विद्या ददाति विनयम्

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एकार्थी (एकार्थक) शब्द - एक ही अर्थ के लिए प्रयुक्त शब्दों के अर्थों में सूक्ष्म अन्तर || Ekarthi (Ekarthak) shabd - अर्थ के आधार पर

एकार्थी शब्द - नाम से स्पष्ट है - एक अर्थ वाला। यदि हम शब्द एकार्थी का विच्छेद करें तो एक+अर्थी अर्थात एक अर्थ प्रदान करने वाला होगा। ऐसे शब्द जो केवल एक ही प्रकार का अर्थ प्रकट करें, एकार्थी (एकार्थक) शब्द कहलाते हैं। एकार्थक शब्दों के अन्तर्गत प्रायः व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ आती हैं। नीचे एकार्थक शब्दों के उदाहरण देखें -

1. मनुष्यों के नाम - राम, श्याम, मोहन, गीता, सीता, चंचल, मोहनदास, कमलादेवी आदि।
2. देशों के नाम - भारत, श्रीलंका, इंग्लैंड, ईरान, अरब, रूस आदि।
3. नगरों के नाम - जबलपुर, नागपुर, लंदन, मास्को, दिल्ली, पेरिस, बर्लिन।
4. गाँवों / कस्बों के नाम - कान्हीवाड़ा, भोमा, बरघाट, मेहरा पिपरिया, छपारा, बादलपुर आदि।
5. पहाड़ों के नाम - हिमालय, विन्ध्याचल, सतपुड़ा एल्प्स, एण्डीज़ आदि।
6. नदियों के नाम - गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी, टेम्स, मिसीसिपी आदि।
7. महीनों के नाम - जनवरी, फ़रवरी, मार्च, अप्रैल, चैत्र, आषाढ़, पौष, श्रावण, भादो आदि।
8. दिनों के नाम - सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।
9. उपाधियाँ - निराला, सर, रत्नाकर, ग़ालिब आदि।
10. कलाओं के नाम - काव्य कला, संगीत कला, वास्तुकला, साहित्य, मूर्तिकला आदि।
11. विद्याओं या विषयों के नाम - इतिहास, भूगोल, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीवविज्ञान आदि।
12. भाषाओं के नाम - हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, रूसी, उर्दू, संस्कृत, पाली आदि।
13. बीमारियों के नाम - प्लेग, हैजा, फ़्लू , यक्ष्मा, पक्षाघात, कोरोना आदि।
14. विज्ञान के पारिभाषिक शब्द - हाइड्रोजन, धमनी, तापमान, इस्पात, दुग्धमापी, निःश्वसन, चिकित्सा, चलचित्र, भौतिकी, रसायनशास्त्र आदि।
15. क़ानून के पारिभाषिक शब्द - प्रतिवादी, दण्ड, बैनामा, अभियोग, न्यायाधीश, गवाही, पेशी, अपराध आदि।
16. अन्य शब्द - इनके अतिरिक्त सैकड़ों शब्द हैं जिनका एक ही अर्थ होता है। जैसे -
पेंसिल, किताब, मेज, कुर्सी, बोतल, शीशी, रेडियो, एक, दो, बीस, नीला, पीला, लाल, हरा, दरवाजा, खिडकी, दीवार, छत, पंखा, आयु, अवस्था, अपराध, पाप, अस्त्र-शस्त्र, आदि, इत्यादि, आज्ञा, आदेश, ईर्ष्या, देश, स्पर्धा, आधिव्याधि, निधन, मृत्यु, खेद, शोक, दुख, गर्व, दंभ, ग्लानि, लज्जा, तट, पुलिन, नायिका, अभिनेत्री, प्रेंम, स्नेह, प्रणय, पुरुस्कार, पारितोषिक, पत्नि, स्त्री, महिला, नारी, यंत्रणा, यातना, सेवा, सुश्रुषा, समीर, पवन, गोष्ठी, साहस, वीरता, वार्ता, मंत्रणा, ईश्वर, सत्य, दीवार, लोहा, वृक्ष, केला, हिमालय, दिल्ली, इतिहास, सूर्य, चन्द्रमा, पुस्तक आदि।

एक ही अर्थ हेतु प्रयुक्त शब्दों अर्थों में सूक्ष्म अंतर

हिन्दी भाषा में ऐसे बहुत सारे एकार्थी शब्द है, जिनमें से किसी एक अर्थ के लिए दो या उसे अधिक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। किन्तु उन शब्दों के अर्थ में सूक्ष्म अंतर होता है। नीचे के उदाहरणों में शब्दों के अर्थानुसार प्रयोग को समझें।

एकार्थी शब्दों का वाक्यों में प्रयोग

(I) आयु एवं अवस्था
आयु - एक व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की अवधि को 'आयु' कहते हैं।
उदाहरण - (1) आप दीर्घायु हो।
(2) आपकी आयु लंबी हो।
(3) रमाकान्त ने 80 वर्ष की आयु प्राप्त की।
(जन्म से मृत्यु तक का समय)
अवस्था - जीवन के कुछ बीते हुए काल या स्थिति को 'अवस्था' कहते हैं।
उदाहरण - (1) आपकी यह अवस्था कैसी है?
(2) रोगी किस अवस्था में है?
(3) इस अवस्था का काल 22 साल है।
(जीवन का व्यतीत कुछ समय)

(II) अपराध एवं पाप
अपराध - अपराध सामाजिक कानून का उल्लंघन होता है। ऐसा कुकृत्य जो समाज एवं लोक के हित में न हो।
उदाहरण - उसे इस अपराध की सजा तो मिलेगी ही।
पाप - नैतिक नियमों का उल्लंघन 'पाप' कहलाता है। ऐसा घृणित कृत्य जो समाज के साथ-साथ धर्म एवं अध्यात्म की दृष्टि से अच्छा न हो।
उदाहरण - उसने अपने माता-पिता को दर-दर भटकाने का पाप किया है।

(III) अस्त्र एवं शस्त्र
अस्त्र - ऐसा हथियार जो हाथ से फेंककर चलाया जाता है जैसे भाला, तीर, बरछी आदि।
उदाहरण - जानवरों का शिकार अस्त्र चला कर ही किया जाता है।
शस्त्र - ऐसे हथियार जो हाथ में पकड़ कर ही चलाए जाते हैं जैसे तलवार (कृपाण/खड्ग), गदा, चाकू, फरसा, कुल्हाड़ी, बन्दूक, पिस्तौल आदि।
उदाहरण - दोनों योद्धा अपने शस्त्रों का प्रयोग कुशलतापूर्वक कर रहे थे।

(IV) आदि एवं इत्यादि
आदि - संज्ञाओं (वस्तुओं आदि) के साधारणतः एक या दो उदाहरण के बाद 'आदि' का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण - स्टेशनरी से ग्राहक ने कापियाँ, पेन आदि खरीदा।
इत्यादि - भिन्न भिन्न प्रकार की संज्ञाओं (वस्तुओं आदि) के साधारणतः तीन से तीन से अधिक उदाहरणों के बाद 'इत्यादि' का प्रयोग होता है।
उदाहरण - उन्होंने बाजार से कपड़े, बर्तन, गहने, सब्जियाँ इत्यादि वस्तुएँ क्रय की। (अनेक उदाहरण पर प्रयुक्त)

(V) ईर्ष्या एवं द्वेष
ईर्ष्या - दूसरे की प्रगति देखकर बुरा लगने का भाव ईर्ष्या कहलाता है।
उदाहरण - हमें किसी से ईर्ष्या नहीं करना चाहिए।
द्वेष - दूसरों की प्रगति देख शत्रुता के भाव रखना।
उदाहरण - दुनिया में आज ऐसे भी कई देश है जो हमसे द्वेष रखते हैं।

(VI) स्पर्धा एवं प्रतिस्पर्धा
स्पर्धा - दूसरी को बढ़ता देख स्वयं बढ़ने की इच्छा रखना रखने के भाव स्पर्धा कहलाती है।
उदाहरण - आजकल क्रिकेट स्पर्धा चल रही है।
प्रतिस्पर्धा - दूसरों से किसी क्षेत्र में बराबरी करने की चेष्टा करना।
उदाहरण - विद्यार्थियों की उन्नति स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में छिपी है।

(VII) निधन एवं मृत्यु
निधन - किसी महान विभूति के मरण को निधन कहा जाता है।
उदाहरण - लोकप्रिय जननायक के निधन से इस पूरे अंचल में शोक की लहर दौड़ गई।
मृत्यु - किसी जनसामान्य व्यक्ति के मरण हेतु मृत्यु शब्द का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण - हमारे पड़ौसी की मृत्यु हो गई।

(VIII) खेद, दुःख, शोक, क्षोभ, कष्ट, क्लेश, पीड़ा, व्यथा, विषाद, संताप, वेदना एवं दर्द
खेद - किसी भूल या त्रुटि के कारण जो क्षणिक दुःखानुभूति होती है उसे खेद कहा जाता है। किसी गलती पर दुःखी होना। मन में दुःख के ऐसे भाव जो भूलवश किये गए कार्यों के कारण पैदा हुए हों।
उदाहरण - धोखे से पुस्तक का पन्ना फटने से मोहन ने खेद प्रकट किया।
(मन से सम्बन्धित अपनी भूल पर)
दुःख - प्रतिकूल तथा हानिकारक बातों के कारण उत्पन्न मानसिक अनुभूति दुःख कहते हैं। किसी गतिविधि या क्रियाकलाप के कारण नुकसान होने पर दुःख होना जोकि तन और मन से संबंधित हो सकता है।
उदाहरण - ओलावृष्टि के कारण फसलें नष्ट होने पर किसानों को अपार दुख हो रहा है।
शोक - किसी प्रिय व्यक्ति के अनिष्ट होने पर होने मन में उठने वाले भाव को शोक कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु या किसी गहन क्षति के फलस्वरुप उत्पन्न दुःख ही शोक कहलाता है।
उदाहरण - उसे इस बात का शोक है कि उसका मित्र बीमारी से ठीक नहीं हो पा रहा है।
क्षोभ - सफलता न मिलने या असामाजिक स्थिति पर दुखी होना।
उदाहरण - इतने अच्छे कार्यों के बावजूद पुरस्कार के लिए चयन न होने का उसे बड़ा क्षोभ है।
कष्ट - प्रतिकूल तथा कठिन परिस्थितियों के कारण शारीरिक एवं मानसिक थकावट को कष्ट कहते हैं। अभाव या असमर्थता के कारण मानसिक और शारीरिक कष्ट होता है।
उदाहरण - पर्याप्त कपड़ों के अभाव में उसे ठंड में बहुत कष्ट होता है।
क्लेश - यह मानसिक अप्रिय भावों या अवस्थाओं का सूचक है।
उदाहरण - भाई के प्रति इतनी दुर्भावना कितना क्लेश है।
पीड़ा - अत्यधिक श्रम से होने वाले कष्ट को पीड़ा कहते हैं, यह भी कष्ट की तरह शारीरिक- मानसिक होती है। रोग-घोट आदि के कारण भी शारीरिक पीड़ा होती है।
उदाहरण - बिच्छू के काटने पर बहुत पीड़ा होती है।
व्यथा - किसी आघात के कारण मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट या पीड़ा व्यथा के अंतर्गत आती है। वेदना का हल्का रुप व्यथा है। इसमें रह-रह कर मन में दुःख उत्पन्न होता है।
उदाहरण - पुत्र के दुर्व्यवहार की व्यथा दूसरों से कहना बड़ा कष्टकारी होता है।
विषाद - अतिशय दुःखी होने के कारण किंकर्तव्यविमूढ होना विषाद की स्थिति को दर्शाता है। जब इच्छायें अधूरी रह जाती हैं तब मन में जो निराशा की गहन भावना उत्पन्न होती है, उसे विषाद कहते हैं।
उदाहरण - नौकरी न मिल पाने के कारण वह विषाद ग्रस्त हो गया है।
संताप - व्यथा में कुछ स्थायित्व आ जाता है उसे संताप कहते हैं।
उदाहरण - बेटे का घर छोड़कर चले जाने से माता पिता संताप ग्रस्त हो चुके हैं।
वेदना - मानसिक पीड़ा के उग्र तथा अपेक्षाकृत स्थायी रुप को वेदना कहा जाता है।
उदाहरण - नशे की लत से बर्बादी के कारण उसकी पत्नी अपनी वेदना दूसरों को भी नहीं बता सकती।
दर्द - पीड़ा का ही पर्याय दर्द होता है। उदाहरण - हड्डी टूट जाने के कारण उसे बहुत दर्द सहन करना पड़ रहा है।

(IX) गर्व, दम्भ, दर्प, अभिमान, घमण्ड, अहंकार, अहम् एवं अहंमन्यता
गर्व - किसी तरह का अच्छा कार्य होने पर ऊँचा होने की भावना या विद्या, धन आदि के कारण बड़ा समझने का भाव गर्व होता है।
उदाहरण - हमें अपने देश पर गर्व है।
दम्भ - किसी प्रकार की न योग्यता होते हुए भी बड़ा समझना।
उदाहरण - मनुष्य में दम्भ नहीं होना चाहिए।
अहंकार - मन का गर्व, झूठे अपनेपन का बोध होना।
उदाहरण - सबसे अच्छे अंक प्राप्त होने पर उसे बहुत अहंकार हो गया है।
दर्प - नियम के विरुद्ध काम करने पर भी घमंड करना।
उदाहरण - लड़के को अपने पिता का विधायक होने का दर्प है।
अभिमान - प्रतिष्ठा में अपने को बड़ा और दूसरे को छोटा समझना।
उदाहरण - सभी के सामने अकड़ कर चलता है, पता नहीं उसे किस बात का अभिमान है।
घमण्ड - सभी स्थितियों में अपने को बड़ा और दूसरे को हीन समझना। अहमन्यता, अभिमान का प्रचंड रुप, सभी स्थितियों में स्वयं को बड़ा, दूसरों को हीन समझने का भाव।
उदाहरण - रावण का भी घमण्ड नहीं रहा तो फिर तुम क्या चीज हो।
अहंकार - मन का गर्व, झूठे अपने पन का बोध।
उदाहरण - उसे अपनी राजनीतिक पहुंच का अहंकार हो गया है।
अहम् - हम भी कुछ है यह प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरण - आजकल वह सीधे मुँह बात नहीं करता, पता नहीं उसे किस बात का अहम् है।
अहंमन्यता - अंह का प्रदर्शन, अहंकार का प्रचंड रूप।
उदाहरण - उसे उसकी ही अहंमन्यता ले डूबेगी।

(X) ग्लानि एवं लज्जा
ग्लानि - अकेले में किसी कार्य की भूल का पश्चाताप होना ग्लानि कहलाता है।
उदाहरण - सोहन ने उसका अपमान तो कर दिया किंतु बाद में अनुभूति होने पर उसे बहुत ग्लानि हुई।
लज्जा - शर्म के कारण आँखें न मिला पाना या कोई बुरा काम हो जाने पर दूसरो से मुँह छिपाना।
उदाहरण - आजकल की लड़कियों को लज्जा तो लेश मात्र भी नहीं है।

(XI) नायिका एवं अभिनेत्री
नायिका - किसी रचनाकार के द्वारा लिखित नाटक व एकांकी की मुख्य किरदार नायिका कहलाती है।
उदाहरण - दीपदान नामक एकांकी की नायिका है।
अभिनेत्री - किसी नाटक, एकांकी, कथा या कहानी के रंगमंच पर प्रदर्शन में नायिका का अभिनय करने वाली महिला अभिनेत्री कहलाती है।
उदाहरण - 'शोले' फिल्म की अभिनेत्री हेमामालिनी ने काफी अच्छा अभिनय किया है।

(XII) तट एवं तीर
तट - नदी तालाव के किनारे की जमीन को तट कहा जाता है।
उदाहरण - तट पर बैठकर लहरें देखना अच्छा लगता है।
तीर - जल से स्पर्श होने वाली जमीन तीर कहलाती है।
उदाहरण - यमुना नदी के तीर बाल गोपाल खेल रहे हैं।

(XIII) प्रेंम, प्रणय, स्नेह (नेह), वात्सल्य, अनुराग एवं आसक्ति
प्रेंम - व्यापक अर्थ में प्रयुक्त होता है जैसे ईश्वर से प्रेंम, स्त्री से प्रेंम आदि। यह सभी के लिये प्रयुक्त होता है।
उदाहरण - हमें अपने देश से प्रेंम है।
प्रणय - दाम्पत्य प्रेंम या सख्य-भाव मिश्रित अनुराग प्रणय कहलाता है।
उदाहरण - राधा का कृष्ण जी से प्रणय हुआ था।
स्नेह या नेह - छोटों के प्रति प्रेंम का स्नेह कहते हैं।
उदाहरण - यदि बच्चों से स्नेह करोगे तो वे आपके पास आएंगे।
वात्सल्य - छोटों के प्रति ममता पूर्ण स्नेह भाव।
उदाहरण - माँ के वात्सल्य से बढ़कर कुछ नहीं।
अनुराग - किसी व्यक्ति पर शुद्ध भाव से किया गया मन को केन्द्रित करने का भाव। किसी विषय या व्यक्ति पर शुद्ध-भाव से मन केंद्रित करना।
उदाहरण - ईश्वर से अनुराग करने वाली भवसागर पार हो जाते हैं।
आसक्ति - मोहजनित प्रेंम को 'आसक्ति' कहते हैं।
उदाहरण - माया की आसक्ति ने किसी को नहीं छोड़ा है।

(XIV) पुरस्कार, पारितोषिक एवं पारिश्रमिक
पुरस्कार - किसी अच्छे कार्य या किसी कृति से प्रसन्न होकर दी जाने वाली धनराशि या कोई वस्तु पुरस्कार कहलाती है इसके लिए प्रतियोगितायें होती है किंतु वे गुप्त रूप से होती हैं।
उदाहरण - सौ मीटर की दौड़ जीतने पर गोकुलप्रसाद को पुरुस्कार दिया गया।
पारितोषिक - पारितोषिक के लिए, खुली प्रतियोगिताऐं होती हैं, इनमें प्रत्येक प्रतिभागी को भाग लेना अनिवार्य है। इसमें विजयी प्रतियोगी को पुरस्कार दिया जाता है।
उदाहरण - विद्यालय द्वारा मोहन को खेल में विजय प्राप्त करने पर पारितोषिक दिया गया।
पारिश्रमिक - जो धन परिश्रम के परिणाम स्वरुप दिया जाता है उसे पारिश्रमिक कहते हैं।
उदाहरण - सरकार के द्वारा अतिथि शिक्षकों को बहुत कम पारिश्रमिक दिया जा रहा है।

(XV) पत्नि, स्त्री, महिला एवं नारी
पत्नि - किसी व्यक्ति विशेष की विवाहित स्त्री पत्नी कहलाती है।
उदाहरण - रावण की पत्नी मंदोदरी ने उसे बहुत समझाया।
स्त्री - कोई भी औरत स्त्री कहलाती है।
उदाहरण - स्त्री स्वभाव बड़ा विचित्र होता है।
महिला - किसी भले घर की नारी (विवाहित या अविवाहित) महिला कहलाती है।
उदाहरण - श्रीमती महादेवी वर्मा विदुषी महिला हैं।
नारी - पूरा स्त्री समुदाय नारी कहलाता है।
उदाहरण - नारी का हृदय कोमल होता है।

(XVI) यंत्रणा एवं यातना
यंत्रणा - असाधारण दुःख का अनुभव (मानसिक) यंत्रणा कहलाता है।
उदाहरण - आपातकाल के समय अनेक निरपराध व्यक्तियों को जेल में यंत्रणायें झेलनी पड़ी थी।
यातना - आघात (चोट) में उत्पन्न कष्टों की अनुभूति (शारीरिक) यातना किस श्रेणी में आती है।
उदाहरण - अंग्रेजों द्वारा क्रांतिकारियों को कई तरह से यातनाएँ दी जाती थी।

(XVII) सेवा एवं सुश्रुषा
सेवा - छोटो का बड़ों के प्रति ऐसा कार्य एवं व्यवहार जिससे उन्हें सुख की अनुभूति होती हो।
उदाहरण - बच्चों को माता व पिता की सेवा करना चाहिए।
सुश्रुषा - बीमार स्थिति में इलाज के साथ-साथ अच्छी तरह से देखभाल करना सुश्रुषा कहलाती है।
उदाहरण - अस्पताल में रोगियों की सुश्रूषा परिचारिकाएँ करती हैं।

(XVIII) हवा, वायु, पवन एवं समीर
हवा - हमारे आसपास अवस्थित विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण हवा कहलाता है। जिसका उपयोग कई तरह के कार्यों में भी किया जा सकता है।
उदाहरण - मुझे साइकिल में हवा भरवानी है।
वायु - पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न गैसों का मिश्रण वायु कहलाता है या इसे हम हवा भी कहते हैं।
उदाहरण - आज वायु उत्तर से दक्षिण की ओर चल रही है।
पवन - वायु का कभी तेज़ या मंद गति से बहना पवन हैं।
उदाहरण - पवन के मंद झोके मन को सुहावने लग रहे हैं।
समीर - पवन में जब विशेष सुखद शीतलता आ जाती है उसे समीर कहते हैं। जल से थल की ओर या थलभाग से जलभाग की ओर बहने वाली वायु को समीर कहा जाता है।
उदाहरण - इस समीर की यात्रा लम्बे समय तक चलती है।

(XIX) गोष्ठी एवं सभा
गोष्ठी - किसी विषय वस्तु को लेकर किसी स्थान पर एकत्रित होना और उस पर चिंतन-मनन या गायन होना गोष्ठी कहलाता है।
उदाहरण - राममनोहर के घर आज रात काव्य गोष्ठी का आयोजन है।
सभा - बड़े जनसमूह का आयोजन सभा कहलाता है।
उदाहरण - आज प्रधानमंत्री जी ने जनता जनार्दन की सभा को संबोधित किया।

(XX) साहस एवं वीरता
साहस - किसी कार्य को करने की हिम्मत साहस कहलाता है।
उदाहरण - हमारे सैनिकों में साहस कूट कूट कर भरा है।
वीरता - अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य के साथ दुश्मन के साथ लड़कर विजय प्राप्त करने की कोशिश करना, वीरता की श्रेणी में आता है।
उदाहरण - युद्ध के समय अनेक सैनिक अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं।

(XXI) अनुग्रह, अनुकम्पा, अनुरोध, प्रार्थना, दया एवं कृपा
अनुग्रह - कृपा, किसी छोटे से प्रसन्न होकर उसका कुछ उपकार या भलाई करना।
उदाहरण - मुझ पर मेरे बड़े भाई का अनुग्रह है।
अनुकम्पा - दूसरों के कष्ट को देखकर दूर करने का भाव, छोटा और बड़ों के प्रति भी। किसी के दुःख से दुःखी होकर उस पर की गई दया।
उदाहरण - गुरुदेव की अनुकंपा पर आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
अनुरोध - अनुरोध बराबर वालों से किया जाता है।
उदाहरण - पड़ौसी के अनुरोध पर मुझे जाना पड़ा।
प्रार्थना - ईश्वर या अपने से बड़ों के प्रति इच्छापूर्ति के लिए 'प्रार्थना' की जाती है।
उदाहरण - हमें प्रति दिवस ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए।
दया - किसी असमर्थ और असहाय के प्रति संवेदना का भाव। दूसरे के दुःख को दूर करने की स्वाभाविक चेष्टा।
उदाहरण - वह सभी के लिए दया का पात्र है।
कृपा - दूसरे के कष्ट दूर करने की साधारण चेष्टा। अयाचित, याचित दोनों पर होती है।
उदाहरण - यदि आप मुझे इस फैक्ट्री में नौकरी दे दे तो आपकी बड़ी कृपा होगी।

(XXII) आमन्त्रण, निमन्त्रण एवं आह्वान
आमंत्रण - किसी अवसर पर सम्मिलित होने का कथन।
उदाहरण - सत्यनारायण भगवान की कथा का हमें आमंत्रण मिला है।
निमंत्रण - उत्सव के अवसर पर बुलाना।
उदाहरण - सोहन ने विवाह के अवसरों पर अपने मित्रों को निमंत्रण दिया है।
आह्वान - ईश्वर की आराधना कर उन्हें बुलाना, ललकार, संघर्ष के लिए बुलाना।
उदाहरण - यज्ञ की आहुति देकर ईश्वर का आह्वान किया जाता है।

(XXIII) अशुद्धि, भूल एवं त्रुटि
अशुद्धि - अपवित्रता, मिलावट, लिखने व बोलने में कमी।
उदाहरण - तुम कितना अशुद्ध लिखते हो।
भूल - असावधानीवश प्रकट होती है।
उदाहरण - नमक न डल पाने की भूल से सब्जी बिगड़ गई।
त्रुटि - वस्तु में कोई कमी का होना।
उदाहरण - पटवारी रिकॉर्ड में काफी त्रुटियाँ देखने को मिल रही हैं।

(XXIV) अपयश एवं कलंक
अपयश - स्थायी रूप से दोषी होना।
उदाहरण - रावण के एक दोष के कारण वह अपयस का पात्र बना।
कलंक - कुसंगति के कारण चरित्र पर दोष लगाना।
उदाहरण - चरित्र अच्छा होने पर भी कभी कलंक का टीका लग ही जाता है।

(XXV) अधिक, बहुत, बड़ा एवं काफी
अधिक - आवश्यकता से ज्यादा।
उदाहरण - बाद में गंगा में जल अधिक हो जाता है।
बहुत - परिमाण का बोधक।
उदाहरण - आज उसने बहुत खाया।
बड़ा - आकार का बोधक।
उदाहरण - हमारा मकान बड़ा है।
काफी - आवश्यकता से कुछ ज्यादा।
उदाहरण - गर्मी में भी इस नदी में काफी पानी रहता है।

(XXVI) डर या भय, संशय, संदेह, शंका एवं आशंका
डर या भय - किसी पर आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्कार से जो एक प्रकार का आवेग, पूर्ण मनोविकार को डर या भय कहते हैं। यह भय का समानार्थक है, इसमें मुख्य रुप से भीति का भाव छिपा रहता है।
उदाहरण - इस जंगल से गुजरते वक्त मुझे काफी डर लगा।
संशय - किसी वस्तु का वास्तविक ज्ञान न होना फिर उसमें विषय में जिज्ञासा बने रहना संशय है। वास्तविक ज्ञान के बाद संशय की स्थिति समाप्त हो जाती है।
उदाहरण - वह मेरे घर आ जायें, इस बात का संशय बना हुआ है।
संदेह - किसी वस्तु या कार्य के संदर्भ में निश्चय न कर पाना संदेह है।
उदाहरण - उसकी सत्यता पर तुम्हें संदेह नहीं करना चाहिए।
आशंका - दुःख या आपत्ति का पूर्ण निश्चय रहने या उसकी संभावना मात्र के अनुमान से जो आवेग शून्य भय होता है उसे आशंका कहते है। इसमें केवल तर्क-वितर्क नहीं चिंतायें एवं भय की भावनायें समाहित हो जाती हैं।
उदाहरण - वह कब आ धमके इस बात की आशंका बनी हुई रहती है।
शंका - अमंगलसूचक भय शंका है।
उदाहरण - इतनी गर्जना हो रही है, बिजली गिरने की शंका है।

(XXVII) अंतःकरण एवं आत्मा
अंतःकरण - विशुद्ध मन की विवेकपूर्ण शक्ति।
उदाहरण - ईश्वर मेरे अंतःकरण में बसे हुए हैं।
आत्मा - जीवों में चेतन, अतींद्रिय और अभौतिक तत्त्व, जिसका कभी नाश नहीं होता।
उदाहरण - आत्मा अजर अमर है।

(XXVIII) अध्यक्ष एवं सभापति
अध्यक्ष - किसी गोष्ठी, समिति, परिषद या संस्था के स्थायी प्रधान को अध्यक्ष कहते हैं। किसी समिति का प्रमुख अध्यक्ष होता है। किसी सभा या समिति के अध्यक्ष या तो मनोनीत होते हैं या निर्वाचित।
उदाहरण - कांग्रेस कमेटी में अध्यक्ष पद का निर्वाचन हो रहा है।
सभापति - किसी आयोजित बड़ी अस्थायी सभा के प्रधान को 'सभापति' कहते है।
उदाहरण - सबसे पहले इस सभा के सभापति का मनोनयन करना होगा।
टीप - दोनों पद नियतकालिक है। किसी विशेष समारोह में स्थायी सभापति तथा अध्यक्ष को छोड़कर अन्य सदस्यों का भी समिति की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया किया जा सकता है।

(XXIX) सभा, समिति एवं परिषद
सभा - किसी विशेष प्रयोजन से कुछ लोगों या सदस्यों द्वारा, विधिवत, गठित संस्था का नाम सभा।
उदाहरण - सदस्य लोग अपनी बात सभा में बारी-बारी से रखें तो ज्यादा बेहतर होगा।
समिति - विशेष कार्य के लिए कई समितियों या उपसमितियों का गठन किया जाता है, यह सभा का छोटा रूप है यथा बाढ़, सुरक्षा, समिति नागरी प्रचारिणी सभा है।
उदाहरण - ग्राम पंचायत में विकास हेतु कई तरह की समितियाँ कार्य करती हैं।
परिषद - जिस समिति में प्रतिनिधि या पार्षद पहुँचते है उसे परिषद कहते है। नगर पालिका परिषद, हिन्दी साहित्य परिषद। परिषद किसी संस्था के नीति नियमों के आधार पर होती है।
उदाहरण - नगर निगम परिषद के चुनाव बहुत नजदीक हैं।

(XXX) अभिनन्दन एवं स्वागत
अभिनन्दन - किसी श्रेष्ठ का मान या स्वागत।
उदाहरण - माननीय मुख्यमंत्री जी का अभिनंदन है।
स्वागत - अपनी सभ्यता और प्रथा के वश किसी को सम्मान देना।
उदाहरण - पधारिए यहाँ आपका स्वागत है।

(XXXI) आज्ञा एवं आदेश
आज्ञा - आदरणीय या पूज्य व्यक्ति द्वारा दिया गया कार्य निर्देश। बड़ों की ओर से मिलने वाला आदेश आज्ञा कहलाती है।
उदाहरण - पिताजी की आज्ञा है कि मैं धूप में बाहर न जाऊँ।
आदेश - किसी अधिकारी व्यक्ति द्वारा दिया गया कार्य निर्देश। शासकीय होता है, यह विकल्प रहित हुकुम है।
उदाहरण - (1) जिलाधीश का आदेश है कि नगर में सर्वत्र शान्ति बनी रहे।
(2) शासन के आदेश से स्थानांतरण हो गया।

(XXXII) आदरणीय, पूजनीय, महाशय एवं महोदय
आदरणीय - अपने से बड़ों या महान व्यक्तियों के प्रति सम्मानसूचक शब्द।
उदाहरण - आदरणीय भाई साहब की कृपा से यह कार्य संभव हो पाया है।
पूजनीय - पिता, गुरु या महापुरुषों के प्रति सम्मानसूचक शब्द।
उदाहरण - मेरी पूजनीय माता जी कुछ दिनों के लिए मामा जी के घर गई हैं।
महाशय - सामान्य लोगों के लिए 'महाशय' का प्रयोग होता है।
उदाहरण - महाशय आप जो कह रहे हैं वह एकदम ठीक है।
महोदय - अपने से बड़ों को या अधिकारियों को 'महोदय' लिखा जाता है।
उदाहरण - अध्यक्ष महोदय ने माल्यार्पण किया।

(XXXIII) इच्छा एवं अभिलाषा
इच्छा - किसी भी वस्तु की साधारण चाह को इतना कहते हैं।
उदाहरण - मेरी जलेबी खाने की इच्छा है।
अभिलाषा - किसी विशेष वस्तु की हार्दिक चाह अभिलाषा कहलाती है।
उदाहरण - मेरे मन में खूब पढ़ाई करने की अभिलाषा है।

(XXXIV) उत्साह एवं साहस
उत्साह - काम करने की बढ़ती हुई रुचि।
उदाहरण - विवाह में बहनों को गजब का उत्साह है।
साहस - भय पर विजय प्राप्त करना।
उदाहरण - उसमें एक साथ कई लोगों से लड़ने का साहस है।

(XXXV) सम्मेलन एवं अधिवेशन
सम्मेलन - सामान्य रूप से समितियों द्वारा सम्मेलन आयोजित किया जाता है।
उदाहरण - यहाँ आज किसान सम्मेलन है।
अधिवेशन - सभाओं द्वारा अधिवेशन तथा महासभाओं का आयोजन होता है। कांग्रेस का अधिवेशन होता है, साहित्य समिति का वार्षिक सम्मेलन होता है।
उदाहरण - यहाँ कर्मचारी संघों का अधिवेशन है।

(XXXVI) प्रगति एवं उन्नति
प्रगति - पिछड़ेपन की स्थिति से आगे बढ़ना प्रगति है।
उदाहरण - उसने सूखी नदी में नाव चलाकर काफी प्रगति की है।
उन्नति - वर्तमान स्थिति से ऊपर उठना उन्नति है।
उदाहरण - कुछ ही दिन हुए उसने बहुत उन्नति कर ली।

(XXXVII) कंगाल एवं दीन
कंगाल - जिसे पेट पालने के लिए भीख माँगनी पड़े।
उदाहरण - उस कंगाल के पास कुछ नहीं बचा है।
दीन - निर्धनता के कारण जो दयापात्र हो चुका है।
उदाहरण - हमें दीनों की मदद करना चाहिए।

(XXXVIII) स्वाधीनता, स्वतन्त्रता या आजादी
स्वाधीनता - स्वयं के अधीन रहना। स्वाधीनता देश या राष्ट्र के लिए प्रयुक्त होती है।
उदाहरण - 1. स्वाधीनता संघर्ष हेतु देश के कई वीरो ने अपने प्राण न्यौछावर किए हैं।
2. भारत को स्वाधीनता मिली।
स्वतन्त्रता या आजादी - स्वतंत्रता का प्रयोग व्यक्तियों के लिए होता है। बन्धन मुक्ति।
उदाहरण - 1. हमारे देश की जनता को 15 अगस्त 1947 को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई।
2. भारतीयों को स्वतन्त्रता मिली है।

(XXXIX) पुस्तक एवं ग्रंथ
पुस्तक - साधारणतः सभी प्रकार की छपी किताब को 'पुस्तक' कहते हैं। किसी विषय पर सामान्य रुप से लिखित विचारों का संग्रह।
उदाहरण - हिन्दी साहित्य की पुस्तक बुकडिपो में नहीं मिली।
ग्रंथ - ग्रंथ की विषय-वस्तु गंभीरता लिए होती है उसका आकार भी पुस्तक की तुलना में बड़ा होता है। इससे पुस्तक के आकार की गुरुता और विषय के गांभीर्य का बोध होता है।
उदाहरण - रामायण महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित ग्रंथ है।

(XL) दक्ष, निपुण, कुशल, कर्मठ एवं पटु
दक्ष - इसमें अनवरत अभ्यास एवं अनुभव के फलस्वरुप हर कार्य को करने का सामर्थ्य। जो हाथ से किए जाने वाले काम अच्छी तरह और जल्दी करता है।
उदाहरण - वह कपड़ा सीलने में दक्ष है।
निपुण – दक्षतापूर्ण किया जाने वाला कार्य। जो अपने कार्य या विषय का पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त कर उसका अच्छा जानकार बन चुका है।
उदाहरण - वे अपने विषय में निपुण हैं।
कुशल - किसी कार्य में अपनी क्षमता का विशेषता पूर्ण प्रयोग। जो हर काम में मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों का अच्छा प्रयोग करना जानता है।
उदाहरण - मोहनलाल कृषि कार्य में कुशल है।
कर्मठ - जिस काम पर लगाया जाए उसी पर लगा रहने वाला।
उदाहरण - कर्मठ कार्यकर्ताओं के कारण ही पार्टियाँ उभरकर सामने आती हैं।
पटु - व्यावहारिक दृष्टि से किसी भी क्षेत्र में अन्य व्यक्तियों से आगे बढ़ने का गुण।
उदाहरण - वह बहुत वाक् पटु है, जिससे संवाद करना थोड़ा कठिन होता है।

(XLI) निबंध एवं लेख
निबंध - ऐसी गद्यरचना, जिसमें विषय गौण हो और लेखक का व्यक्तित्व उसकी शैली प्रधान हो।
उदाहरण - हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखित निबंध उत्कृष्ट कोटि के हैं।
लेख - ऐसी गद्य रचना, जिसमें वस्तु या विषय की प्रधानता हो।
उदाहरण - इस लेख में हिन्दुओं की सहिष्णुता के दर्शन होते हैं।

(XLII) मन, चित्त, बुद्धि, ज्ञान, प्रज्ञा एवं ज्ञान
मन - संकल्प विकल्पात्मक व्यापार करने की मनस शक्ति मन है।
चित्त - चित्त में बातों का स्मरण- विस्मरण होता है।
उदाहरण - अब मेरा चित्त यहाँ नहीं लगता।
उदाहरण - मेरा मन जाने को नहीं कर रहा किन्तु जाना हो सकता है।
बुद्धि - निश्चयात्मक शक्ति का नाम बुद्धि। कर्तव्य का निश्चय करती है।
उदाहरण - उसने अपनी बुद्धि के बल पर बड़ा मुकाम हासिल किया है।
ज्ञान - इंद्रियों द्वारा प्राप्त हर अनुभव।
उदाहरण - उसने प्राप्त ज्ञान के आधार पर उच्च पद को प्राप्त किया है।
प्रज्ञा - बुद्धि का विकसित तथा उन्नत रूप प्रज्ञा है। इसका सम्बंध आत्मिक ज्ञान से होता है, बुद्धि भौतिक ज्ञान से संबंधित है।
उदाहरण - जिसकी प्रज्ञा जागृत हो वह त्रिकालदर्शी बन सकता है।

(XLIII) निकट एवं पास
निकट - किसी वस्तु या स्थान का अन्य वस्तु या स्थान से समीप्य का बोध कराता है।
उदाहरण - हमारे गाँव के निकट एक विद्यालय है।
पास - पास शब्द अधिकार के समीप्य का बोध कराता है
उदाहरण - ऋषि मुनियों के पास विद्या धन होता है।

(XLIV) प्रणाम एवं नमस्ते या नमस्कार
प्रणाम - प्रणाम शब्द का प्रयोग वरिष्ठ एवं वन्दनीय व्यक्तियों के लिए किया जाता है। यह बड़ों के लिए आदरसूचक है।
उदाहरण - हमें अपने गुरु को प्रणाम करना चाहिए।
नमस्कार या नमस्ते - सामान्यतः नमस्कार यह नमस्ते शब्द का प्रयोग बराबर वालों से मिलने जुलने पर होता है।
उदाहरण - भाई नमस्ते! कहाँ थे आज तक।

(XLV) अर्चना एवं पूजा
अर्चना - धूप, दीप, फूल इत्यादि से देवता की वन्दना (प्रार्थना) करना।
उदाहरण - पंडित जी 1 घंटे से देवी की अर्चना कर रहे हैं।
पूजा - बिना किसी सामग्री के भी भक्तिपूर्ण विनय अथवा प्रार्थना करना।
उदाहरण - चलते-चलते इस मंदिर में पूजा कर लेते हैं।

(XLVI) पुत्र एवं बालक
पुत्र - अपना बेटा।
उदाहरण - माता-पिता की सुकर्मों से पुत्र संस्कार सीखता है।
बालक - कोई भी लड़का।
उदाहरण - यह बालक बहुत होनहार है।

(XLVII) आँधी, झंझा, वात्याचक्र, तूफान, चक्रवात
आँधी - मिट्टी, धूल घास-फूस आदि को तेजी से उड़ाने वाली हवा को आँधी कहा जाता है।
उदाहरण - आज की आँधी में कई पर धराशायी हो गये।
झंझा - आँधी के साथ यदि पानी बरसने लगे, तो उसे झंझा कहते हैं।
उदाहरण - इस खतरनाक झंझा में बाहर निकलना ठीक नहीं।
वात्याचक्र - आँधी और झंझा का उग्र रुप तूफान है। तूफान से घर मकान सब धराशायी हो जाते हैं। समुद्री तूफान में लहरों की विनाशलीला से बड़ी-बड़ी नावें तथा जहाज डूब जाते हैं।
उदाहरण - वात्याचक्र में बड़े से बड़े जहाज डूब सकते हैं।
चक्रवात या बवंडर - गोलाकार चक्कर लगाती हुई तेज आंधी और तूफान को चक्रवात या बवंडर कहते हैं।
उदाहरण - बरमूडा ट्रायंगल में अक्सर चक्रवात चलते रहते हैं।

(XLVIII) ऋषि,मुनि एवं साधक
ऋषि - ब्रह्म ज्ञान जानने वाला ऋषि होता है।
उदाहरण - ऋषि बाल्मीकि ने रामायण महाग्रंथ की रचना की।
मुनि - जो मौन रहकर धर्म, आदि पर चिंतन करता है।
उदाहरण - जैन मुनि तरुण सागर महाराज प्रत्येक समाज के लिए पूजनीय थे।
साधक - जो किसी विशेष कार्य को संपादन करने में अपनी पूरी क्षमता के साथ लीन रहता है, उसे साधक कहते है।
उदाहरण - आज भी हिमालय पर्वत में कई साधक साधना में लीन है।

(XLIX) असुर एवं राक्षस
असुर - एक जाति विशेष जो देवों के समकक्ष थी।
उदाहरण - शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे।
राक्षस - अनुचित आचरण के कारण मनुष्य जाति में आता है।
उदाहरण - महाबली भीम ने हिडिंब नाम के राक्षस को मारा।

(L) सम्मति एवं अनुमति
सम्मति - सब प्रकार से तर्क-संगत सुझाव या परामर्श सम्मति है।
उदाहरण - बैठक में सम्मती होने पर ही प्रस्ताव पास होते हैं।
अनुमति - किसी कार्य को करने की अनुमति दी जाती है। अनुमति में सम्मति भाव छिपा रहता है, अनुमति बड़ों से ली जाती है।
उदाहरण - प्राचार्य की अनुमति से ही मैं अपने घर जा रहा हूँ।

(LI) वस्तु, पदार्थ एवं द्रव्य
वस्तु - जिसका एक निश्चित रंग, रूप, आकार होता है उसे वस्तु कहते हैं। यह मनुष्य निर्मित होती है, यथा, कागज, कपड़ा, किताब वस्तु हैं।
उदाहरण - ज्ञान के अभाव में वस्तुओं का कोई मोल नहीं।
पदार्थ - प्राकृतिक रुप से निर्मित होते है।
उदाहरण - सोना प्राकृतिक रूप से मिलने वाला पदार्थ है।
द्रव्य - इसमें उपयोगिता और क्रियाशीलता का गुण प्रमुख होता है।
उदाहरण - तुम्हारे द्वारा दिए गए द्रव्य की उतनी अधिक कीमत नहीं है।

(LII) संस्कृति एवं सभ्यता
संस्कृति - मनुष्य ने ज्ञान, कर्म एवं विचार के क्षेत्र में जो कुछ रचा है, वह संस्कृति है संस्कृति का संबंध हृदय व आत्मा से है।
उदाहरण - हिन्दू संस्कृति विश्व की श्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है।
सभ्यता - भौतिक सुख सुविधाओं पर आधारित होती है।
उदाहरण - पाश्चात्य सभ्यता का अनुकरण करना भारत वासियों के लिए उचित नहीं है।

(LIII) विश्वास एवं भरोसा
विश्वास - सामने हुई बात पर भरोसा करना, बिलकुल ठीक मानना।
उदाहरण - मुझे उस पर पूरा विश्वास है।
भरोसा - किसी की बताई गई बातों पर यकीन।
उदाहरण - मैंने आप पर भरोसा किया है।

(LIV) माप एवं नाप
माप - द्रव्य पदार्थों को मापक बर्तनों से मापा जाता है।
उदाहरण - दूध को अपने सामने लीटर से माप कर ही लेना चाहिए।
नाप - मीटर, गज, फुट, इंच आदि वस्तुओं को नापा जाता है।
उदाहरण - इस प्लाट की नाप क्या है।

(LV) भ्रम, धोखा, भ्रांति, दुविधा एवं विभ्रम
भ्रम - वास्तविकता का बोध न हो सकना भ्रम है। दूर से झलक देखकर यह सोचना कि वह राम या श्याम है भ्रम की स्थिति है।
उदाहरण - उसे भ्रम है कि यह कार्य मैंने ही किया है।
धोखा - वास्तविकता को छिपाकर दूसरे ही रुप में किसी वस्तु को प्रदर्शित करना धोखा है, अच्छी सब्जी के बदले में सड़ी-सब्जी दे देना धोखा है।
(भ्रम अनजाने होता है, धोखा जान बूझकर किया जाता है।)
उदाहरण - अच्छे मित्र कभी भी धोखा नहीं देते।
भ्रांति - सोच विचार में डालने वाले भ्रम को भ्रांति कहते हैं।
उदाहरण - इस बात की भ्रांति है कि किस विद्यालय में प्रवेश लिया जाए।
दुविधा - मन में निश्चय न कर पाने की स्थिति।
उदाहरण - वह इस दुविधा में पड़ा है कि किसे बुलाऊँ किसे न बुलाऊँ।
विभ्रम - मानसिक दुर्बलता या भावना के कारण होता है।
उदाहरण - कभी-कभी उसे विभ्रम हो जाता है।

(LVI) साधारण एवं सामान्य
साधारण - जो वस्तु या व्यक्ति एक ही आधार पर आश्रित हो और जिसमें कोई विशिष्ट गुण या चमत्कार न हो।
उदाहरण - मिट्टी से बने घर साधारण ही होते हैं।
सामान्य - जो बात दो अथवा कई वस्तुओं तथा व्यक्तियों आदि में समान रूप से पाई जाती हो, उसे 'सामान्य' कहते हैं।
उदाहरण - परिवारों में विघटन आजकल सामान्य बात हो गई है।

(LVII) संवाद, परिसंवाद, चर्चा, परिचर्चा एवं वार्ता
संवाद - दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य होने वाले वार्तालाप को संवाद कहते हैं।
उदाहरण - मेरा उनसे संवाद नहीं हो सका।
परिसंवाद - जब यह संवाद किसी विषय पर केन्द्रित होता है, इसे परिसंवाद कहते है, इन्हें दूसरे शब्दों में चर्चा और परिचर्चा कहते है।
उदाहरण - हमारे विद्यालय में वृक्षारोपण एवं प्रदूषण पर परिसंवाद था।
चर्चा - किसी विषय पर सामान्य बातचीत चर्चा कहलाती है।
उदाहरण - विद्यालय में स्वाधीनता पर्व कैसे मनाया जाना है इस पर चर्चा की गई।
परिचर्चा - अधिक अंतरंग और व्यक्तिगत क्रियाओं पर आधारित होती है।
उदाहरण - विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन कैसे हो इस पर परिचर्चा थी।
वार्ता - दो-चार दस-बीस लोगों के मध्य अपने विचार प्रकट करना वार्ता है। इसमें भाषण की औपचारिकता नहीं होती। वार्ता में धारावाहिकता रहती है।
उदाहरण - राजनैतिक स्थिरता पर वार्ता बहुत ही उत्कृष्ट कोटि की थी।

(LVIII) सखा, सुहृद्, सहानुभूति, मित्र एवं बंधु
सखा - जो आपस में एकप्राण, एकमन, किन्तु दो शरीर है।
उदाहरण - भगवान कृष्ण अपने सखा सुदामा के लिए नंगे पांव दौड़े चले आए थे।
सुहृद् - अच्छा हृदय रखनेवाला।
उदाहरण - हमारे प्राचार्य सुहृद् व्यक्ति हैं।
सहानुभूति - दूसरे के दुःख को अपना दुःख समझना।
उदाहरण - पूरे गाँव की सहानुभूति उस व्यक्ति के साथ है।
मित्र - वह पराया व्यक्ति जिसके साथ आत्मीयता हो।
उदाहरण - अच्छे मित्र की पहचान बुरे समय में होती है।
बंधु - आत्मीय मित्र संबंधी।
उदाहरण - वही व्यक्ति खुशहाल है जो अपने बंधुओं के साथ जी रहा है।

(LIX) सम्राट एवं राजा
सम्राट - राजाओं का राजा।
उदाहरण - सम्राट अशोक ने कई बार अपनी विजय पताका फहराई।
राजा - एक साधारण राजा (भूपति)।
उदाहरण - इस देश में राजा जयचंद जैसे भी दुष्ट हुए हैं।

(LX) अमूल्य या अनमोल एवं बहुमूल्य
अमूल्य या अनमोल - जिसका कोई मूल्य ही न हो अर्थात जो वस्तु मूल्य देने पर भी न मिल सके।
उदाहरण - विद्याधन अमूल्य है।
बहुमूल्य - बहुत कीमती वस्तु, पर जिसका मूल्य निर्धारण किया जा सके अर्थात जिसे बहुत सा मूल्य देकर खरीदा जा सकता है।
उदाहरण - सोना एक बहुमूल्य धातु है।

(LXI) कार्य एवं कर्तव्य
कार्य - सामान्य काम-काज को कार्य कहा जाता है।
उदाहरण - किसान खेतों में बहुत कार्य करते हैं।
कर्तव्य - जब कोई राष्ट्रीय, धार्मिक, सामाजिक, आदि दायित्त्वों से युक्त हो जाता है, तो उसे कर्त्तव्य कहा जाता है।
उदाहरण - गुरु की शिक्षा शिष्य को कर्तव्य मार्ग पर ले जाती है।

(LXII) भेंट एवं उपहार
भेंट - आदरपूर्वक या प्रेंम पूर्वक किसी को कोई वस्तु भेंट देना।
उदाहरण - हमारी ओर से यह भेंट स्वीकार करें।
उपहार - जब भेंट जब बराबर वालों को दी जाती है तो उसे उपहार कहते है।
उदाहरण - मित्रों से न जाने मुझे कितने उपहार मिले हैं।

(LXIII) भाषण, अभिभाषण, प्रवचन, प्रवचन एवं व्याख्यान
भाषण - सामान्य रूप से अपने विचारों को जनता या छात्रों के सामने प्रकट करना भाषण है।
उदाहरण - नेता जी के भाषण बहुत अच्छे थे।
अभिभाषण - किसी विशेष अवसर पर दिया जाने वाला भाषण अभिभाषण कहलाता है। यथा दीक्षांत अभिभाषण।
उदाहरण - कुलपति जी के अभिभाषण के साथ ही कार्यक्रम प्रारंभ हुये।
प्रवचन - धार्मिक विषयों पर दिया जाने वाला भाषण प्रवचन कहलाता है।
उदाहरण - तरुण सागर महाराज के कड़वे प्रवचन जीवन की प्रेरणा देते हैं।
व्याख्यान - किसी विषय का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है। उसे व्याख्यान कहते है, कक्षाओं में व्याख्यान होते है।
उदाहरण - हमारे प्राचार्य जब भी व्याख्यान देते हैं, सारे विद्यार्थी उस प्रकरण को समझ जाते हैं।

(LXIX) त्याग एवं बलिदान
त्याग - दूसरों के हित के लिए किसी वस्तु को छोड़ देना।
उदाहरण - गाँधी जी ने देश की स्वाधीनता के लिए कई त्याग किए।
बलिदान - इसमें सुखों के अलावा, प्राणों को न्यौछावर करने का भाव भी होता है।
उदाहरण - क्रांतिकारियों के बलिदान के बल पर ही देश को आजादी प्राप्त हुई है।

(LXX) दान एवं अनुदान
दान - स्वार्थ भावना से उठकर दूसरों के सहायतार्थ वस्तु या पैसे का दान।
उदाहरण - मंदिर निर्माण में लाखों रुपए का दान प्राप्त हुआ है।
अनुदान - शासन या संस्था द्वारा सहायता के रूप में प्रदत्त धनराशि।
उदाहरण - किसानों को खेत में नलकूप खनन के लिए अनुदान प्राप्त होता है।

(LXXI) आधि, व्याधि एवं उपाधि
आधि - मानसिक पीड़ा।
उदाहरण - इस घटना से वे ऐसी आधि का शिकार हो गए हैं जिससे उबरना बहुत आवश्यक है।
व्याधि - शारीरिक पीड़ा।
उदाहरण - योग एवं व्यायाम के बगैर शरीर में कई तरह की व्याधियाँ हो सकती हैं।
उपाधि - दैवीय कष्ट या आपदा।
उदाहरण - अकाल की यह उपाधि बहुत कष्ट देने वाली है।

(LXXII) प्रसन्नता, हर्ष, आनंद एवं आल्हाद
प्रसन्नता - मन के प्रफुल्लित की स्थिति का नाम प्रसन्नता है, जो बाह्य चेष्टाओं द्वारा अभिव्यक्त होती है।
उदाहरण - बच्चे की किलकारियाँ सुनकर मन प्रसन्न हो गया।
हर्ष - आंतरिक प्रसन्नता है।
उदाहरण - बेटे के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर माँ को बहुत हर्ष हो रहा है।
आनन्द - आत्मा की उत्फुल्ल स्थिति का नाम आनन्द है। (प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास, आमोद, मोद का संबंध मन से है।)
उदाहरण - गुरु के प्रवचनों को सुनकर मन आनंदित है।
आल्हाद - आत्मा का स्थायी तथा गंभीर भाव आल्हाद है।
उदाहरण - ज्ञानी पुरुष ईश्वर की भक्ति से आल्हादित होते हैं।

(LXXIII) अनुरुप एवं अनुकूल
अनुरुप - अनुरुप में पद योग्यता, शिक्षा आदि का भाव निहित रहता है, शिक्षा के अनुरुप पद की प्राप्ति।
उदाहरण - शैक्षिक योग्यता के अनुरूप ही प्रमोशन होगा।
अनुकूल - अनुकूल में उपादेयता, उपयोगिता का भाव निहित रहता है।
उदाहरण - जब मौसम अनुकूल हो तभी सब्जियाँ फलती फूलती हैं।

(LXXIX) अन्तर्गत एवं निहित
अन्तर्गत - किसी का अंग बन गया हो, वह अंतर्गत है।
उदाहरण - नागरिक शास्त्र सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत ही आता है।
निहित - जो किसी वस्तु के अन्तर्गत होते हुए भी दिखाई न दे।
उदाहरण - जीएसटी में कई तरह के कर निहित हैं।

(LXXX) चुनाव एवं अनुसंधान
चुनाव - विशेषता, उपयोगिता, पसंद, आदि के आधार पर किसी वस्तु या व्यक्ति का चुनाव चयन है। मतदान के द्वारा किसी व्यक्ति का बहुमत के आधार पर चुना जाना निर्वाचन है।
उदाहरण - आम चुनाव से ही लोकतन्त्र का स्तंभ खड़ा है।
अनुसंधान - अविष्कार, शोध व गवेषणा- किसी वस्तु की गुप्त तथा सूक्ष्म बातों का व्यवस्थित ढंग से अध्ययन करना अनुसंधान कहलाता है। इसे शोध व गवेषणा भी कहते हैं। अविष्कार में किसी वस्तु का नये ढंग से निर्माण किया जाता है।
उदाहरण - इसरो के द्वारा किए गए अनुसंधान आज पूरे विश्व में सराहे जा रहे हैं।

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. शब्द तथा पद क्या है? इसकी परिभाषा, विशेषताएँ एवं महत्त्व।
2. शब्द के प्रकार (शब्दों का वर्गीकरण)
3. तत्सम का शाब्दिक अर्थ एवं इसका इतिहास।
4. तद्भव शब्द - अर्थ, अवधारणा एवं उदाहरण
5. विदेशी/विदेशज (आगत) शब्द एवं उनके उदाहरण
6. अर्द्धतत्सम एवं देशज शब्द किसे कहते हैं?
7. द्विज (संकर शब्द) किसे कहते हैं? उदाहरण
8. ध्वन्यात्मक या अनुकरण वाचक शब्द किन्हें कहते हैं?
9. रचना के आधार पर शब्दों के प्रकार- रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
10. पारिभाषिक, अर्द्धपारिभाषिक, सामान्य शब्द।
11. वाचक, लाक्षणिक एवं व्यंजक शब्द

I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

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