्जक / व्यंग्यार्थं शब्द - (शब्द-शक्ति के आधार पर) || Vachak, Lakshanik, Vyanjak Shabd

शब्द-शक्ति के आधार पर शब्दों के प्रकार - वाचक (वाच्यार्थक / अभिधार्थ), लाक्षणिक (लक्षक / लक्ष्यार्थ), व्यन्जक (व्यंग्यार्थ)।

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व्याकरण का प्रारम्भ || आदि व्याकरण - व्याकरणाचार्य पणिनि || हिन्दी व्याकरण

आदिकाल से ही व्याकरण का अस्तित्व रहा है। ऐसा किवदंती है कि वेदों की रचना के पश्चात समस्त देव-गणों की प्रार्थना पर इन्द्रदेव के द्वारा व्याकरण की रचना की गई थी, जिसका नाम 'शेष' था।

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पारिभाषिक, अर्द्धपारिभाषिक, सामान्य शब्द - प्रयोग के आधार पर शब्दों के प्रकार || Paribhashik, Arddh paribhashik, Simple words

प्रयोग के आधार पर शब्दों को तीन वर्गों में बँट जाते हैं। 1. पारिभाषिक शब्द 2. अर्द्धपारिभाषिक शब्द 3. सामान्य शब्द।

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पूर्ण एवं अपूर्ण पर्याय शब्द एवं इनके उदाहरण || Purn ans Apurn synonyms and their examples

एक ही अर्थ को प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होने वाले अलग अलग शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहा जाता है। पर्यायवाची शब्दों की दो कोटियाँ हो सकती हैं।

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समोच्चारित (समान उच्चारण वाले) / श्रुतिसम भिन्नार्थक या समरूप भिन्नार्थक शब्द एवं शब्दसूची || Samocharit Shrutisam Bhinnarthak Shabd

समोच्चरित या श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द उन शब्दों को कहते हैं, जिनका उच्चारण सामान्यतः सुनने में एक समान प्रतीत होता है किन्तु उनके अर्थ में प्रायः भिन्नता पाई जाती है।

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हिन्दी का सामान्य, व्यवहारिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक एवं भाषा-शास्त्रीय अर्थ || Hindi ke vibhinna arth

हिन्दी भाषा के समृद्ध इतिहास को देखते हुए हिन्दी का सामान्य, व्यवहारिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक एवं भाषा-शास्त्रीय अर्थ क्या है? पढ़िए।

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पाठ - 2 'वाख' (विषय हिन्दी काव्य खण्ड) कक्षा 9 भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर || Path 2 'Vakh' Arth and Question Answer

कक्षा 9 की हिन्दी विशिष्ट के पाठ - 2 'वाख' (काव्य खण्ड) के पदों के भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर का सटीक विवरण।

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पाठ - 1 'साखियाँ' और 'सबद' - कबीर (विषय- हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) पदों के अर्थ एवं प्रश्नोत्तर || Path 1 'Sakhiyan' aur 'Sabad'

कक्षा- 9 हिन्दी विशिष्ट के पाठ - 1 'साखियाँ' और 'सबद' (काव्य-खण्ड) के पदों के अर्थ एवं प्रश्नों के सटीक उत्तर।

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