विद्या ददाति विनयम्

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समूहवाची (समूह बताने वाले) शब्द क्या होते हैं? || समूहवाची शब्दों की आवश्यकता एवं महत्व || Samuhwachi Shabdo ki suchi

हिन्दी भाषा में समूह (Group) के लिए अनेक शब्द प्रचलित हैं जिन्हें 'समूहवाची शब्द' अथवा 'समूह बताने वाले शब्द' कहते हैं। ये समूहवाची शब्द समूह अथवा समुदाय के घोतक होते हैं।

समूह की अवधारणा — हमारी इस सृष्टि में जिस ओर भी ध्यान दें सब ओर हमें नाना पदार्थों-जड़ एवं चेतन के समूह मिलते हैं। आकाश की ओर ध्यान दें तो उसे ग्रह-मण्डल, नक्षत्र मण्डल, तारागण आदि से भरा पूरा पाते हैं। इस संसार की ओर ध्यान दें तो मनुष्य ही नहीं नदी-पर्वत एवं मरुस्थल तक झुण्ड के झुण्ड दिखाई पड़ते हैं। इस सब का एक बहुत बड़ा कारण प्राकृतिक एवं भौगोलिक दशाएँ भी हैं। भू विज्ञान हमें बताता है कि इस भूमि मण्डल की भी ऐसी कल्पित पट्टियों बनाई जा सकती हैं जहाँ मैदान ही मैदान हों या पर्वत ही पर्वत हो या मरुस्थल ही मरुस्थल हों।

समूहवाची शब्दों का आविर्भाव — भूगोल की ही जब यह स्थिति है तो फिर उस पर आश्रित जीव, वनस्पति आदि का झुण्ड में पाया जाना स्वाभाविक ही है। इसलिये जहाँ एक क्षेत्र में शीत कटिबन्ध के प्राणी हैं, वहीं दूसरे क्षेत्र में उष्ण कटिबन्ध के हैं। एक ही तरह की जीवन दशायें होने के कारण एक ही वर्ग के जीवों का एक ही तरह के क्षेत्र में पाया जाना स्वाभाविक भी है और उनका समूह बनाकर एक साथ आहार-विहार आदि में प्रवृत्त होना भी उतना ही स्वाभाविक है।

समूहवाची शब्दों की आवश्यकता — जीव-जन्तु, पशु-पक्षी आदि तो भयवश या आवश्यकतावश ही समूह रूप में रहते हैं पर मनुष्य तो भावना-वश भी अपनी जाति के साथ रहता है।
समूह का इतना व्यापक क्षेत्र होने के कारण भाषा में भी उसकी अभिव्यक्ति के लिये कुछ न कुछ शब्द अवश्य ही होने चाहिए । इसीलिये हम विश्व की सभी भाषाओं में समूह की अभिव्यक्ति करने वाले शब्द पाते हैं।

समूहवाची शब्दों का महत्व — समूहवाची शब्द भाषा की पूर्णता एवं सामर्थ्य व्यक्त करते हैं। जिस भाषा में जितने अधिक समूहवाची शब्द होंगे, वह भाषा उतनी ही समृद्ध समझी जायेगी। ऐसे शब्द-समूह समूह की इकाई के वाचक शब्द से मूलतः ही भिन्न हों, यह आवश्यक नहीं है। उल्टे इसे तो भाषा का एक गुण ही कहा जाना चाहिए यदि उसमें इकाई के वाचक शब्द के आधार पर ही समूह का वाचक शब्द गढ़ लिया गया हो। इसके दो फायदे हैं। समूह को व्यक्त करने के लिये एक ही शब्द (इकाई के शब्द) से ही काम चल जायेगा और उसी से इकाई के वाचक शब्द की भी पहिचान हो जायेगी। इस प्रकार उस समूहवाचक शब्द को याद रखने में भी सुविधा एवं सरलता होगी । यदि इकाई के वाचक शब्द के समूह का वाचक शब्द भिन्न होगा तो उसे याद रखना एक कठिन काम होगा।

संस्कृत भाषा में समूहवाची शब्द — संस्कृत में यद्यपि दोनों ही तरह के समूहवाची शब्द बनाये गये हैं पर इकाई के वाचक शब्दों से ही बने समूह वाचक शब्द अधिक हैं। 'अमर कोश' के द्वितीय काण्ड के 'सिंहादिवर्ग' के अन्त में श्लोक 39 से 43 में समूहवाची शब्दों पर विचार किया गया है। वहाँ 'समूह' शब्द के 22 पर्यायवाची शब्द बताये गये हैं। फिर इन समूहवाची शब्दों में भी विभिन्न प्रकार के अर्थ-भेद बताये गये हैं।
जैसे—
1. जन्तुओं के समूह को 'संघ' या 'सार्थ' कहते हैं।
2. व्यवसायियों के समूह को भी 'सार्थ' कहते हैं।
3. सजातियों के समूह को 'कुल'
4. पक्षियों के समूह को (यूथ)
5. पशुओं के समूह को 'समज'
6. पशुओं से भिन्न (मनुष्यादि) के समूह को 'समाज' कहते हैं।
7. समानधर्मा प्राणि समूह को 'निकाय' कहते हैं।
8. धान्यादि की राशि को 'पुञ्ज', 'राशि', 'उत्कर', या 'कूट' कहते हैं आदि-आदि।

इकाई के नाम के वाचक शब्द — इनके अतिरिक्त कुछ शब्द समूहवाची शब्द की इकाई के नाम के वाचक शब्द के ही आधार पर बने है। जैसे—
मयूर का झुण्ड — मायूर
कपोत का झुण्ड — कापोत
शुक का झुण्ड — शौक
तित्तिर का झुण्ड — तैत्तिर
इसी तरह से बने कुछ अन्य शब्द नीचे दिये जा रहे हैं—
गणिकाओं का समूह — गाणिक्यम्
गर्भिणियों का समूह — गार्भिणम्
युवतियों का समूह — यौवत-यौवन
अश्वों का समूह — अश्वीयम्, अश्ववत्
रथों का समूह — रथ्या, रथकट्या, रथव्रजे
पदाति का समूह — पादातं, पत्ति, संहतिः
वत्स का समूह — वात्सक
धेनु का समूह — धैनुक

इसी प्रकार हस्ति के समूह को 'हास्तिकं' तथा 'गजता' कहते हैं। हस्ति से हास्तिकं और गज से गजता। जिस प्रकार 'गज' में 'ता' प्रत्यय लगाकर गजता समूहवाचक शब्द बना है। उसी प्रकार और भी शब्द बने हैं। आजकल बहु प्रचलित 'जनता' शब्द भी 'गजता' की तरह ही बना है। जिस प्रकार - गजों का चमूह गजता उसी प्रकार जनों का समूह जनता। इसी प्रकार —
बन्धुओं का समूह — बन्धुता
ग्रामों का समूह — ग्रामता

संस्कृत में समूहवाची शब्दों में भ्रम की स्थिति — इस प्रकार संस्कृत में समूहवाची शब्द बनाने का यह तरीका बड़ा ही सरल है। कहने की आवश्यकता नहीं कि हिन्दी ने कुछ समूहवाची शब्द संस्कृत से यथावत् ही ले लिये हैं। जैसे जनों का समूह - जनता। पर 'ता प्रत्यय हिन्दी में गुणवाचक हो जाने के कारण समूहवाची शब्द में प्रचलित नहीं हो पाया। भ्रम हो जाने की आशंका जो रहेगी। गुणवाची अर्थ लें या समूहवाची। मान लीजिये साधु शब्द लें। इत्समें 'ता' प्रत्यय जोड़कर 'साधुता' शब्द बनेगा। यह 'साधुता' शब्द गुणवाची रहे या समूहवाची। 'साधुता' - शब्द साधु के गुणों का बोध कराये या साधुओं की संख्या या समूह का। संस्कृत की तरह गुच्छ या गुच्छा, दल, पुञ्ज, संघ, समुदाय, समूह, माला, राजि, मण्डल, कुन्ज, वृन्द, यूथ, पंक्ति, गण, अवलि आदि शब्द हिन्दी में भी समूहवाची हैं। आगे कुछ समूहवाची शब्द दिये जा रहे हैं।

समूहवाचक शब्दों की सूची

हिन्दी के तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज समूहवाचक शब्द।
(1) अमराई — आम के वृक्षों का समूह या बाग।
(2) अम्बार — पुस्तकों का अम्बार, कूड़े का अम्बार, फलों का अम्बार।
(3) अवलि या अवली — वृक्षों की अवलि (वृक्षावलि), तारकों की अवलि (तारकावलि), प्रश्नों की अवलि (प्रश्नावलि) भ्रमरों की अवलि (अमरावलि), नियमों की अवलि (नियमावलि), पुष्पों की अवलि (पुष्पावलि), एकावलि।
टीप— संस्कृत में 'अवलि' बनता है। हिन्दी में दोनों का प्रयोग होता है। अतः प्रश्नावली, भ्रमरावली, नियमावली आदि भी लिखा जाता है।
(4) आगार — कोष का आगार (कोषागार), धन का आगार (धनागार), ग्रन्थों का आगार (ग्रन्थागार)।
(5) कण्डौरा — कण्डों का ढे।र
(6) कतार — वृक्षों की कतार, सैनिकों की कतार, बालकों की कतार।
(7) काफिला — यात्रियों का काफिला, ऊँटों का काफिला, शरणार्थियों का काफिला।
(8) कारवाँ — यात्रियों का कारवाँ।
(9) कुञ्ज — लताओं का कुञ्ज (लता कुंज), वृक्षों का कुञ्ज (वृक्षकुञ्ज) वानीरों का कुञ्ज (वानीर कुञ्ज), बेतों का कुञ्ज (वेतस कुंज)।
(10) कक्षा — छात्रों की कक्षा।
(11) कुल — ब्राह्मणों का कुल, क्षत्रियों का कुल, आचार्यों का कुल, वात्स्यायन कुल, चन्द्र कुल, गुरुकुल।
(12) कूट — अन्नादि के ऊँचे ढ़ेर का नाम, पर्वत।
(13) गण — अध्यापक गण, छात्र गण, मित्र गण, बन्धु गण।
(14) गिरोह — शत्रुओं का गिरोह, डाकुओं का गिरोह, चोरों का गिरोह।
(15) गुच्छा — फूलों का गुच्छा, अंगूरों का गुच्छा, चाबियों का गुच्छा, रत्नों का गुच्छा।
(16) गड्डी — ताश की गड्डी, नोटों की गड्डी।
(17) गुट — शत्रुओं का गुट, विरोधियों का गुट, षड्यन्त्रकारियों का गुद अपना गुट।
(18) गट्टर — लड़कियों का गट्ठर।
(19) गोल — तोतों का गोल।
(20) घटा — काले बादलों का समूह।
(21) घौद ― फलों का घौद।
(22) चका, चट्टा ― ईटों का चक्का, ईटों का चट्टा।
(23) चट्टा-बट्टा ― एक ही थैली के चट्टे-बट्टे।
(24) छत्ता ― मधुमक्खियों का छत्ता।
(25) जत्था ― सत्याग्रहियों का जत्था।
(26) झुण्ड ― पशुओं का झुण्ड पक्षियों का झुण्ड।
(27) झुरमुट ― पेड़ों का का झुरमुट, लताओं के झुरमुट।
(28) टीम ― खिलाड़ियों की टीम, कालेज की टीम।
(29) टुकड़ी ― सैनिकों की टुकड़ी।
(30) टोल ― पक्षियों का टोल।
(31) टोली ― दीवानों की टोली, मित्रों की टोली, बच्चों की टोली।
(32) ढेर ― फूलों का ढेर फलों का ढेर किताबों का ढेर अनाज का ढेर, गेहूँ का ढेर, कूड़े का ढेर।
(33) ताँता ― दर्शकों का ताँता, कारों का ताँता, सवारियों का ताँता आने जाने वालों का ताँता।
(34) दल ― यात्रियों का दल बालकों का दल घुड़सवारों का दल डकैतों का दल, टिड्डियों का दल।
(35) निकाय ― एक ही धर्मावलम्बियों के समूह का नाम।
(36) परिषद ― विद्वानों की परिषद।
(37) पीठ ― न्यायाधीशों की पीठ (न्यायाधीश पीठ)।
(38) पुञ्ज ― तारों का पुञ्ज (तारक पुञ्ज)।
(39) पुलिन्दा ― पत्रों का पुलिन्दा, कागजों का पुलिन्दा।
(40) पूला ― डंठलों का पूला।
(41) पंक्ति ― वृक्षों की पंक्ति, लड़कों की पंक्ति, शब्द-पंक्ति।
(42) फौज ― फौजियों का समूह।
(43) बाड़व ― समुद्र की अग्नियों का समूह।
(44) बेड़ा ― जहाजों का बेड़ा, नावों का बेड़ा।
(45) बोर्ड ― अधिकारियों का बोर्ड, विद्वानों का बोर्ड निर्णायकों का बोर्ड।
(46) भीड़ ― आदमियों की भीड़ पशुओं की भीड।
(47) मण्डल ― गायकों का मण्डल (गायकमण्डल), नक्षत्रों का मण्डल (नक्षत्रमण्डल), प्रभाओं का मण्डल (प्रभामण्डल) शिष्टजनो का मण्डल (शिष्टमण्डल), सप्तर्षि मण्डल, मंत्रियों का मण्डल (मंत्रिमण्डल)।
(48) मण्डली ― मूर्खों की मण्डली, साधुओं की मण्डली, कीर्तन, मण्डली।
(49) माला ― मेघों की माला (मेघमाला), बिजलियों की माला (विद्युन्माला). पर्वतों की माला (पर्वतमाला), पुष्पों की माला (पुष्पमाला)।
(50) यूथ ― गजों का यूथ (गजयूथ), वराहों का यूथ (वराहयूथ), हरिणों का यूथ (मृगयूथ)।
(51) राजि ― वृक्षों की राजि (वृक्षराजि), पुष्पों की राजि (पुष्पराजि), तारकों की राजि (तारकराजि), वनों की राजि (वनराजि)।
(52) राशि ― धनराशि, अंकों की राशि।
(53) रिसाला ― सिपाहियों का रिसाला।
(54) रेवड़ ― भेडों बकरियों का झुण्ड पशुओं का झुण्ड।
(55) लट ― बालों की लट।
(56) लादी ― कपड़ों की लादी।
(57) लेहना ― डठलों की लेहना।
(58) वर्ग ― मध्य वर्ग उन्नत वर्ग पिछड़ा वर्ग छात्र वर्ग, अध्यापक वर्ग कि वर्ग।
(59) वन ― वृक्षों का समूह।
(60) वृन्द ― तारकों का वृन्द (तारकवृन्द), सम्यों का वृन्द (सभ्यवृन्द) नारियों का वृन्द (नारिवृन्द), अध्यापको का वृन्द (अध्यापक वृन्द)।
(61) शतक ― क्रिकेट का शतक, रुपयों का शतक पद्यों का शतक।
(62) शताब्दी ― सौ वर्षों का नाम।
(63) श्रृंखला ― पर्वतों की श्रृंखला (पर्वत श्रृंखला)।
(64) समवाय ― वस्तुओं का समूह।
(65) समाज ― मानव समाज विद्वत्समाज।
(66) सम्मेलन ― बहुत से व्यक्तियों का समुदाय।
(68) समुदाय ― छात्रों का समुदाय (छात्रसमुदाय), जनों का समुदाय (जनसमुदाय) मानवों का समुदाय (मानव समुदाय)।
(69) समूह ― पशुओं का समूह (पशु-समूह), मनुष्यों का समूह (मनुष्य समूह) पक्षियों की समूह (पक्षिसमूह) लोगों का समूह (जनसमूह)।
(70) सार्थ ― यात्रियों का दल, व्यापारियों का दल।
(71) संग्रह ― कवितांओ का संग्रह (कवितासंग्रह) लेखों का संग्रह, (लेखसंग्रह), धन का संग्रह (धनसंग्रह) डाक टिकटों का संग्रह विचारों का संग्रह, वस्तुओं का संग्रह छात्रों का संघ (छात्रसंघ), नागरिकों का संघ (नागरिकसघ)।
(72) संघ ― प्राध्यापकों का संघ (प्राध्यापकसंघ) कर्मचारियों का संघ (कर्मचारीसंघ), विश्वसंघ।
(73) संचयन ― पुस्तकों का संचयन कविताओं का संचयन पुष्पों का संचयन।
(74) संहति ― मत्रों की संहति ऋषियों की संहति।
(75) स्तबक ― पुष्पों का स्तबक (पुष्पस्तबक)।
(76) हार ― फूलों का हार रत्नों का हार।
(77) हिमानी ― बर्फ का ढेर।
(78) अड्डा ― बसों आदि के लिए (लक्ष्मी नगर का बस अड्डा बस पास में ही है।)
(79) अलबम ― चित्रों तथा फोटों के लिए (राम के जन्मदिन की अलबम बहुत अच्छी है।)
(80) अखाड़ा ― साधुओं व पहलवानों का (कुंभ-मेले में जगह-जगह साधुओं के अखाड़े दिखाई पड़ रहे थे।)
(81) कुंज ― लताओं का (घर में लताओं का कुंज बहुत सुन्दर है।)
(82) कतार ― पक्षियों आदि की (आकाश में उड़ते हुए कबूतरों की कतारें बहुत अच्छी लग रही हैं।)
(83) कोष ― धन एवं ज्ञान का (मेरे चाचा जी के पास अपार धन का संचित कोष है।)
(84) गठ्ठर ― लकड़ियों का (लकड़ियों का गट्ठर बहुत भारी है।)
(85) गिरोह ― डाकुओं का (डाकुओं का एक गिरोह पुलिस द्वारा पकड़ा गया।)
(86) गुलदस्ता ― फूलों का (मेरे जन्मदिन पर माँ ने मुझे एक सुन्दर सा फूलों का गुलदस्ता भेंट किया।)
(87) गड्डी ― चोटों की (मेरे पास हजार-हजार के नोटों की एक गड्डी है।)
(88) गठरी ― कपड़े आदि की (गन्दे कपड़ों की यह गठरी धोबी के यहाँ भेज दो।)
(89) गुच्छा ― चाबियों या अंगूरों का (इन ताजे अंगूरों का गुच्छा मुझे दे दो।)
(90) छत्ता ― मधु-मक्खियों का (मधुमक्खियों के छत्ते को मत छेड़ो, तुम्हें काट खायेगी।)
(91) जोड़ा ― जूतों का (मेरे पास कीमती जूतों का जोड़ा है।)
(92) जत्था ― यात्रियों या सत्याग्रहियों का (यात्रियों का एक जत्था वैष्णों देवी की यात्रा पर निकल चुका है।)
(93) झुरमुट ― पेड़ों तथा झाड़ियों का (पेड़ों के झुरमुट के नीचे हिरण सो रहे हैं।)
(94) झुण्ड ― जानवरों का (भेड़ यकरियों का झुण्ड खेत में चर रहा है।)
(95) टुकड़ी ― सैनिकों अथवा सेना की (वीर सैनिकों की टुकड़ी को सम्मानित किया गया।)
(96) टोली ― श्रमिकों अथवा मजदूरों की (श्रमिकों की टोली सुबह से काम कर रही है।)
(97) ढेर ― अनाज कूड़े का (हमारे घर के सामने कूड़े का ढेर लगा हुआ है।)
(98) दल ― टिड्डियों का (टिड्डियों के दल ने हमारे खेत की सारी फसल नष्ट कर दी।)
(99) दस्ता ― पुलिस एवं फौज का (फौजी दस्ते ने शत्रुओं पर धावा बोल दिया।)
(100) दंगल ― प्रतियोगियों का (कल होने वाले दंगल में अनेक पहलवान आयेंगे।)
(101) पंक्ति ― मनुष्यों की (सभी छत्र-छात्राएँ पंक्तियों में खड़े होते हैं।)
(102) प्रदर्शनी ― वस्तुओं की (आजकल दिल्ली हाट में गर्म कपड़ों की प्रदर्शनी लगी हुई है।)
(103) पुञ्ज ― प्रकाश का (चंद्रमा शीतल प्रकाश का पुञ्ज है।)
(104) बेड़ा ― जहाजों का (इन जहाजों का बेड़ा एकदम आधुनिक है।)
(105) भीड़ ― मनुष्यों की (मेले में बहुत भीड़ जमा थी।)
(106) बिरादरी ― जाति विशेष की (महिन्द्र को उसके गलत कामों के कारण बिरादरी से निकाल दिया गया।)
(107) भण्डारा ― भोजन के प्रसाद का (रामनवमी के दिन जगह-जगह भण्डारे होते हैं।)
(108) माला ― पर्वतों की, फूलों तथा धातुओं की (हिमालय की पर्वतमाला अत्यन्त मनोरम है।)
(109) मंडल ― नक्षत्रों का (नक्षत्रों का मण्डल आकाश में चमक रहा है।)
(110) राशि ― धन सम्पत्ति की (मेरे अंकल के पास पर्याप्त धन राशि है।)
(111) मेला ― प्राणियों का (इस बार दशहरा के मेले में बहुत भीड़ थी।)
(112) लच्छी ― धागों की (मैंने बाजार से काले तथा सफेद धागों की लच्छियाँ खरीदीं।)
(113) वृन्द ― मनुष्यों का (अध्यापकवृन्द हमको अच्छी सीख देते हैं।)
(114) श्रृंखला ― पर्वतों की (पर्वतों की श्रृंखला काफी लम्बी है।)
(115) शिविर ― तम्बुओं का (संक्रान्ति के मेले में हम शिविर में ठहरे थे।)
(116) समिति ― शिक्षित वर्ग की (विधानसभा जाँच समिति की रिपोर्ट कल तक आएगी।)
(117) समाज ― मनुष्यों का (आज भारतीय समाज में कुरीतियाँ बढ़ती जा रही हैं।)
(118) समुदाय ― जीवित प्राणियों का (आजकल जन-समुदाय में बहुत रोष आ चुका है।)
(119) सम्प्रदाय ― धर्मानुयायियों का (भारतीय सम्प्रदाय के लोग बहुत पुरातनवादी होते हैं।)
(120) संस्था ― शिक्षित व्यक्तियों की (हिन्दू धार्मिक संस्था से जुड़ना हमारे लिए फायदेमंद है।)

समूहवाचक शब्दों का प्रयोग

शब्दों के शुद्ध प्रयोग पर सर्वत्र जोर दिया जाता है। यदि शब्द शुद्ध नहीं है या उसका प्रयोग शुद्ध न हुआ तो उनके द्वारा प्रेषणीय भाव ग्रहण नहीं किया जा सकेगा। यह तो साधारण शब्दों की बात है फिर जहाँ केवल कोई शब्द विशेष ही प्रयुक्त होना हो वहाँ तो दूसरा शब्द कथमपि भी प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।
समूहवाचक और ध्वनिवाचक शब्द ऐसे ही हैं। जैसे ध्वनिवाचक शब्द एक व्यवस्थित रूप में ही प्रयुक्त होते है वैसे ही समूहवाचक शब्द भी।
'सिंह गर्जना करता है।' इस वाक्य के स्थान पर यह नहीं कहा जा सकता है कि सिह रेंकता है या सिंह भौंकता है। क्योंकि रेंकना केवल गधों की ध्वनि का सूचक है और भौंकना कुत्तों की ध्वनि का। जो शब्द जिस जीव की ध्वनि का सूचक है वह उसी जीव के सम्बन्ध में ही प्रयुक्त हो सकता है।

इसी प्रकार समूहवाचक शब्द भी किसी वर्ग विशेष के लिये प्रयुक्त होते हैं और उनका प्रयोग उसी वर्ग-विशेष के समूह के सम्बन्ध में किया जाना चाहिये।
यदि हम भेड़ों के झुण्ड की जगह भेडों का ढेर कहेंगे तो यह अशुद्ध प्रयोग होगा। इसी तरह ताश की गड्डी के स्थान पर ताश की ढेरी नहीं कहा जा सकेगा। फूलों की गड्डी न होगी फूलों का ढेर हो सकता है। हाँ, मेघों की माला, मेघों का मण्डल दोनों ही प्रयोग हो सकते हैं। इसी प्रकार राष्ट्रों का मण्डल या राष्ट्रों का संघ कोई भी प्रयोग किया जा सकता है।

स्पष्ट है कि समूहवाची सामान्य शब्द तो अनेक शब्दों में लग सकते हैं। पर कुछ समूहवाची शब्द ऐसे होते हैं जो कुछ वर्ग-विशेषों में ही प्रयुक्त हो सकते हैं और कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका अपने ही वर्ग में प्रयोग हो सकता है। इनके अतिरिक्त कुछ शब्द ऐसे हैं जिनका बहुत ही विशिष्ट प्रयोग होता है। तात्पर्य यह कि ऐसे शब्द किसी अन्य समूह के वाचक नहीं बन सकते।
ऐसे शब्द हैं ―
फलों का घौद
लकड़ियों का गट्ठर
बालों की लट
कागज का पुलिन्दा
आम वृक्षों की अमराई
कपड़ों की लादी आदि।
उक्त प्रयोग को देखने से पता लगता है कि लट बालों की ही होगी। अमराई, आम के वृक्षों की ही होगी। लादी कपड़ों की ही होगी। समूहवाची शब्द का प्रयोग करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि वह शब्द उसी समूह का वाचक हो। नीचे समूहवाची शब्दों के कुछ उदाहरण दिये जा रहे हैं ―

(क) गायकों की माला अपना गायन शुरू कर रही थी। [अशुद्ध]
गायको की मण्डली अपना गायन शुरू कर रही थी। [शुद्ध]
(ख) मूखौं की अवलि प्रश्नों का क्या उत्तर देती? [अशुद्ध]
मूखौं की मण्डली प्रश्नो का क्या उत्तर देती? [शुद्ध]
(ग) प्रश्नों की मण्डली मूर्खी की अवलि न समझ सकी। [अशुद्ध]
प्रश्नों की अवलि मूखौँ की मण्डली न समझ सकी। [शुद्ध]
(घ) भेडों का ढेर खेत में चर रहा था। [अशुद्ध]
भेडों का झुण्ड खेत में चर रहा था। [शुद्ध]
(ङ) गेहूँ का झुण्ड खेत में चर रहा था। [अशुद्ध]
गेहूँ का झुण्ड खलिहान में पड़ा था। [शुद्ध]
(च) सैनिकों की गड्डी लड़ाई पर जा रही थी। [अशुद्ध]
सैनिकों की टुकड़ी लड़ाई पर जा रही थी। [शुद्ध]
(छ) ताश की टुकडी मेज पर रखी है। [अशुद्ध]
ताश की ढेरी मेज पर रखी है। [अशुद्ध]
ताश की गड्डी मेज पर रखी है। [शुद्ध]
(ज) भारत की उत्तरी सीमा पर पर्वतों का दल है। [अशुद्ध]
भारत की उत्तरी सीमा पर पर्वतों की माला है। [शुद्ध]
(झ) यात्रियों की माला पर्वत के नीचे है। [अशुद्ध]
यात्रियों का दल पर्वत के नीचे है। [शुद्ध]
(ञ) नक्षत्रों का गुच्छा आकाश में चमकता है। [अशुद्ध]
नक्षत्रों का मण्डल आकाश में चमकता है। [शुद्ध]
(ट) मेघों का गुच्छा जल बरसाता है। [अशुद्ध]
मेघों का मण्डल जल बरसाता है। [शुद्ध]
मेघों की माला जल बरसाती है। [शुद्ध]
(ठ) फलों की गड्डी से फल छाँट लो। [अशुद्ध]
फलों की ढेरी से फल छाँट लो। [शुद्ध]
(ड) घौद से एक किताब निकाल लो। [अशुद्ध]
धौद से एक फल निकाल लो। [शुद्ध]
(ढ) आमों की लट लटक रही थी। [अशुद्ध]
बालों की लट लटक रही थी। [शुद्ध]
(ण) कपड़ों का पुलिन्दा धोना है। [अशुद्ध]
कपड़ों की लादी धोना है। [शुद्ध]

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1. शब्द तथा पद क्या है? इसकी परिभाषा, विशेषताएँ एवं महत्त्व।
2. शब्द के प्रकार (शब्दों का वर्गीकरण)
3. तत्सम का शाब्दिक अर्थ एवं इसका इतिहास।
4. तद्भव शब्द - अर्थ, अवधारणा एवं उदाहरण
5. विदेशी/विदेशज (आगत) शब्द एवं उनके उदाहरण
6. अर्द्धतत्सम एवं देशज शब्द किसे कहते हैं?

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. द्विज (संकर शब्द) किसे कहते हैं? उदाहरण
2. ध्वन्यात्मक या अनुकरण वाचक शब्द किन्हें कहते हैं?
3. रचना के आधार पर शब्दों के प्रकार- रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
4. पारिभाषिक, अर्द्धपारिभाषिक, सामान्य शब्द।
5. वाचक, लाक्षणिक एवं व्यंजक शब्द
6. एकार्थी (एकार्थक) शब्द - जैसे आदि और इत्यादि वाक्य में प्रयोग
7. अनेकार्थी शब्द किसे कहते हैं? इनकी सूची
8. पूर्ण एवं अपूर्ण पर्याय शब्द एवं उनके उदाहरण
9. श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द क्या होते हैं एवं शब्द सूची
10. पुनरुक्त (युग्म) शब्द क्या होते हैं? उनके वर्ग

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. पर्यायवाची शब्द क्या है?शब्दों की सूची
2. विलोम शब्दों की रचना (विलोम बनने के नियम) व शब्द सूची || विलोम शब्दों के अन्य नाम
3. समानार्थी या समानार्थक शब्द किसे कहते हैं? इसकी परिभाषा और विशेषताएँ
4. समानार्थी शब्दों में अर्थभेद, शब्द प्रयोग के आधार पर अर्थ में अंतर
5. हिन्दी वर्णों/अक्षरों के भाग― शिरोरेखा, अर्द्ध पाई, मध्य पाई, अंत पाई, वक्र, मध्यम् रेखा, हलन्त, बिन्दु, मात्रा चिह्न

6. अनेक शब्दों के एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है? उपयोगिता, महत्व एवं शब्द सूची

हिन्दी भाषा एवं व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'स्रोत भाषा' एवं 'लक्ष्य भाषा' क्या होती है? इनकी आवश्यकता एवं प्रयोग
2. दुःख, दर्द, कष्ट, संताप, पीड़ा, वेदना आदि में सूक्ष्म अंतर एवं वाक्य में प्रयोग
3. झण्डा गीत - झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
4. घमण्ड, अहंकार, दम्भ, दर्प, गर्व, अभिमान, अहम् एवं अहंमन्यता शब्दों में सूक्ष्म अंतर एवं वाक्य में प्रयोग

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भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
2. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
3. मुहावरे और लोकोक्तियाँ
4. समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What Is Samas In Hindi
5. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम
2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

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1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

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1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. परिमाणवाचक, व्यक्तिवाचक और विभागवाचक विशेषण
3. भाषा क्या है? | भाषा की परिभाषाएँ और विशेषताएँ
4. अलंकार क्या है? | वक्रोक्ति, अतिशयोक्ति और अन्योक्ति अलंकार
5. उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकार

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1. संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार क्या होते हैं?
2. प्रत्यय क्या है? | कृदन्त और तदिधत प्रत्यय || महत्वपूर्ण प्रत्यय एवं उनके उदाहरण
3. व्याजस्तुति अलंकार और व्याजनिन्दा अलंकार क्या होते हैं?
4. स्थानांतरण प्रमाण पत्र हेतु आवेदन पत्र कैसे लिखें ?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
2. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
3. मुहावरे और लोकोक्तियाँ
4. समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What Is Samas In Hindi
5. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम
2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. उपमा अलंकार एवं उसके अंग
4. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
5. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
6. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. कार्यालयों में फाइलिंग (नस्तीकरण) क्या है?
3. राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम" का हिन्दी अनुवाद।
4. संयुक्त व्यन्जन किसे कहते हैं इनके उदाहरण
5. हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्णों में रकार लग सकता है?
6. अ और आ का उच्चारण स्थान एवं संबंधित तथ्य
7. अनुतान क्या है? अनुतान के उदाहरण एवं प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. लोकोक्तियाँ और मुहावरे
4. रस के प्रकार और इसके अंग
5. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
7. अलंकार और इसके प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिक शब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
11. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'ज' का अर्थ, द्विज का अर्थ
2. भिज्ञ और अभिज्ञ में अन्तर
3. किन्तु और परन्तु में अन्तर
4. आरंभ और प्रारंभ में अन्तर
5. सन्सार, सन्मेलन जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों
6. उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक शब्द क्या है.
7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. समास के प्रकार, समास और संधि में अन्तर
2. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
3. वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
4. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
5. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
6. कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. विराम चिन्हों का महत्व
2. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
3. लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर भाषा में इनकी उपयोगिता
4. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? इनका वाक्य में प्रयोग
5. पुनरुक्त शब्द एवं इसके प्रकार | पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अन्तर

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. गज़ल- एक साहित्य विधा
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? शांत रस एवं वात्सल्य रस के उदाहरण
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य का 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? एवं विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1.अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. पुनरुक्त शब्दों को चार श्रेणियाँ
3. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा
4. अपठित गद्यांश कैसे हल करें?
5. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?
2. राज भाषा क्या होती है, राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है?
3. छंद किसे कहते हैं? मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
4. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
5. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. रस के अंग – स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव
2. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण
3. काव्य के भेद- श्रव्य काव्य, दृश्य काव्य, प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य, पाठ्य मुक्तक, गेय मुक्तक, नाटक, एकांकी
4. अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ, अकर्मक से सकर्मक क्रिया बनाना
5. योजक चिह्न (-) का प्रयोग क्यों और कहाँ होता है?
6. 'पर्याय' और 'वाची' शब्दों का अर्थ एवं पर्यायवाची और समानार्थी शब्दों में अंतर
7. 'हैं' व 'हें' तथा 'है' व 'हे' के प्रयोग तथा अन्तर || 'हैं' और 'है' में अंतर || 'हैं' एकवचन कर्ता के साथ भी प्रयुक्त होता है
8. अनुनासिक और निरनुनासिक में अंतर
9. हिन्दी की क्रियाओं के अन्त में 'ना' क्यों जुड़ा होता है? मूल धातु एवं यौगिक धातु
10. अनुस्वार युक्त वर्णों का उच्चारण कैसे करें?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. मित्र को पत्र कैसे लिखें?
2. परिचय का पत्र लेखन
3. पिता को पत्र कैसे लिखें?
4. माताजी को पत्र कैसे लिखें? पत्र का प्रारूप
5. प्रधानपाठक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र
6. कक्षाध्यापक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र।
7. विभिन्न कारणों से छुट्टी के लिए आवेदन पत्र
8. स्थानांतरण प्रमाण पत्र हेतु आवेदन पत्र कैसे लिखें ?
9. स्थानांतरण प्रमाण पत्र की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु आवेदन
10. अवकाश हेतु आवेदन का प्रारुप
11. सरकारी पत्र क्या होते हैं? इनकी विशेषताएँ एवं प्रारूप

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों हेतु 'गाय' का निबंध लेखन
2. निबंध- मेरी पाठशाला

I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

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