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समोच्चारित (समान उच्चारण वाले) / श्रुतिसम भिन्नार्थक या समरूप भिन्नार्थक शब्द एवं शब्दसूची || Samocharit Shrutisam Bhinnarthak Shabd

  • BY:
     RF Temre
  • Posted on:
    January 01, 1970

समोच्चारित (समान उच्चारण वाले) भिन्नार्थक या समरूप भिन्नार्थक शब्द उन शब्दों को कहते हैं, जिनका उच्चारण सामान्यतः सुनने में एक समान प्रतीत होता है किन्तु उनके अर्थ में प्रायः भिन्नता पाई जाती है।
व्याकरण के कुछ विद्वान् शब्द-युग्म को 'श्रुतिसम' या 'समोच्चारित शब्द' भी कहते हैं। ऐसे शब्दों के उच्चारण और वर्तनी में थोड़ा-सा अन्तर होता है किन्तु ऐसे शब्दों के अर्थ में कोई समानता नहीं होती। समानता तो शुद्ध उच्चारण और वर्तनी में भी नहीं होती, केवल बोलने के दोष और अपनी समझ की कमी के कारण ही वे एक समान प्रतीत होते हैं। सुनने में समान लगने के कारण ही इन्हें 'श्रुतिसम' नाम दिया गया है और बोलने में नाम मात्र का अन्तर होने के कारण ही इन्हें 'समोच्चारित शब्द' या 'समानदर्शी' समानोच्चारित शब्द कहा जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शब्द-युग्म में ऐसे दो शब्द होते हैं जो बोलने, सुनने और पढ़ने और लिखने में भी अधिक भिन्न नहीं लगते किन्तु जिनके अर्थ सर्वथा भिन्न होते हैं।

हिन्दी में ऐसे अनेक शब्द प्रयुक्त होते हैं, जिनका उच्चारण मात्रा या वर्ण के हल्के हेरफेर से हो जाता है किंतु अर्थ में भिन्नता होती है। श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका प्रयोग गद्य की अपेक्षा पद्य में अधिक होता है। इन्हें 'युग्म शब्द' या 'समोच्चरितप्राय भिन्नार्थक शब्द' कहते हैं।

शब्द - सूची

वर्तनी की ठीक समझ के लिए ऐसे शब्दों की सूचियाँ बहुत उपयोगी होती हैं। लगभग समान ध्वनिवाले ऐसे शब्दों में स्वर का अन्तर होता है तो कहीं व्यंजन में। आइए शब्द सूची का अध्ययन करें।

परीक्षा = जाँच
परिक्षा = कीच
द्रव्य = धन
द्रव = तरल पदार्थ
कलि = कलयुग
कली = कली (पुष्प का प्रारंभिक रूप)
नियत = निधारित
नीयत = मंशा
आदि = प्रारंभ, एक से अधिक
आदी = आदत
तड़ाकू = शीघ्रता से
तड़ागृ = पुष्कर
ग्रह = नक्षत्र
गृह = निवास
चिर = प्राचीन
चीर = वस्त्र, चीरना
कुच = स्तन
कूच = आगे बढ़ना
कुल = वंश
कूल = किनारा
स्वजन = प्रिय
श्वजन = कुत्ता
अनिल = हवा
अनल = अग्रि
वसन = वस्त्र
व्यसन = आदत
किला = दुर्ग
कीला = लोहे का टुकड़ा/कील
दिया = देना
दीया = दीपक
दिन = वार
दीन = गरीब
शान = गर्व
शाण = पत्थर
हल् = मूलस्वर
हल = कृषि यंत्र (नागर)
संघ = समूह
संग = साथ
सती = पतिव्रता
शती = शताब्दि
शव = लाश
शब = रात
बहु = बहुत
बहू = पुत्रवधु
वरद = वर देने वाला
बरद = बैल
सप्त = सात
शप्त = शापित
विपिन = जंगल
विपन्न = दुःखी
सुत = पुत्र
सूत = ऋषि का नाम
वासना = कामना
बासना = सुवास
राज = साम्राज्य
राज = रहस्य
मणि = रत्न
मणी = सूर्य, चन्द्र
वहन = उठाना
बहन = बहिन
प्रवाह = गति
परवाह = चिन्ता
वाई = प्रत्यय
बाई = वाम
बन्दी = कैदी
वन्दी = चारण
प्रसाद = भाग
प्रासाद = राजमहल
पास = समीप
पाश = बन्धन
नीर = जल
नीड़ = घोंसला
निश्चल = अचल
निश्छल = बिना छल कपट के
दारु = शराब
दारू = वृक्ष
दूत = सेवक
धूत = कुँआ
टुक = थोड़ा
टूक = टुकड़ा
क्षत्र = क्षत्रिय
छत्र = मुकुट
तरणि = नाव
तरणी = तरुणी
तर्क = सबूत
तृक्र = मट्ठा
तरि = नैया, नाव तेरा
तरी = गीलापन
तव = तैरा
तब = इसके बाद
तप्त = तपा हुआ
तृप्त = संतोष
ज़रा = बुढ़ापा
जरा = थोड़ा कम
जाया = पत्नि
ज़ाया = बर्बाद, नष्ट
तोष = सन्तोष
तोश = हिंसा
आहुत = आया हुआ
आहुती = अर्पण
आसन = स्थान
आसन्न = करीब होने वाला
आभरण = गहना
आमरण = मरने तक
उपल = ओल
उप्पल = कमल
मद = डूबा हुआ
मद्य = शराब
मरीचि= किरण
मरीची = सूर्य, मरिच, मिर्ची
मल्ल = पहलवान
मल = गन्दगी
वार = दिन, चोट
बार = बारिक, बारी
सुर = आवाज
सूर = सूरदास, सूर्य
सर = सिर
सीर = अलग
सन् = साल
सन = रोये निकलने वाला पौधा (पटसन)
अंब = माता
अंबु = जल
अंश = हिस्सा
अंस = कंधा
अँगना = आँगन
अंगना = स्त्री
अनिल = हवा
अनल = आग
अन्न = अनाज
अन्य = दूसरा
अमित = अत्यधिक
अमीत = शत्रु
अलि = भौंरा
अली = सखी
कलि = कलियुग
कली = अधखिला फूल
कांत = पति, सुंदर
कांति = चमक
किला = गढ़
कीला = खूँटा
कूट = पहाड़ की चोटी, छल
कुट = घर, गढ़
कुल = वंश, सब
कूल = नदी का किनारा
कृत = किया हुआ
क्रीत = खरीदा हुआ
कृति = रचना
कृती = रचनाकार
अवधी = अवध देश की भाषा
अवधि = समय
आकार = रूप
अकार = खान
आदि = प्रारंभ
आदी = अभ्यस्त
औषधि = दवा
औषध = जड़ी-बूटी
इतर = दूसरा
इत्र = सुगंध
ऋत = सत्य
ऋतु = मौसम
एका = एकता
एक्का = टमटम
कवल = पहले
केवल = मात्र
कपि = बंदर
कपी = घिरनी
चिर = पुराना
चीर = वस्त्र
जगत = कुएँ का मुँडेरा
जगत् = संसार
जब = जिस समय
जव = जौ
जवान = युवक
जबान = जीभ
जुआ = एक खेल
जूआ = जुआठा
जोड़ = योग
जोर = बल
टूक = टुकड़ा
टुक = थोड़ा
तृप्त = संतुष्ट
तप्त = गरम
तव = तुम्हारा
तब = फिर
कोस = दो मील
कोश = खजाना, शब्दकोश
क्षत्र = क्षत्रिय
क्षात्र = क्षत्रिय-संबंधी
छत्र = छाता
छात्र = विद्यार्थी
क्रम = सिलसिला
कम = काम, क्रिया
गुड़ = एक मीठा पदार्थ
गूढ़ = गुप्त, कठिन
गुरु = बड़ा, शिक्षक
गुर = तरीका
गृह = घर
ग्रह = नक्षत्र
चार = एक संख्या
चारु = सुंदर
चिता = जिस पर लाश जलायी जाती है
चीता = एक जानवर
द्वीप = टापू
दीप = दीपक
दूत = चर
द्यूत = जुआ
दिया = देना (क्रिया)
दीया = दीपक
देव = देवता
दैव = भाग्य
नम्र = झुका हुआ
नर्म = मुलायम
धूम = धुआँ
नाड़ी = नस
नारी = एक जाति औरत
नाईं = समान, सा, तरह
नाई = एक जाति
नियत = निश्चित
नीयत = भाग्य
धूम्र = धुआँता हुआ
निशा = रात
नशा = बुरी लत
जूड़ा = बाँधा हुआ केश
जुड़ा = जुटा हुआ
तुरंग = घोड़ा
तरंग = लहर
तरणी = भाग्य
तरणि = नाव
दाई = सेविका
दाईं = दाहिनी (तरफ)
दारू = शराब
दारु = पेड़
दीन = गरीब, दरिद्र
दिन = दिवस
दिवा = दिन
दीवा = दीया
द्विप = हाथी
द्वीप = टापू
पाणि = हाथ
पानी = जल
परिक्षा = कीचड़
परीक्षा = इम्तहान
पुरी = नगरी
पूरी = पूरा / पूड़ी
पास = निकट
पाश = बंधन
पिक = कोयल
पीक = पान की लार
प्रकार = आकार, रूप
प्राकार = महल
प्रणय = प्रेंम
परिणय = विवाह
परदेश = विदेश
प्रदेश = प्रांत
प्रसाद = कृपा
प्रासाद = महल
प्रसिद्ध = ख्यात
प्रसिद्धि = ख्याति
फण = साँप का फण
फन = कला
नींव = जमीन के अन्दर का भाग
नीब = कलम की नीब
निशान = चिह्न
निसान = झंडा
निश्छल = छल-रहित
निश्चल = दृढ़
नीड़ = घोंसला
नीर = पानी
पट = कपड़ा
पट्टा = तख्ता
पथ = रास्ता
पथ्य = रोगी का भोजन
परुस = कठोर
पुरुष = मर्द
वास = निवास
बास = दुर्गंध
बाह्य = बाहरी
वाह्य = धोने लायक
भवन = महल
भुवन = संसार
मणि = रत्न
मणी = सर्प
मति = बुद्धि
मत = राय
मद = नशा
मद्य = शराब
मिश्र = मिला हुआ
मिस्र = एक देश
मूल = असली, जड़
मूल्य = कीमत
योग = जोड़
योग्य = लायक
रद = दाँत
रद्द = बेकार
लक्ष = लाख
लक्ष्य = उद्देश्य
फुट = अकेला
फूट = दरार
बहन = माँ की बेटी
वहन = धोना
बहु = बहुत
बहू = वधू
बात = वचन
वात = हवा
बार = दफा
वार = दिन, हमला
वीचि = लहर
बीच = मध्य
व्यंग = विकलांग, टेड़ा
व्यंग्य = ताना
शर = बाण
सर = तालाब
शंकर = शिव
संकर = मिश्रित
शकल = शक्ल
सकल = सब
शस्त्र = हथियार
शास्त्र = विद्या
शहर = नगर
सहर = सुबह
शाण = औजार तेज करना
शान = गौरव
शाला = घर
साला = पत्नी का भाई
शीशा = काँच
सीसा = एक धातु
शीत = ठंडक
सित = उजला
शुक = तोता, सुग्गा
शूक = जौ-गेहूं की बाली की नोक
लिख = लिखना (क्रिया)
लीख = ढील
वश = अधिकार
बस = एक गाड़ी
वसन = वस्त्र
व्यसन = बुरी लत
वित्त = धन दौलत
वृत्त = चारों ओर घेरा
विष = जहर
विस = कमल तंतु
शुल्क = फीस, कर
शुक्ल = उजला
श्याम = साँवला
स्याम = एक देश
शुचि = पवित्र
सूची = विषय क्रम
शूर = वीर
सूर = सूर्य अंधा
सन = पटुआ
सन् = वर्ष
संग = साथ
संघ = समिति
समान = बराबर
सामान = सामग्री
सिता = उजला
सीता = श्री राम की पत्नी
सुत = बेटा
सूत = धागा
सुधि = याद
सुधी विद्वान
हरि = विष्णु
हरी = हरे रंग की
हल = शुद्ध व्यंजन चिह्न (्)
हल = खेत जोतने का औजार
वारिस = औलाद
वारीश = समुद्र

उक्त शब्द समूहों के अलावा निम्न शब्द समूहों को भी देखें -
अनुसार, अनुस्वार
उपस्थित, उपस्थिति
आचार, आचार्य
किला, कीला
कोड़ी, कौड़ी
कथा, कत्था
खोलना, खोलना
कर्म, क्रम
कुमार, कुम्हार
गृह, ग्रह
गड़ना, गढ़ना
चिता, चीता
चीर, चील
जलाना, जिलाना
जलना, झलना
जूठा, झूठा
डीठ, ढीठ
ढलाई, ढिलाई
डाट, डाँट
दशा, दिशा
दीप, द्वीप
नहर, नाहर
निधन, निर्धन
परदेश, प्रदेश
परवाह, प्रवाह
पटु, पट्ट्
पर्याप्त, प्राप्त
बताना, बिताना
बली, बल्ली
बहाना, भाना
भवन, भुवन
मेला, मैला
मुख, मुख्य
लपट लिपट
लोटना, लौटना
लगन, लग्न
वाद, वाद्य
समान, सामान
शुल्क, शुक्ल
समिति, सम्मति
सास, साँस
हट, हठ

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1. भाषा का आदि इतिहास - भाषा उत्पत्ति एवं इसका आरंभिक स्वरूप
2. भाषा शब्द की उत्पत्ति, भाषा के रूप - मौखिक, लिखित एवं सांकेतिक
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5. देवनागरी लिपि एवं इसका नामकरण, भारतीय लिपियाँ- सिन्धु घाटी लिपि, ब्राह्मी लिपि, खरोष्ठी लिपि
6. विश्व की प्रारंभिक लिपियाँ, भारत की प्राचीन लिपियाँ

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3. व्याकरण का प्रारम्भ, आदि व्याकरण - व्याकरणाचार्य पणिनि

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1. ध्वनि का अर्थ, परिभाषा, लक्षण, महत्व, ध्वनि शिक्षण के उद्देश्य ,भाषायी ध्वनियाँ
2. वाणी - यन्त्र (मुख के अवयव) के प्रकार- ध्वनि यन्त्र (वाक्-यन्त्र) के मुख में स्थान
3. हिन्दी भाषा में स्वर और व्यन्जन || स्वर एवं व्यन्जनों के प्रकार, इनकी संख्या एवं इनमें अन्तर
4. स्वरों के वर्गीकरण के छः आधार
5. व्यन्जनों के प्रकार - प्रयत्न, स्थान, स्वरतन्त्रिय, प्राणत्व के आधार पर

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4. वर्ण संयोग के नियम- व्यन्जन से व्यन्जन का संयोग
5. बलाघात या स्वराघात क्या है इसकी आवश्यकता, बलाघात के भेद

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2. हिन्दी भाषा के विभिन्न अर्थ
3. हिन्दी भाषा एवं व्याकरण का संबंध
4. हलन्त का अर्थ एवं प्रयोग

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. शब्द तथा पद क्या है? इसकी परिभाषा, विशेषताएँ एवं महत्त्व।
2. शब्द के प्रकार (शब्दों का वर्गीकरण)
3. तत्सम का शाब्दिक अर्थ एवं इसका इतिहास।
4. तद्भव शब्द - अर्थ, अवधारणा एवं उदाहरण
5. विदेशी/विदेशज (आगत) शब्द एवं उनके उदाहरण
6. अर्द्धतत्सम एवं देशज शब्द किसे कहते हैं?

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. द्विज (संकर शब्द) किसे कहते हैं? उदाहरण
2. ध्वन्यात्मक या अनुकरण वाचक शब्द किन्हें कहते हैं?
3. रचना के आधार पर शब्दों के प्रकार- रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
4. पारिभाषिक, अर्द्धपारिभाषिक, सामान्य शब्द।
5. वाचक, लाक्षणिक एवं व्यंजक शब्द
6. एकार्थी (एकार्थक) शब्द - जैसे आदि और इत्यादि वाक्य में प्रयोग
7. अनेकार्थी शब्द किसे कहते हैं? इनकी सूची
8. पूर्ण एवं अपूर्ण पर्याय शब्द एवं उनके उदाहरण


संबंधित जानकारी के लिए नीचे दिये गए विडियो को देखें।👇🏻
(Watch video for related information)

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.
R. F. Tembhre
(Teacher)
rfhindi.com

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