विद्या ददाति विनयम्

Blog / Content Details

विषयवस्तु विवरण



बलाघात या स्वराघात क्या है इसकी आवश्यकता || बलाघात के भेद || उच्चारण संगम

मानव द्वारा अपने विचारों, भावों को दूसरों पर प्रकट करने के लिए मुख से विभिन्न प्रकार की ध्वनियों का उच्चारण किया जाता है। ये ध्वनियाँ वर्ण, शब्द या वाक्यों के रूप में होती हैं। जब एक व्यक्ति विचार प्रकट करने के लिए अपने मुख से उच्चारण करता है तब अपने मन की बात (भाव) का स्पष्ट और उचित अर्थ प्रदान करने के लिए कुछ-कुछ किसी विशेष वर्ण (अक्षर/ध्वनि), शब्दों या वाक्य पर जोर (बल) दिया जाता है। इसी बल (जोर) देने की क्रिया को ही 'बलाघात' या 'स्वराघात' कहा जाता है।

हिन्दी भाषा के इतिहास से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. भाषा का आदि इतिहास - भाषा उत्पत्ति एवं इसका आरंभिक स्वरूप
2. भाषा शब्द की उत्पत्ति, भाषा के रूप - मौखिक, लिखित एवं सांकेतिक
3. भाषा के विभिन्न रूप - बोली, भाषा, विभाषा, उप-भाषा
4. मानक भाषा क्या है? मानक भाषा के तत्व, शैलियाँ एवं विशेषताएँ
5. देवनागरी लिपि एवं इसका नामकरण, भारतीय लिपियाँ- सिन्धु घाटी लिपि, ब्राह्मी लिपि, खरोष्ठी लिपि
6. हिन्दू (हिन्दु) शब्द का अर्थ एवं हिन्दी शब्द की उत्पत्ति

बलाघात तथा स्वराघात की आवश्यकता

जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने विचारों, भावों अर्थात मन की बात को बताना चाहता है और वह चाहता है कि सामने वाला व्यक्ति उसकी बात को स्पष्टतया समझ सके अर्थात उसी बात को समझे जिसे वह बताना चाहता है, तब ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने मुख से निकलने वाली ध्वनि के कुछ वर्णो, शब्दों या वाक्यों पर कुछ विशेष जोर (बल) देता है। शब्द का उच्चारण करते समय अर्थ तथा उच्चारण की स्पष्टता के लिए किसी वर्ण (अक्षर) पर विशेष बल देते हैं। इस तरह हम कह सकते हैं कि भाव की स्पष्टता के लिए बलाघात या स्वराघात की आवश्यकता होती है।

बल या जोर कहाँ देते हैं

सामान्यतः बोलते समय व्यक्ति के द्वारा बल संयुक्ताक्षर के पहले वर्ण (अक्षर) पर लगता है।
उदाहरण - शिष्य, बन्धन। इनमें संयुक्त अक्षर के पहले 'शि' तथा 'ब' पर जोर दिया गया है।

ध्वनि एवं वर्णमाला से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. ध्वनि का अर्थ, परिभाषा, लक्षण, महत्व, ध्वनि शिक्षण के उद्देश्य ,भाषायी ध्वनियाँ
2. वाणी - यन्त्र (मुख के अवयव) के प्रकार- ध्वनि यन्त्र (वाक्-यन्त्र) के मुख में स्थान
3. हिन्दी भाषा में स्वर और व्यन्जन || स्वर एवं व्यन्जनों के प्रकार, इनकी संख्या एवं इनमें अन्तर
4. स्वरों के वर्गीकरण के छः आधार
5. व्यन्जनों के प्रकार - प्रयत्न, स्थान, स्वरतन्त्रिय, प्राणत्व के आधार पर

बलाघात भेद

बालाघाट के तीन भेद हैं-
(1) वर्ण (अक्षर) बलाघात - मुख से उच्चारण के समय जब किसी विशेष वर्ण या अक्षर पर बल (जोर) पड़ता है तब वहाँ वर्ण बलाघात होता है।
उदाहरण - यदि एक शब्द दिया जाए 'चला' और इसका वाक्य में प्रयोग करें।
जैसे- (i) श्याम घर से चला।
(ii) मोहन गाड़ी चला।

उक्त दोनों वाक्यों में से प्रथम वाक्य 'च' वर्ण पर बलाघात है। जबकि दूसरे वाक्य में 'ल' वर्ण पर बलाघात है। इस तरह स्वर बलाघात की प्रक्रिया होती है।

(2) शब्द बलाघात - बातों का मुख से प्रकटीकरण होने पर जब किसी वाक्य में प्रयुक्त किसी विशेष शब्द पर बल दिया जाता है तब वहाँ शब्द बलाघात होता है। इस प्रकार के बलाघात से अर्थ में भी अंतर आ जाता है।
उदाहरण- (i) तुम नहीं जाओगे।
(ii) तुम नहीं जाओगे?

उक्त दोनों वाक्यों में से प्रथम वाक्य में देखा जाए तो किसी भी शब्द पर विशेष बल नहीं पड़ता है। दूसरे वाक्य में 'नहीं' शब्द पर विशेष बलाघात पड़ रहा है। इस वाक्य में 'नहीं' शब्द पर जोर देने से प्रश्न करना स्पष्ट हो रहा है अर्थात व्यक्ति के द्वारा पूछा जा रहा है कि क्या वह जाएगा या नहीं।

(3) वाक्य बलाघात - इस तरह के बलाघात में पूरे वाक्य पर ही जोर दिया जाता है इसलिए यह सबसे अधिक अर्थपूर्ण भी होता है।
उदाहरण - आज प्रधान पाठक जी पढ़ाएँगे।
उक्त वाक्य से स्पष्ट है कि कल (बीता हुआ) अन्य शिक्षक के द्वारा पढ़ाया गया था और आज प्रधान पाठक जी के द्वारा पढ़ाया जाना है। इस तरह पूरे वाक्य पर बल दिया गया है। अतः यह 'वाक्य बलाघात' होगा।

ध्वनि, वर्णमाला एवं भाषा से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'अ' से 'औ' तक हिन्दी स्वरों की विशेषताएँ एवं मुख में उच्चारण स्थिति
2. प्रमुख 22 ध्वनि यन्त्र- स्वर तन्त्रियों के मुख्य कार्य
3. मात्रा किसे कहते हैं? हिन्दी स्वरों की मात्राएँ, ऑ ध्वनि, अनुस्वार, अनुनासिक, विसर्ग एवं हलन्त के चिह्न
4. वर्ण संयोग के नियम- व्यन्जन से व्यन्जन का संयोग

उच्चारण में संगम

ध्वनियों या शब्दों का उच्चारण करते समय विभिन्न शब्दों (पदों) की सीमाओं को जानना-समझना ही 'संगम' कहलाता है। संगम द्वारा यह निश्चित किया जाता है कि किन शब्दों को एक प्रवाह में एक साथ बोलना या पढ़ना है तथा किन शब्दों के मध्य सामान्य-सा (छोटा सा) विराम लगाना है। इसी प्रयुक्त विराम को 'संगम' कहा जाता है।
उदाहरण-
[अ] (i) चलिये, डॉक्टर से मिल आते हैं।
(ii) चलिये, आपको डॉक्टर से मिलवाते हैं।

उक्त दोनों वाक्य में से प्रथम वाक्य में डॉक्टर से दोनों व्यक्तियों के मिलने की बात स्पष्ट हो रही है। यह पता नहीं चलता है कि डॉक्टर से इलाज किसे करानी है। जबकि दूसरे वाक्य से स्पष्ट हो जाता है कि पहला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाना चाह रहा है। अतः उस व्यक्ति को डॉक्टर से मिलवाने के लिए कहा जा रहा है।

[ब] (i) बगीचे में चारों ओर घास उग आई है।
(ii) किसान ने बगीचे में चारों ओर घास उगाई है।

उक्त दोनों वाक्य में से प्रथम वाक्य से स्पष्ट हो रहा है कि घास अपने आप उगी है। जबकि दूसरे वाक्य से स्पष्ट होता है कि किसान ने सुन्दरता बढ़ाने या अन्य कारणों से स्वयं ही घास को उगाया है।
इस तरह हल्का सा विराम देने से अर्थ परिवर्तन हो जाता है जिसे की उच्चारण में संगम कहते हैं।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

Watch video for related information
(संबंधित जानकारी के लिए नीचे दिये गए विडियो को देखें।)
  • Share on :

Comments

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

  • BY: ADMIN
  • 0

हिन्दी भाषा में बिन्दु (Point /Dat) का प्रयोग 14 स्थानों पर होता है | इन बिन्दुओं को क्या कहा जाता है?

इस लेख में हिंदी भाषा में बिंदी/बिन्दु का प्रयोग किन-किन स्थानों पर किया जाता है और इन्हें किन नाम से जाना जाता है इस संबंध में महत्व जानकारी प्रदान की गई है।

Read more



  • BY: ADMIN
  • 0

हिन्दी वर्णों/अक्षरों के भाग― शिरोरेखा, अर्द्ध पाई, मध्य पाई, अंत पाई, वक्र, मध्यम् रेखा, हलन्त, बिन्दु, मात्रा चिह्न

इस लेख में हिन्दी वर्णों/अक्षरों के भाग― शिरोरेखा, अर्द्ध पाई, मध्य पाई, अंत पाई, वक्र, मध्यम् रेखा, हलन्त, बिन्दु, मात्रा चिह्न के बारे में जानकारी दी गई है।

Read more
  • BY: ADMIN
  • 0

हलन्त का अर्थ, इसके उपयोग एवं प्रयोग के नियम || हलन्तयुक्त एवं हलन्तरहित शब्दों के अर्थ में अंतर || Meaning of Halant and its uses and rules

हिन्दी एवं संस्कृत भाषा में प्रयुक्त एक ऐसा चिन्ह जो वर्णमाला के व्यन्जन वर्णों के नीचे तिरछी रेखा (्) के रूप में लगाया जाता है उसे हलन्त कहते हैं।

Read more