विद्या ददाति विनयम्

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विलोम शब्दों की रचना (विलोम बनने के नियम) व शब्द सूची || विलोम शब्दों के अन्य नाम― विरुद्धार्थी, विपर्याय, विपरीतार्थक, विपरीतार्थी, उल्टे अर्थ वाले शब्द

भाषा के ऐसे दो शब्द जो आपस में एक दूसरे के विपरीत अर्थ प्रदान करने वाले शब्द हों, उन्हें विलोम शब्द कहते हैं। इन विलोम शब्दों को अनि कई नामों से जाना जाता है। जैसे― विरुद्धार्थी, विपर्याय, प्रतिलोम, विरुद्धार्थी, निषेधात्मक, विपरीतार्थक या विपरीतार्थी एवं उल्टे अर्थ वाले शब्द।
विलोम शब्द बिल्कुल विपरीत अर्थ को व्यंजित करते हैं। यह संसार और मानव का जीवन कई तरह की विषमताओं से भरा पड़ा है। अतएव ठीक विपर्याय (प्रतिकूल) स्थितियों की जानकारी व्यक्ति के भावों और विचारों की अभिव्यक्ति के लिए परम आवश्यक है।

विलोम शब्दों की रचना― हिन्दी में विलोम शब्दों की रचना कई तरह से की जाती है। इन शब्दों का निर्माण विशेषकर चार प्रकार से किये जाता है।
1. स्वतन्त्र शब्दों का विलोम होना।
2. उपसर्गों के प्रयोगों द्वारा विलोम निर्माण।
3. लिङ्ग परिवर्तन द्वारा विलोम निर्माण।
4. ऊनार्थक अथवा न्यूनार्थक शब्दों के प्रयोगों द्वारा विलोम निर्माण।

1. स्वतन्त्र शब्दों का विलोम होना— ऐसे शब्द जो अपने आप में स्वतंत्र होते हैं उनमें किसी तरह का शब्दांश जोड़कर या हटाकर विलोम नहीं बनाया जाता बल्कि वे दोनों ही स्वतंत्र होते हैं। जैसे —
दिन — रात
उपर — नीचे
सरल — कठिन
द्वेष — प्रेंम
शीतल — ऊष्म

2. उपसर्गों के प्रयोगों द्वारा— प्रायः हिन्दी भाषा में ऐसे बहुत विलोम शब्द देखे जाते हैं जो उपसर्गों के प्रयोग से बने होते हैं। ये उपसर्ग अ, अन्, निर्, वि, अप्, प्रति, अव्, दुर्, नि, नि:, आ, सु, कु, प्रति, अब्, आ, कु आदि हैं।
'अ' और 'अन्' उपसर्गों के प्रयोगों के सन्दर्भ में एक सामान्य-सा नियम है।
'अ' उपसर्ग का प्रयोग— कोई तत्सम शब्द यदि व्यञ्जन से प्रारम्भ होता है तो विरोधी शब्द बनाते समय उसमें 'अ' उपसर्ग का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण —
गण्य — अगण्य
निश्चित — अनिश्चित
ज्ञात — अज्ञात
मूल्य — अमूल्य
कुछ शब्द स्वरों से प्रारंभ होते हैं उनमें 'अन्' उपसर्ग का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण —
अर्थ — अनर्थ
अंत — अनंत
उपयोगी — अनुपयोगी
उपजाऊ — अनुपजाऊ

3. लिङ्ग परिवर्तन द्वारा— लिङ्ग परिवर्तन कर भी विपरीतलिंगी (विपरीतार्थी) शब्द बनाए जाते हैं। उदाहरण—
कुमार — कुमारी
घोड़ा — घोड़ी
नर — नारी
पति — पत्नी

4. ऊनार्थक अथवा न्यूनार्थक शब्दों के प्रयोगों द्वारा— ऊनार्थक अथवा न्यूनार्थक अपने शब्द मूल रूप में किसी वस्तु का छोटा रूप व्यक्त करने, प्रेंम-भावनाओं को व्यक्त करने तथा अनादर की भावनाओं को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। इन्हीं सन्दर्भों में ये शब्द विलोम अर्थों को भी व्यक्त करते हैं। उदाहरण—
घण्टा — घन्टी
कुर्ता — कुर्ती
पहाड़ — पहाड़ी
हथौड़ा — हथौड़ी
टीप— संज्ञा शब्द का विपरीतार्थक संज्ञा होता है और विशेषण का विपरीतार्थक विशेषण होता है।

विलोम शब्दों की सूची

1. स्वतंत्र शब्दों के प्रयोगों द्वारा —

अमृत — विष
अतिवृष्टि — अनावृष्टि
अच्छा — बुरा
अकाम — सकाम
अंधकार — प्रकाश
अग्रज — अनुज़
आग — पानी
अधिक — न्यून
अनुराग — विराग
अपना — पराया
अंगीकार — इनकार
अंदर — बाहर
दिन — रात
आयात — निर्यात
आर्द्र —शुष्क
काला — सफेद
अंतर — सतत
अंतर्द्वद्व — बहिर्जंद
अंत — आदि
अस्त — उदय
वरदान — अभिशाप
वैकल्पिक — अनिवार्य
अधम — उत्तम
अथ — इति
अनुराग — विराग
अमीर — गरीब
अगम —सुगम
उग्र — सौम्य
इसका — उसका
अग्र — पश्चात्
अनुकूल — प्रतिकूल
अनुग्रह — विग्रह
अगला — पिछला
अग्नि — जल
अधिक — कम / न्यून
अभिमान — विनम्रता / नम्रता
अस्त — उदय
अमृत — विष
आय — व्यय

2. उपसर्ग के प्रयोग द्वारा —

(क) 'अ' उपसर्ग के योग से—
अत्यधिक — अत्यल्प
रुचि — अरूचि
अल्प — अल्पज्ञ
पार — अपार
श्लील अश्लील
अस्थिर अपराधी
स्थिर — अस्थिर
कार्य — अकार्य
चल — अचल
न्याय — अन्याय
मानवीय — अमानवीय
खाद्य — अखाद्य
ससीम — असीम
पूजा — अपूजा
नाम — अनाम
भद्र — अभद्र
मानवीय — अमानवीय
भेद — अभेद
धर्म — अधर्म
गोचर — अगोचर
कर्मण्य — अकर्मण्य
कर्मठ — अकर्मठ
गोचर — अगोचर
विरक्त — अनुरक्त
अध — अनध
पराजय — अपराजय
भेद — अभेद
ज्ञात — अज्ञात
तुकांत — अतुकांत
कर्म — अकर्म
धीर — अधीर
न्याय — अन्याय
अगोचर — गोचर धीर अधीर

(ख) 'अन्' उपसर्ग के योग से —
उपमेय — अनुपमेय
वृष्टि — अनावृष्टि
इच्छा — अनिच्छा
इष्ट — अनिष्ट
आहूत — अनाहूत
इच्छा — अनिच्छा
उत्तीर्ण — अनुत्तीर्ण
ऐश्वर्य — अनैश्वर्य
ऐतिहासिक — अनैतिहासिक
ईश्वर — अनीश्वर
उदात्त — अनुदात्त
आगत — अनागत
उपयोगी — अनुपयोगी
उपमेय — अनुपमेय
अधिकृत — अनधिकृत
आर्य — अनार्य
ईश्वर — अनिश्वर
उदार — अनुदार
आर्य — अनार्य
आवरण — अनावरण
आवृत्त — अनावृत्त
इष्ट — अनिष्ट

(ग) 'निर्' उपसर्ग के योग से—
आहार — निराहार
आशा — निराशा
आदर — निरादर
सार्थक — निरर्थक
साक्षर — निरक्षर
मूल — निर्मूल
सगुण — निर्गुण
भय — निर्भय
अपराध — निरपराध
सापेक्ष — निर्पेक्ष
विवाद — निर्विवाद
मल — निर्मल
उद्यमी — निरुद्यमी
सामिष — निरामिष
सलज्ज — निर्लज्ज

(घ) 'वि' उपसर्ग के द्वारा —
वाद — विवाद
संश्लेषण — विश्लेषण
सम्पत्ति — विपत्ति
योग — वियोग
स्मरण — विस्मरण
सधवा — विधवा
संधि — विग्रह
सम — विषम
अज्ञ — विज्ञ
आकर्षण — विकर्षण
उन्मुख — विमुख
प्रसाद — विषाद
संघटन — विघटन
निरत — विरत
तृष्णा — वितृष्णा
पक्ष — विपक्ष
संपन्न — विपन्न
संकल्प — विकल्प
रागी — विरागी
जातीय — विजातीय
क्षोभ — विक्षोभ
संयुक्त — वियुक्त
संयोग — वियोग
क्रय — विक्रय

(ङ) 'अप' उपसर्ग के योग से ―
संस्कृति ― अपसंस्कृति
वाद ― अपवाद
उपकार ― अपकार
मान ― अपमान
उत्कर्ष ―अपकर्ष
शकुन ― अपशकुन
यश ― अपयश
कीर्ति ― अपकीर्ति

(च) 'प्रति' उपसर्ग के योग से ―
वादी ― प्रतिवादी
फल ― प्रतिफल
अनुकूल ― प्रतिकूल
वाद ― प्रतिवाद
सहयोगी ― प्रतियोगी

(छ) 'अव' उपसर्ग के योग से ―
आज्ञा ― अवज्ञा
उन्नति ― अवनति
गुण ― अवगुण
आरोह ― अवरोह

(ज) 'दुर' उपसर्ग के योग से —
सुदशा ― दुर्दशा
सुगम ― दुर्गम
सज्जन ― दुर्जन
सदव्यवहार ― दुर्व्यवहार
सुदिन ― दुर्दिन
सदाशय ― दुराशय
गुण ― दुर्गुण
साहस ― दुस्साहस
सौभाग्य ― दुर्भाग्य
आचार ― दुराचार
आग्रह ― दुराग्रह
सुकर्म ― दुष्कर्म

(झ) 'नि' उपसर्ग के योग से ―
आदर ― निरादर
कपट ― निष्कपट
उत्कृष्ट ― निकृष्ट
उन्मीलन ― निमीलन
स्वार्थ ― निःस्वार्थ
विधि ― निषेध
रोग ― निरोग
रोध ― निरोध

(ञ) 'आ' उपसर्ग की योग से ―
नास्तिक ― आस्तिक
गमन ― आगमन
प्रदान ― आदान
विकर्षण ― आकर्षण

(ट) 'सु' उपसर्ग के योग से ―
दुर्दिन ― सुदिन
दुष्कर्म ― सुकर्म
बेडौल ― सुडौल
कुपात्र ― सुपात्र
दुर्गम ― सुगम
अजान ― सुजान

(ठ) 'दु' उपसर्ग के योग से ―
सुशील ― दुःशील
सुखांत ― दुखांत

3. लिङ्ग परिवर्तन द्वारा विलोम निर्माण।

शेर ― शेरनी
कुत्ता ― कुतिया
सेठ ― सेठानी
जीजी ― जीजा
मर्द ― औरत
देव ― देवी
चाचा ― चाची
मामा ― मामी
दादा ― दादी
मोर ― मोरनी
भैंस ― भैंसा
वर ― वधू
बूढ़ा ― बुढ़िया
चूहा ― चुहिया
पुत्र ― पुत्री
पति ― पत्नी
नर ― नारी
राजा ― रानी
मादा ― नर
भाई ― बहन
पिता ― माता

4. ऊनार्थक अथवा न्यूनार्थक शब्दों के प्रयोगों द्वारा विलोम निर्माण।

रस्सा ― रस्सी
चोटी ― चुटिया
झोला ― झोली
लोटा ― लुटिया
कटोरा ― कटोरी
ताल ― तलैया
घर ― घरौंदा
कोठा ― कोठरी
नाला ― नाली
पहाड़ ― पहाड़ी
हथौड़ी ― हथौड़ा
गुड्डा ― गुड्डी
छाता ― छतरी
टोप ― टोपी
डब्बा ― डिबिया
पुस्तक ― पुस्तिका
मटका ― मटकी
कंघा ― कंघी
झंडा ― झंडी
गागर ― गगरी
गोला ― गोली
कुर्त्ता ― कुर्त्ती
चिमटा ― चिमटी
घंटा ― घंटी

अन्य विलोम शब्दों की सूची

अस्त ― उदय
अग्रज ― अनुज
अगम ― सुगम
अति ― अल्प
अरुचि ― सुरुचि
अकाल ― सुकाल
अल्पसंख्यक ― बहुसंख्यक
अंक ― निरंक
अंकुश ― निरकुंश
अतिवृष्टि ― अनावृष्टि
अतीत ― भविष्य
आच्छादन ― अनाच्छादन
आदि ― अनादि
आहार ― अनाहार
आतुर ― अनातुर
आग्रह ― दुराग्रह
अधुनातन ― पुरातन
अल्पायु ― दीर्घायु
अनाहत ― आहत
आस्था ― अनास्था
उदय ― अस्त
अंबर ― अवनि
पूर्ण ― अंश
अकिंचन ― धनी
अपनाव ― दुराव
परिग्रह ― अपरिग्रह
अपूर्ण ― पूर्ण
अपूर्व ― साधारण
अप्रस्तुत ― प्रस्तुत
अप्रासंगिक ― प्रासंगिक
अभिनंदनीय ― निदंनीय
आभ्यंतर ― बाह्य
अमंगल ― मंगल
शुभ ― अशुभ
अनाथ ― सनाथ
अर्पण ― ग्रहण
अवनत ― उन्नत
अद्वैत ― द्वैत
अथक ― थक
अँधेरा ― प्रकाश
आदि ― अंत
बहिर्मुखी ― अन्तर्मुखी
औरस ― नाजायज
कदाचार ― सदाचार
कर्कश ― मधुर
कनिष्ठ ― ज्येष्ठ
कल्पित ― यथार्थ
कलह ― सुलह
कुमार्ग ― सुमार्ग
उपलब्धि ― अनुपलब्धि
उपाय ― निरुपाय
उम्मीद ― नाउम्मीद
उत्साह — निरुत्साह
उत्तम ― अधम
उत्कृष्ट ― निकृष्ट
उपयोग ― अनुपयोग
उच्च ― निम्न
एक – अनेक
ऐहिक ― पारलौकिक
आकाश ― पाताल
अनंत ― सांत
अभ्यास ― अनाभ्यास
अकल्याण ― कल्याण
आयुष्मान ― आयुष्मती
आग्रह ― दुराग्रह
आरंभ ― अनारंभ
आम ― खास
आधुनिक ― प्राचीन
इहलोक ― परलोक
इच्छा ― अनिच्छा
उपकार ― अपकार
सुषुप्ति ― जागरण
जेय ― अजेय
जहर ― अमृत
अज्ञेय ― ज्ञेय
झूठ ― सच
झोपड़ी ― महल
टेढ़ा ― सीधा
ठंड ― गरमी
ठोस ― नरम
विदेश ― देश
निहित ― पृथक
निष्पक्ष ― पक्षपात
पदस्थ ― अपदस्थ
परवर्ती ― पश्चवर्ती
परार्थ ― स्वार्थ
खीझना ― रीझना
सुधा ― गरल
गंदगी ― सफाई
घृष्ट ― विनीत
निर्माण ― ध्वंस
सही ― गलत
नकल ― अकल
अभिन्न ― इतर
इति ― प्रारंभ
उधर ― इधर
औचित्य ― अनौचित्य
ग्राम्य ― नगरीय
घोष ― अघोष
चंद्रमा ― सूर्य
चतुर ― मूर्ख
चर ― अचर
विशेष ― अशेष
निश्चित ― अनिश्चित
सचेष्ट ― निश्चेष्ट
सफल ― निष्फल
असली ― नकली
आकार ― निराकार
औपचारिक ― अनौपचारिक
चांदी ― सोना
चेतन ― जड़
ज्वार ― भाटा
जन्म ― मृत्यु
परिपक्व ― अपरिपक्प
दोष ― गुण
निर्द्वन्द्व ― द्वन्द्व
दिवा ― रात्रि
धर्म ― अधर्म
आवृत्त अनावृत
नग्न ― ढका
नटी ― नट
नर्क ― स्वर्ग
निंदा ― प्रशंसा
अनित्य ― नित्य
निरीश्वरवादी ― ईश्वरवादी
परिवर्तन ― अपरिवर्तन
फायदा ― नुकसान
बदचलन ― नेकचलन
लिखित ― अलिखित
भोग ― संयम
निर्वाचित ― मनोनीत
म्लान ― अम्लान
आय ― व्यय
श्रोता ― वक्ता
विचारणीय ― उपेक्षित
धीर ― अधीर
परीक्षित ― अपरीक्षित
पाक ― नापाक
पाठ्य ― अपाठ्य
प्रभारी ― प्रधान
प्रमुख ― गौण
प्रयाण ― आगमन
प्रयोग ― सिद्धांत
बोध ― अबोध
एकत्र ― विकीर्ण
परिमित ― अपरिमित
प्रणम्य ― निंद्य
प्रत्यागमन ― प्रतिगमन
प्रतिदिन ― कभी-कभी
परा ― अपरा
संभव ― असंभव
साधु ― असाधु
जागरण ― स्वप्न
सामान्य ― विशिष्ट
स्वकीय ― परकीय
स्वल्पायु ― चिरायु
हर्ष ― विषाद
निंदा ― स्तुति
अचेत ― सचेत
गृहीत ― त्यक्त
प्रलय ― सृष्टि
प्रवृत्ति ― निवृत्ति
निर्माण ― विनाश
शिख ― नख
सदय ― निर्दय
भूगोल खगोल
महात्मा ― दुरात्मा
वाचाल ― मूक
नैसर्गिक ― कृत्रिम
बहिष्कार ― अंगीकार
सित ― असित
रंक ― राजा
हास ― रुदन
पुष्ट ― अपुष्ट
लिप्त ― निर्लिप्त
जंगम ― स्थावर
पाश्चात्य ― पौर्वात्य
कृपण ― दाता
पुरस्कार ― तिरस्कार
परिश्रम ― विश्राम
भोगी ― योगी
रचना ― विध्वंस
मूक ― वाचाल
लघुता ― गुरुता
मुख ― पृष्ठ
वक्र ― सरल
शुक्ल ― कृष्ण
उत्तरायण ― दक्षिणायन
प्रकाश ― अंधकार तिमिर
घृणा ― प्रेंम
सभ्य ― बर्बर
ग्राह्य ― त्याज्य
गृहस्थ ― सन्यासी
अन्त्य ― आद्य
कटु ― मधु
कठोर ― कोमल
कुटिल ― सरल
रिक्त ― पूर्ण
सजल ― निर्जल
सम्मुख ― विमुख
अश्लील ― श्लील
उर्ध्व ― निम्न
ऋजु ― कुटिल
ऋण ― उऋण
ऋणात्मक ― धनात्मक
कृतज्ञ ― कृतघ्न
क्षमा ― क्रोध
आबाद ― खंडहर
मंडन ― खंडन
खाद्य ― अखाद्य
गौरव ― लाघव
कृपण ― दाता
गुप्त ― प्रकट
घरेलू ― जंगली
तामसिक ― सात्त्विक
तुच्छ ― महान
तम ― आलोक
तीव्र ― मंद
दूषित ― स्वच्छ
संकीर्ण ― विस्तीर्ण
गीत ― उष्ण
शोषक ― पोषक
रक्षक ― भक्षक
उदयाचल ― अस्ताचल
एड़ी ― चोटी

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2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. कार्यालयों में फाइलिंग (नस्तीकरण) क्या है?
3. राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम" का हिन्दी अनुवाद।
4. संयुक्त व्यन्जन किसे कहते हैं इनके उदाहरण
5. हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्णों में रकार लग सकता है?
6. अ और आ का उच्चारण स्थान एवं संबंधित तथ्य

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. लोकोक्तियाँ और मुहावरे
4. रस के प्रकार और इसके अंग
5. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
7. अलंकार और इसके प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिक शब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
11. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'ज' का अर्थ, द्विज का अर्थ
2. भिज्ञ और अभिज्ञ में अन्तर
3. किन्तु और परन्तु में अन्तर
4. आरंभ और प्रारंभ में अन्तर
5. सन्सार, सन्मेलन जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों
6. उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक शब्द क्या है.
7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. समास के प्रकार, समास और संधि में अन्तर
2. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
3. वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
4. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
5. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
6. कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. विराम चिन्हों का महत्व
2. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
3. लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर भाषा में इनकी उपयोगिता
4. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? इनका वाक्य में प्रयोग
5. पुनरुक्त शब्द एवं इसके प्रकार | पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अन्तर

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. गज़ल- एक साहित्य विधा
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? शांत रस एवं वात्सल्य रस के उदाहरण
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य का 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? एवं विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1.अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. पुनरुक्त शब्दों को चार श्रेणियाँ
3. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा
4. अपठित गद्यांश कैसे हल करें?
5. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?
2. राज भाषा क्या होती है, राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है?
3. छंद किसे कहते हैं? मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
4. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
5. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. रस के अंग – स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव
2. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण
3. काव्य के भेद- श्रव्य काव्य, दृश्य काव्य, प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य, पाठ्य मुक्तक, गेय मुक्तक, नाटक, एकांकी
4. अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ, अकर्मक से सकर्मक क्रिया बनाना
5. योजक चिह्न (-) का प्रयोग क्यों और कहाँ होता है?
6. 'पर्याय' और 'वाची' शब्दों का अर्थ एवं पर्यायवाची और समानार्थी शब्दों में अंतर
7. 'हैं' व 'हें' तथा 'है' व 'हे' के प्रयोग तथा अन्तर || 'हैं' और 'है' में अंतर || 'हैं' एकवचन कर्ता के साथ भी प्रयुक्त होता है
8. अनुनासिक और निरनुनासिक में अंतर
9. हिन्दी की क्रियाओं के अन्त में 'ना' क्यों जुड़ा होता है? मूल धातु एवं यौगिक धातु
10. अनुस्वार युक्त वर्णों का उच्चारण कैसे करें?

I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

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