विद्या ददाति विनयम्

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समानार्थी शब्दों में अर्थभेद || शब्द प्रयोग के आधार पर अर्थ में अंतर || समानार्थी (पर्यायवाची) की अर्थभेद सूची

समानार्थी या पर्यायवाची शब्दों में उनके अर्थ की दृष्टि से कई बार सूक्ष्म अंतर देखने को मिलते हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि दिए गए दो या अधिक समानार्थी शब्दों का अर्थ समान है और उन्हें पर्यायवाची समझकर शब्द प्रयोग में भूल कर जाते हैंं। हिन्दी में ऐसे बहुत सारे शब्द हैं जिनका अर्थ प्रथम दृश्टया एक समान ही लगता है किंतु उनमें सूक्ष्म अंतर होता है। इस अंतर को हिन्दी भाषा ज्ञान की दृष्टि से समझना बहुत आवश्यक है। यदि हम इस अंतर को समझ नहीं पाते हैं तब भाषा प्रयोग में अशुद्धि की ज्यादा संभावना होती है। समानार्थी या पर्यायवाची शब्दों के अर्थभेद को समझने-समझाने की दृष्टि से नीचे अर्थभेद को स्पष्ट कर रहे हैं। इन शब्दों के अर्थभेद को समझने के लिए तीन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है―
1. प्रयोगगत व्यावहारिक अर्थ।
2. शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ।
3. शब्दकोशीय अर्थ।

शब्द सूची

1. अधर्म― ऐसा कार्य जो धर्म के प्रतिकूल हो।
वाक्य प्रयोग― निर्बलों को सताना अधर्म है।
अन्याय― न्याय के विरुद्ध।
वाक्य प्रयोग― छूआछूत बहुत बड़ा अन्याय है।

2. आल्हाद― खुशी से फूला न समाना।
वाक्य प्रयोग― बसन्त ऋतु आल्हादकारी है।
उल्लास― उमंग एवं खुशी के भाव।
वाक्य प्रयोग― भारत के स्वतंत्र होने पर सभी देशवासियों का हृदय उल्लास से भर गया था।

3. अज्ञ― अज्ञानी।
वाक्य प्रयोग― अज्ञ प्राणियों का बुरा व्यवहार भी सहनीय है।
मूर्ख― उपदेश देने पर भी जिसे ज्ञान प्राप्त न हो।
वाक्य प्रयोग― वह मूर्ख है, उसको कितना ही समझाओ, मानेगा नहीं।

4. आशंका― संशय जिससे किसी अमंगल घटना होने का डर हो।
वाक्य प्रयोग― उसे आशंका है कि वह परीक्षा में पास नहीं होगा।
भय― मन की व्याकुलता, जिससे अनिष्ट होने की सम्भावना हो।
वाक्य प्रयोग― शेर को देखकर भय से मेरे रोंगटे खड़े हो गए।

5. अज्ञात― जिसके बारे में कोई जानकारी न हो।
वाक्य प्रयोग― अज्ञात व्यक्ति का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
अज्ञेय― जिसके बारे में प्रयास करने पर भी न जाना जा सके।
वाक्य प्रयोग― ईश्वर के नियम अज्ञेय हैं।
अनभिज्ञ― वह जिसे किसी वस्तु विशेष का ज्ञान न हो।
वाक्य प्रयोग― राम संस्कृत के ज्ञान से अनभिज्ञ है।

6. आवश्यकता― ऐसी वस्तु की चाह करना, जो किसी प्रकार से प्राप्त की जा सके।
वाक्य प्रयोग― उसे हिन्दी की पुस्तक की आवश्यकता है, इसीलिए वह उसे खरीदने बाजार गया है।
इच्छा― ऐसी कल्पनाएँ, जिनका पूर्ण होना जरूरी नहीं।
वाक्य प्रयोग― मैं एक इंजीनियर बनने की इच्छा करता था, परन्तु धनाभाव के कारण न बन पाया।

7. अध्यक्ष― किसी संस्था, परिषद् अथवा संघ के प्रधान को अध्यक्ष कहते हैं, जिसका कार्यकाल लम्बा हो।
वाक्य प्रयोग― जिला परिषद् आगरा के अध्यक्ष श्री रामस्वरूप सिंह हैं।
सभापति― किसी गोष्ठी अथवा सभा का प्रधान, जो स्थाई न हो।
वाक्य प्रयोग― साहित्य गोष्ठी के सभापति श्री भगवती प्रसाद शर्मा थे।

8. आलोचना― दोष एवं गुणों का वर्णन।
वाक्य प्रयोग― जगदीश ने सत्यप्रकाश की बहुत आलोचना की।
समीक्षा― गुण एवं दोषों के बारे में टीका-टिप्पणी।
वाक्य प्रयोग― गीता की समीक्षा अनेक विद्वानों ने की हैं. की।

9. अध्ययन― पढ़ाने एवं पढ़ने का सामान्य कार्य।
वाक्य प्रयोग― अध्ययन करने से ज्ञान बढ़ता है।
अनुशीलन― किसी चीज को पढ़ने के बाद उसके बारे में मनन-चिंतन।
वाक्य प्रयोग― अनुशीलन द्वारा ही श्रेष्ठ पुस्तकों को अच्छी तरह समझा जा सकता है।

10. आराधना― मन की इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए किसी देवी-देवता की सेवा-पूजा।
वाक्य प्रयोग― परीक्षा में पास होने के लिए उसने गणेश की आराधना की।
उपासना― उपवास पूजा आदि करना जिससे कि इष्टदेव की कृपा अर्जित की जा सके।
वाक्य प्रयोग― ईश्वर की उपासना करना ही सुख प्राप्ति का सच्चा उपाय है।

11. अधिवेशन― ऐसा अस्थाई एवं बहुत बड़ा जमाव, जिसमें किसी विषय पर निश्चित समय तक विचार-विमर्श किया जाए।
वाक्य प्रयोग― आर्य समाज का अधिवेशन दिल्ली में बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
बैठक― थोड़े समय के लिए छोटी-सी सभा।
वाक्य प्रयोग― आज हमारे विद्यालय में अल्प बचत से सम्बन्धित एक बैठक हुई।

12. आधि― मस्तिष्क सम्बन्धी बेचैनी।
वाक्य प्रयोग― चिन्ता एक ऐसी आधि है, जिससे जिससे छुटकारा मिलना असम्भव है।
व्याधि― वह व्यथा, जो शरीर से सम्बन्धित हो।
वाक्य प्रयोग― टी.बी. एक ऐसी व्याधि है, जिसका उपचार सहज नहीं है।

13. अनुग्रह― किसी के मन की इच्छाओं की पूर्ति हेतु उसे कुछ प्रदान करना अथवा ग्रहण करना।
वाक्य प्रयोग― आपने समय पर पधार कर हम पर अत्यन्त ही अनुग्रह किया है।
अनुकम्पा― हमदर्दी द्वारा किसी के कष्टों का निवारण।
वाक्य प्रयोग― यह आपकी ही अनुकम्पा है, जिससे हम इन कष्टों से पार पा सके।

14. आदेश— हुक्म।
वाक्य प्रयोग— सरकार का आदेश है कि परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाया जाए।
निर्देश— मार्गदर्शन करना।
वाक्य प्रयोग— विद्यार्थियों ने अध्यापक के निर्देशानुसार अध्ययन करके प्रथम श्रेणी प्राप्त की।

15. अनुपम— किसी अन्य से जिसकी उपमा न दी जाए।
वाक्य प्रयोग— हेमामालिनी के अनुपम सौन्दर्य से हर फिल्म दर्शक भली-भाँति परिचित है।
अद्वितीय— जिसकी बराबरी का दूसरा न हो।
वाक्य प्रयोग— द्वितीय विश्व युद्ध संसार में अद्वितीय संग्राम था।

16. आदरणीय— बड़ों के लिए आदरसूचक शब्द, आदर करने योग्य।
वाक्य प्रयोग— आदरणीय प्रधानाचार्य जी ने मेरी पूरी फीस माफ कर दी।
पूज्य— यह सम्मानसूचक शब्द, जो अपने गुरु माता-पिता एवं अग्रज हेतु उपयोग किया जाता है।
वाक्य प्रयोग— पूज्य गुरुजनों का हमें सर्वदा सम्मान करना चाहिए।

17. अनुभव— वह ज्ञान, जो मन द्वारा अर्जित किया गया हो अर्थात प्रयोगों द्वारा अर्जित ज्ञान है।
वाक्य प्रयोग— प्रधानाचार्य के पद हेतु पाँच साल का शिक्षण अनुभव आवश्यक है।
अनुभूति— जो ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त हुआ हो।
वाक्य प्रयोग— लू की अनुभूति होते ही मैंने खिड़कियाँ बन्द कर लीं।

18. आतंक— बलवान के अन्याय से उत्पन्न भय।
वाक्य प्रयोग— शिवाजी के आतंक से अच्छे-अच्छे मुगल सरदार भी थर्राते थे।
त्रास— डर से उत्पन्न व्याकुल।
वाक्य प्रयोग— वानरों के त्रास से राक्षस व्याकुल रहते थे।

19. आगामी— आने वाला।
वाक्य प्रयोग— यह आशा है कि आगामी चुनावों में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलेगा।
भावी— होने वाला।
वाक्य प्रयोग— भावी नेता के विषय में अभी निर्णय नहीं लिया जा सकता।

20. आज्ञा— आदेश। वाक्य प्रयोग— विश्वामित्र ने राम को धनुष भंग करने की आज्ञा दी।
अनुमति— अनुज्ञा
वाक्य प्रयोग— पति ने पत्नी को सिनेमा जाने की अनुमति प्रदान की।

21. आचार— चाल-चलन एवं चरित्र सम्बन्धी कार्य।
प्रयोग— आचार-विचारों पर दृष्टिपात करने से प्रतीत होता है कि वह एक नेक आदमी है।
व्यवहार— वह आचार-व्यवहार जो दूसरों के साथ किया जाता है। वाक्य प्रयोग— सद्व्यवहार सफलता का प्रथम सोपान है।

22. अनुमान— बौद्धिक तर्क द्वारा लिया गया निश्चय।
वाक्य प्रयोग— यह मेरा अनुमान है कि आज वह अवश्य आगरा गया होगा।
प्राक्कलन— यह निर्णय, जो गणना के सहारे लिया जाए।
वाक्य प्रयोग— प्राक्कलन बनाने से खर्चा कम किया जाना ही श्रेयस्कर है।

25. अहंकार— स्वयं को ही सब कुछ समझने की भावना।
वाक्य प्रयोग— अहंकार मनुष्य को नीचा दिखाता है।
घमण्ड— अभिमान।
वाक्य प्रयोग— राम ने रावण के दर्प को चूर-चूर कर दिया।

24. अनुमोदन— किसी कार्यवाही अथवा कथन पर सहमत होना।
वाक्य प्रयोग— इस प्रस्ताव को अग्रसरित करने से पूर्व इसका अनुमोदन करना आवश्यक है।
स्वीकृति— किसी प्रस्ताव को स्वीकार करना।
वाक्य प्रयोग— प्रधानाचार्य जी की स्वीकृति से अध्यापन कार्य सुचारु ढंग से चलाया गया।

25. अस्वीकृति— किसी दावे को नामंजूर करना।
वाक्य प्रयोग— प्रधानमन्त्री की अस्वीकृति से यह प्रस्ताव पास न हो सका।
प्रतिषेध— किसी का खण्डन करना, मना करना।
वाक्य प्रयोग— बीमारी में अपथ्य वस्तुओं का प्रतिषेध रहता है।

26. अनुराग— निःस्वार्थ प्रेम।
प्रयोग— भगवान के चरणारविन्द में अनुराग ही मुक्ति मार्ग पर ले जाता है।
आसक्ति— सांसारिक वस्तुओं के प्रति आकर्षण।
प्रयोग— इन्द्रियों के सुख के प्रति आसक्ति से केवल दुःख ही हाथ लगता है।

27. अस्त्र— ऐसे हथियार, जिनसे शत्रुओं पर फेंककर प्रहार किया जाता है।
वाक्य प्रयोग— बांग्लादेश के संघर्ष में अस्त्रों का खुलकर प्रयोग हुआ।
शस्त्र— वह हथियार, जिसका हाथ में लेकर प्रयोग किया जाता है। जैसे– तलवार, भाला आदि।
वाक्य प्रयोग— शस्त्रधारियों में परशुराम सर्वश्रेष्ठ माने जाते थे।

28. आग्रह— वह याचना, जो अधिकार की भावना से युक्त हो।
वाक्य प्रयोग— विद्यार्थियों के आग्रह से गुरुजी ने उन्हें क्रिकेट खेलने की अनुमति दी।
अनुरोध— नम्रतापूर्ण याचना।
वाक्य प्रयोग— छात्रों के अनुरोध पर प्रधानाचार्य जी ने विद्यालय की छुट्टी कर दी।

29. असाधारण— जो साधारण नहीं हो।
वाक्य प्रयोग— शेर को मारकर उसने असाधारण शौर्य का परिचय दिया है।
अलौकिक— ऐसी वस्तु, जो इस लोक में अप्राप्य हो।
वाक्य प्रयोग— जून के महीने में मसूरी पहुँचकर हमें अलौकिक आनन्द की अनुभूति हुई।

30. अनुसंधान— किसी दिए गए मामले की अधिकाधिक छानबीन करके गुप्त रहस्यों को खोज निकालना।
वाक्य प्रयोग— गोस्वामी तुलसीदास के जन्म स्थान के बारे में कई विद्वान् अनुसंधान कर चुके हैं अभी तक कोई सुनिश्चित निष्कर्ष प्राप्त नहीं किया जा सका है।
आविष्कार— ऐसी चीज का निर्माण, जो पहले से विद्यमान न हो।
वाक्य प्रयोग— न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया था।
अन्वेषण― पहले से विद्यमान वस्तु की खोज।
वाक्य प्रयोग― उत्साही कोलम्बस ने नए-नए द्वीपों तथा देशों का अन्वेषण किया है।

31. अर्चना― देवों की सेवा, जो दीपक, नैवेद्य, धूप आदि अनेक प्रकार की सामग्री से सम्पन्न की जाए।
वाक्य प्रयोग― वैष्णव मन्दिर में चौबीसों घण्टे अर्चना का कार्यक्रम चलता रहता है।
पूजा― वह कार्य, जिसके द्वारा देवी-देवताओं के प्रति भक्ति-भाव प्रकट किया जाता है।
वाक्य प्रयोग― गीता हर रोज मन्दिर में हनुमान जी की पूजा करती है।

32. आत्मा― शरीर का वह अंश जिसमें ईश्वर व्याप्त है।
वाक्य प्रयोग― शरीर मर जाता है, परन्तु आत्मा अमर रहती है।
अन्तःकरण― हृदय की वह शक्ति, जिसके द्वारा अच्छे बुरे की पहचान होती है।
वाक्य प्रयोग― मेरा अन्तःकरण झूठ बोलने की इजाजत नहीं देता है।
चित्त― इन्द्रियाँ जो ज्ञानार्जन में सहायक हैं।
वाक्य प्रयोग― सदुपदेश मानव के चित्त में स्थाई रूप से बैठ जाते हैं।

33. अभिमान― स्वयं को ही सर्वोपरि मानना।
वाक्य प्रयोग― जैसे वह अभिमानवश पढ़ा नहीं, अतः परीक्षा में असफल हो गया।
गर्व― धन, ऐश्वर्य एवं सौन्दर्य से उत्पन्न श्रेष्ठता की भावना।
वाक्य प्रयोग― मुझे अपने पुत्रों के रूप पर गर्व है।

34. अपराध― वह कार्य, जो विधि विरुद्ध हो।
वाक्य प्रयोग― जो अपराध करते हैं, उनकी रिपोर्ट पुलिस से करना हमारा कर्तव्य होना चाहिए।
पाप― धर्म सम्बन्धी नियमों की अहलेना करना।
वाक्य प्रयोग― हिंसा करना पाप है।

35. क्रोध― मन का वह भाव, जो किसी के द्वारा नुकसान एवं गलत कार्य करने वाले के प्रति होता है।
वाक्य प्रयोग— उसने मेरे पैर को चोट पहुँचाई, अतः मुझे उस पर क्रोध आ गया और मैं उसे पीटने लगा।
अप्रसन्नता― इच्छा के विरुद्ध कार्य होने पर उत्पन्न होने वाला मनोभाव।
वाक्य प्रयोग― समय पर न पहुँचने पर गुरुजी ने अपने प्रिय शिष्य सीताराम के प्रति अप्रसन्नता प्रकट की।

36. कलंक― समाज विरोधी आचरण करने पर बदनामी।
वाक्य प्रयोग― अस्पृश्यता हिन्दू समाज पर कलंक है।
अपयश― ऐसी बदनामी, जो ख्याति के पश्चात् हो।
वाक्य प्रयोग― जो अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते, वे अपयश के पात्र होते हैं।

37. निंदा― किसी के बुरे कार्यों के कारणवश बुराई करना।
वाक्य प्रयोग― दुराचारी निंदा के पात्र होते हैं।
अपवाद― सामान्य नियम के विपरीतं आलोचना प्रत्यालोचना।
वाक्य प्रयोग― राजनीतिशास्त्र के नियमों के अनेक विद्वानों ने अपवाद लिखे हैं।

38. कमी― जरूरत से कम पड़ना।
वाक्य प्रयोग― थोड़ी सी चीनी की कमी होने के कारण शरबत अच्छा नहीं बन पाया।
हास― गिरावट।
वाक्य प्रयोग― आजकल सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का रिवाज हो गया है, इससे हमारे चरित्र का हुआ है।
क्षीणता― किसी वस्तु का अपनी सामान्य स्थिति में भी घट जाना, दुबला हो जाना आदि।
वाक्य प्रयोग― तपेदिक के फलस्वरूप राम के स्वास्थ्य में क्षीणता आ गई है।

39. संस्कृति― आध्यात्मिक, अनुशासनात्मक एवं धार्मिक चाल-चलन।
वाक्य प्रयोग― हमारी संस्कृति में आध्यात्मिकता पर अधिक जोर दिया गया है।
सभ्यता― वह स्थिति, जिसमें कि चाल-चलन एवं रहन-सहन के स्तर को उच्च बनाने हेतु प्रयास किए गए हों।
वाक्य प्रयोग― विज्ञान ने आज की सभ्यता की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान किया है।

40. सृजन― निर्माण करना।
वाक्य प्रयोग― अच्छे वातावरण का सृजन करना ही सज्जनों का काम है।
उत्पादन― उत्पन्न करना।
वाक्य प्रयोग― गत वर्ष तिलहन का उत्पादन अच्छा हुआ।

41. शाश्वत― वह वस्तु, जो नष्ट न हो सके।
वाक्य प्रयोग― प्रकृति के नियम शाश्वत हैं।
स्थित― स्वयं की जगह पर ही खड़ा हुआ।
वाक्य प्रयोग― फतेहपुर सीकरी में स्थित मकबरा सम्राट अकबर की यादगार को आज भी बनाए हुए हैं।
स्थिर― जो अपने विचारों से हटे नहीं।
वाक्य प्रयोग― स्थिर विचारों के पुरुष ही अपने उद्देश्यों तक पहुँचने में सफल होते हैं।

42. समर्पण― सौंप देना, भेंट करना, अपने आपको कानून के हवाले करना।
वाक्य प्रयोग― श्री जयप्रकाश की प्रेरणा द्वारा दस्युओं ने आत्म-समर्पण कर दिया।
प्रदान― व्यक्ति को कुछ दे देना।
वाक्य प्रयोग― दौड़ में प्रथम आने पर उसे पुरस्कार प्रदान किया गया।

43. समय― काल विशेष।
वाक्य प्रयोग― यह सब समय का ही फेर है जो राजा को रंक एवं रंक को राजा बना देता है।
अवधि― मियाद, काल का निश्चित भाग।
वाक्य प्रयोग― यदि तुम एक वर्ष की अवधि में मेरा कर्ज नहीं चुकाते तो मैं तुम पर दावा कर दूँगा।

44. शोक― प्रिय के चिर संयोग पर उत्पन्न दुःख का भाव।
वाक्य प्रयोग― गाँधीजी की हत्या के समाचार से सम्पूर्ण देश में शोक की लहर दौड़ गई।
विषाद― उदासी, विवाद- उदासी, गम, निराशा।
वाक्य प्रयोग― अपने पड़ौसी को ही अपने विरुद्ध गवाही देते हुए देखकर ठाकुर साहब को गहरा विषाद हुआ।

45. स्पर्धा― मन की वह इच्छा, जो किसी से अधिक उन्नति करने की हो।
वाक्य प्रयोग― सम्पूर्ण कक्षा के विद्यार्थियों में यह स्पर्द्धा है कि कौन सर्वोच्च अंक प्राप्त करे।
द्वेष― दुश्मनी के फलस्वरूप उत्पन्न मन में विरोधी भावना।
वाक्य प्रयोग― उसके पिता और मेरे पिताजी में पुरानी शत्रुता है अतः वह मुझसे द्वेष करता है।
ईर्ष्या― दूसरों की उन्नति को देखकर उसे सहन न कर सकना। वाक्य प्रयोग― छोटे भाई की पदोन्नति ने उसे ईर्ष्या से भर दिया।

46. परिश्रम― मस्तिष्क एवं शरीर से मेहनत करना।
वाक्य प्रयोग― परिश्रम बड़े से बड़े मनोरथों को सिद्ध करता है।
श्रम― हाथ पैरों की मेहनत।
वाक्य प्रयोग― दिन-रात श्रम करके उसने गेहूं की अच्छी फसल प्राप्त की है।
आयास― मस्तिष्क सम्बन्धी मेहनत।
वाक्य प्रयोग― किताब लिखने हेतु कठिन आयास करना पड़ता है।

47. उत्तेजना― किसी के द्वारा ज्यादती किए जाने पर उसके प्रति भाव।
वाक्य प्रयोग― बंगला देशवासी सेना के अत्याचारों से उत्तेजित हो उठे।
उत्साह― सद्कार्य सम्पादन हेतु मन की ललक।
वाक्य प्रयोग― विद्यालय का वार्षिकोत्सव बड़े ही उत्साह से सम्पादित किया गया।

48. भक्ति― ईश्वर के प्रति प्रेम भाव।
वाक्य प्रयोग― भगवद् भक्ति ही प्राणी के पापों को नष्ट कर सकती है।
श्रद्धा― अपने से बड़ों के प्रति पूज्य भाव।
वाक्य प्रयोग― जो व्यक्ति सद्गुणों को महत्त्व देते हैं, उनके ही मन में श्रद्धा जैसा श्रेष्ठ भाव उत्पन्न होता है।

49. निदर्शन― बतौर दिखावा।
वाक्य प्रयोग― उस कम्पनी के मैनेजर ने मुझे कई निदर्शन दिखाए,तब मैंने उसे पसन्द किया।
उदाहरण― कही हुई चीज को साफ-साफ समझाने के लिए मिसाल देना।
वाक्य प्रयोग― भिन्न का प्रश्न समझाते समय अध्यापक ने दो उदाहरण प्रस्तुत किए।
दृष्टान्त― निश्चित कथन की पुष्टिकरण हेतु किसी को नमूना बतौर प्रस्तुत करना।
वाक्य प्रयोग― अहिंसा के विषय में बताते हुए अध्यापक ने सम्राट अशोक का दृष्टान्त प्रस्तुत किया।

50. ठण्डा― कष्टदाई ठण्डक देने वाला पदार्थ।
वाक्य प्रयोग― आज मौसम अधिक ठण्डा है,अतः बाहर निकलना मुनासिव नहीं है।
शीतल― सुखदायक मौसम।
वाक्य प्रयोग― शीतल, मन्द, सुगन्ध पवन धीरे-धीरे वह रहा था।

51. उच्छृंखल― नियमबद्ध न होना।
वाक्य प्रयोग― आजकल अधिकांश नवयुवक उच्छृंखल होते हैं।
दण्ड― वह, जो दण्ड से भी नहीं डरता है।
वाक्य प्रयोग― वह इतना उद्दण्ड है कि सम्पूर्ण कक्षा के छात्र उससे परेशान हैं।

52. दीक्षा― आचार्य द्वारा प्रदत्त मन्त्र एवं उपदेश आदि।
वाक्य प्रयोग― विश्वामित्र ने राम एवं लक्ष्मण को दीक्षा दी थी।
शिक्षा― पढ़ाने एवं सिखाने का कार्य।
वाक्य प्रयोग― उसका सभ्य एवं सुसंस्कृत होना अच्छी शिक्षा का द्योतक है।

53. उपादान― वह सामान, जिसके द्वारा कोई चीज तैयार की जाती है।
वाक्य प्रयोग― चीनी मिठाई का उपादान है।
उपकरण― किसी कार्य के करने हेतु यन्त्र आदि।
वाक्य प्रयोग― विज्ञान प्रयोगशाला में अनेक उपकरण होते हैं।

54. साहस― वह मानसिक शक्ति जिसके द्वारा मुसीबतों का सामना करने की पूर्ण सामर्थ्य।
वाक्य प्रयोग― साहस एवं आत्म विश्वास ही कठिन कार्यों में सफलता दिलाते हैं।
वीरता― प्रस्तुत शब्द बहादुरी का प्रदर्शक है।
वाक्य प्रयोग― महाराणा प्रताप की वीरता ने अकबर के छक्के छुड़ा दिए।

55. मुनि― धार्मिक तत्त्वों के विश्लेषणकर्ता एवं सत्य-असत्य के विचारक।
वाक्य प्रयोग― नारद मुनि ब्रह्मा के मानस पुत्र थे।
ऋषि― भौतिक एवं आध्यात्मिक तत्त्वों के पूर्णरूपेण विश्लेषक एवं वेद मन्त्रों के ज्ञाता।
वाक्य प्रयोग― भारतवर्ष ऋषिमुनियों का सदा से सत्कार करता आया है।

56. आश्चर्य― अप्रत्याशित वस्तु के घटित होन पर मन के भाव।
वाक्य प्रयोग― उसके उत्तीर्ण होने का समाचार सुनकर मैं आश्चर्य में पड़ गया।
चमत्कार― आश्चर्यजनक एवं सराहनीय चीजें।
वाक्य प्रयोग― वैज्ञानिक चमत्कारों की आधुनिक युग में धूम मची हुई है।
विस्मय― अत्यन्त ही असमंजस्य में पड़ जाना।
वाक्य प्रयोग― लेत चाप आपुहि चलि गयऊ।
परशुराम मन विस्मय भयऊ।।

57. पौरुष― ऐसी सामर्थ्य, जिससे पुरुषोचित करने की शक्ति हो।
वाक्य प्रयोग― अपने अद्वितीय पौरुष से ही उसको युद्ध क्षेत्र में सफलता प्राप्त हुई।
ओज― तेज, कांति।
वाक्य प्रयोग― नियमित जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति के मुखमण्डल पर ओज आ जाता है।

58. विशेषज्ञता― निश्चित विषय का विशेष ज्ञान प्राप्त कर लेना।
वाक्य प्रयोग― उसने कान के रोग के इलाज में विशेषज्ञता प्राप्त कर ली है।
विशेषता― सामान्य से अधिक भाव अथवा धर्म।
वाक्य प्रयोग― शान्तिप्रिय होना संतो के चरित्र की विशेषता होती है।

59. चिकित्सालय― उपचार अथवा रोगों का इलाज किए जाने की जगह।
वाक्य प्रयोग― डॉक्टर चिकित्सालय जाने की जल्दी में था, अतः मैं उससे नहीं मिल सका।
औषधालय― दवाएँ रखे जाने का स्थान।
वाक्य प्रयोग― औषधालय में अनेक प्रकार की दवाइयाँ पाई जाती हैं।

60. कुख्यात― कुत्सित कार्यों के फलस्वरूप मशहूर।
वाक्य प्रयोग― माधोसिंह कुख्यात दस्यु था।
विख्यात― अच्छे कार्यों के लिए प्रसिद्ध।
वाक्य प्रयोग― श्री जयप्रकाश नारायण अपनी त्याग-भावना के कारण विख्यात थे।

61. दीन― वह व्यक्ति जिसमें धन की कमी के कारण निम्न स्तर की भावनाएँ व्याप्त हों।
वाक्य प्रयोग― अर्थवादी इस युग में प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको दीन समझने लगा है।
कंगाल― अन्यन्त ही दरिद्र, टुकड़े-टुकड़े को मोहताज।
वाक्य प्रयोग― शराब की आदत ने उसे कंगाल बना दिया है।

62. मृत्यु― जन-साधारण के मरने पर उपयोग किया जाने वाला शब्द।
वाक्य प्रयोग― आज रेल दुर्घटना में तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई।
निधन― मृत्यु के लिए प्रयुक्त एक शिष्ट शब्द। किसी विशिष्ट व्यक्ति की मृत्यु के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला शब्द।
वाक्य प्रयोग― लालबहादुर शास्त्री के निधन पर देश में शोक छा गया।

63. क्षमता― बनाए रखने की शक्ति, ग्राह्य सामर्थ्य आदि को कहते हैं।
वाक्य प्रयोग― उसमें घण्टों तक लगातार पढ़ने की क्षमता है।
योग्यता― मानसिक अथवा शारीरिक शक्ति को काम में लाने की योग्यता।
वाक्य प्रयोग― पुराने सरकारी अफसरों की प्रशासन-योग्यता देखते ही बनती थी।

64. सचिव― व्यक्तिगत कार्य हेतु सहायता करने वाला पुरुष, राज्य के सचिवालय का उच्च अधिकारी।
वाक्य प्रयोग― सचिव अपने विभाग का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकारी होता है।
मन्त्री― केन्द्र एवं राज्य से मन्त्रिमण्डल के सदस्यों के लिए उपयोग किया जाने वाला शब्द।
वाक्य प्रयोग― वोट की राजनीति के कारण हर दसवाँ विधायक मन्त्री बना दिया जाता है।

65. युग― 12 वर्ष की समयावधि।
वाक्य प्रयोग— स्वतंत्रता प्राप्त हुए आज चार युग से अधिक हो गए, परन्तु हिन्दी राजभाषा नहीं बन सकी है।
काल— समय की वह सत्ता, जिसके द्वारा वर्तमानकाल, भूतकाल एवं भविष्यकाल का बोध हो।
वाक्य प्रयोग― भूतकाल में भारत की संस्कृति चरमोत्कर्ष पर थी।

66. व्यथा― मानसिक परेशानी अथवा उथल-पुथल।
वाक्य प्रयोग― रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखी गोय।
सुनि अठि लहें लोग सब बाँटि न हैं कोय।।
कष्ट― असमर्थता से उत्पन्न शारीरिक एवं मानसिक अशान्ति।
वाक्य प्रयोग― धनाभाव के फलस्वरूप आज वह विभिन्न प्रकार के कष्ट सहन करता हुआ जीवन निर्वाह कर रहा है।

67. विलाप― विरह अथवा शोकजनित रुदन।
वाक्य प्रयोग― पुत्र की मृत्यु पर किया गया उसका विलाप हृदय द्रवित करने वाला था।
प्रलाप― मानसिक असन्तुलन अथवा व्यर्थ की बातें करना।
वाक्य प्रयोग― मेरे पास व्यर्थ प्रलाप करने हेतु समय नहीं।

68. प्रणाम― अपने से बड़ों के प्रति की जाने वाली दण्डवत।
वाक्य प्रयोग― वह अपने माता-पिता को रोजाना प्रणाम करता है।
नमस्कार― अपनी समता के लोगों से की जाने वाली नमस्ते।
वाक्य प्रयोग― अपनी सहेली को नमस्कार कहकर उसने विदा ली।

69. परीक्षा― किसी की योग्यता को परखना।
वाक्य प्रयोग― वह हर परीक्षा में खरा उतरा है।
जाँच― किसी वस्तु के सत्य एवं असत्य के विषय में खोज।
वाक्य प्रयोग― आपातकालीन अत्याचारों की जाँच हेतु एक आयोग गठित किया गया है।

70. भ्रम― वस्तु विशेष अथवा व्यक्ति के समझने में भूल।
वाक्य प्रयोग― यह आपका भ्रम है कि वह जेबकतरा है।
त्रुटि― गलती।
वाक्य प्रयोग― अपनी त्रुटियों से शिक्षा ग्रहण करना बुद्धिमता का लक्षण है।

71. पुराना― जो ताजा एवं नया न हो।
वाक्य प्रयोग― यह किताब पुरानी है, अतः मैं इसे नहीं खरीदूंगा।
प्राचीन― यह शब्द अत्यन्त पुराने समय के लिए उपयोग किया जाता है।
वाक्य प्रयोग― प्राचीनकाल में भारतवर्ष सोने की चिड़िया कहकर पुकारा जाता था।

72. तन्द्रा― नींद की अर्द्ध-व्यवस्था ऊँघना।
वाक्य प्रयोग― तन्द्रा दूर करने के लिए मुझे चाय मिलनी ही चाहिए।
निद्रा― सो जाना।
वाक्य प्रयोग― निद्रा आ जाने से रोग आधा रह जाता है।

73. अशिक्षित― बिना पढ़ा-लिखा व्यक्ति।
वाक्य प्रयोग― भारत में अशिक्षित व्यक्तियों की संख्या किसी भी देश की अपेक्षा अधिक है।
निरक्षर― वह जो न तो पढ़ना जानता हो न लिखना।
वाक्य प्रयोग― निरक्षर व्यक्ति के लिए काला अक्षर भैंस बराबर होता है-ऐसी कहावत है।

74. दुःख― दुर्घटना एवं अन्य प्रकार की हानि द्वारा उत्पन्न मन का भाव।
वाक्य प्रयोग― पिता की मृत्यु के कारण उसके परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है।
खेद― वह भाव जिसकी अनुभूति किसी काम के न कर सकने पर होती है।
वाक्य प्रयोग― मुझे खेद है कि मैं कल आपके यहाँ पहुँच नहीं सका।

75. स्नेह― वह लगाव जो अपने से छोटों के प्रति होता है।
वाक्य प्रयोग― जिन बच्चों को अपने माता पिता का स्नेह नहीं मिलता है, वे प्रायः असामान्य स्वभाव वाले हो जाते हैं।
प्रेम― गहरा लगाव परहित चिन्तन।
वाक्य प्रयोग― विश्व प्रेंम मानव जीवन की चरम साधना है।

हिन्दी भाषा के इतिहास से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. भाषा का आदि इतिहास - भाषा उत्पत्ति एवं इसका आरंभिक स्वरूप
2. भाषा शब्द की उत्पत्ति, भाषा के रूप - मौखिक, लिखित एवं सांकेतिक
3. भाषा के विभिन्न रूप - बोली, भाषा, विभाषा, उप-भाषा
4. मानक भाषा क्या है? मानक भाषा के तत्व, शैलियाँ एवं विशेषताएँ
5. देवनागरी लिपि एवं इसका नामकरण, भारतीय लिपियाँ- सिन्धु घाटी लिपि, ब्राह्मी लिपि, खरोष्ठी लिपि
6. विश्व की प्रारंभिक लिपियाँ, भारत की प्राचीन लिपियाँ

हिन्दी भाषा के इतिहास से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. हिन्दू (हिन्दु) शब्द का अर्थ एवं हिन्दी शब्द की उत्पत्ति
2. व्याकरण क्या है? अर्थ एवं परिभाषा, व्याकरण के लाभ, व्याकरण के विभाग
3. व्याकरण का प्रारम्भ, आदि व्याकरण - व्याकरणाचार्य पणिनि

ध्वनि एवं वर्णमाला से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. ध्वनि का अर्थ, परिभाषा, लक्षण, महत्व, ध्वनि शिक्षण के उद्देश्य ,भाषायी ध्वनियाँ
2. वाणी - यन्त्र (मुख के अवयव) के प्रकार- ध्वनि यन्त्र (वाक्-यन्त्र) के मुख में स्थान
3. हिन्दी भाषा में स्वर और व्यन्जन || स्वर एवं व्यन्जनों के प्रकार, इनकी संख्या एवं इनमें अन्तर
4. स्वरों के वर्गीकरण के छः आधार
5. व्यन्जनों के प्रकार - प्रयत्न, स्थान, स्वरतन्त्रिय, प्राणत्व के आधार पर

ध्वनि, वर्णमाला एवं भाषा से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'अ' से 'औ' तक हिन्दी स्वरों की विशेषताएँ एवं मुख में उच्चारण स्थिति
2. प्रमुख 22 ध्वनि यन्त्र- स्वर तन्त्रियों के मुख्य कार्य
3. मात्रा किसे कहते हैं? हिन्दी स्वरों की मात्राएँ, ऑ ध्वनि, अनुस्वार, अनुनासिक, विसर्ग एवं हलन्त के चिह्न
4. वर्ण संयोग के नियम- व्यन्जन से व्यन्जन का संयोग
5. बलाघात या स्वराघात क्या है इसकी आवश्यकता, बलाघात के भेद

ध्वनि, वर्णमाला एवं भाषा से संबंधित इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. ध्वनि उच्चारण में 'प्रत्यन' क्या है? प्रयत्नों की संख्या, 'प्रयत्न' के आधार पर हिन्दी व्यन्जन के भेद
2. हिन्दी भाषा के विभिन्न अर्थ
3. हिन्दी भाषा एवं व्याकरण का संबंध
4. हलन्त का अर्थ एवं प्रयोग

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. शब्द तथा पद क्या है? इसकी परिभाषा, विशेषताएँ एवं महत्त्व।
2. शब्द के प्रकार (शब्दों का वर्गीकरण)
3. तत्सम का शाब्दिक अर्थ एवं इसका इतिहास।
4. तद्भव शब्द - अर्थ, अवधारणा एवं उदाहरण
5. विदेशी/विदेशज (आगत) शब्द एवं उनके उदाहरण
6. अर्द्धतत्सम एवं देशज शब्द किसे कहते हैं?

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. द्विज (संकर शब्द) किसे कहते हैं? उदाहरण
2. ध्वन्यात्मक या अनुकरण वाचक शब्द किन्हें कहते हैं?
3. रचना के आधार पर शब्दों के प्रकार- रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
4. पारिभाषिक, अर्द्धपारिभाषिक, सामान्य शब्द।
5. वाचक, लाक्षणिक एवं व्यंजक शब्द
6. एकार्थी (एकार्थक) शब्द - जैसे आदि और इत्यादि वाक्य में प्रयोग
7. अनेकार्थी शब्द किसे कहते हैं? इनकी सूची
8. पूर्ण एवं अपूर्ण पर्याय शब्द एवं उनके उदाहरण
9. श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द क्या होते हैं एवं शब्द सूची
10. पुनरुक्त (युग्म) शब्द क्या होते हैं? उनके वर्ग

शब्द निर्माण एवं प्रकारों से संबंधित प्रकरणों को पढ़ें।
1. पर्यायवाची शब्द क्या है?शब्दों की सूची
2. विलोम शब्दों की रचना (विलोम बनने के नियम) व शब्द सूची || विलोम शब्दों के अन्य नाम
3. समानार्थी या समानार्थक शब्द किसे कहते हैं? इसकी परिभाषा और विशेषताएँ

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
2. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
3. मुहावरे और लोकोक्तियाँ
4. समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What Is Samas In Hindi
5. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम
2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. परिमाणवाचक, व्यक्तिवाचक और विभागवाचक विशेषण
3. भाषा क्या है? | भाषा की परिभाषाएँ और विशेषताएँ
4. अलंकार क्या है? | वक्रोक्ति, अतिशयोक्ति और अन्योक्ति अलंकार
5. उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकार

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार क्या होते हैं?
2. प्रत्यय क्या है? | कृदन्त और तदिधत प्रत्यय || महत्वपूर्ण प्रत्यय एवं उनके उदाहरण
3. व्याजस्तुति अलंकार और व्याजनिन्दा अलंकार क्या होते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी | रुढ़, यौगिक और योगरूढ़ | अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
2. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
3. मुहावरे और लोकोक्तियाँ
4. समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What Is Samas In Hindi
5. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. व्यंजन एवं विसर्ग संधि | व्यंजन एवं संधि निर्माण के नियम
2. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
3. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
4. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार
5. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? || इनका वाक्य में प्रयोग

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य में 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? || विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

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3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
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5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है? || Hindi Rastrabha का उत्कर्ष

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2. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा || भाषा क्या है?
3. अपठित गद्यांश क्या होता है और किस तरह हल किया जाता है
4. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य
5. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?

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1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

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1. संज्ञा क्या है? | संज्ञा के प्रकार– व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक, भाववाचक
2. संज्ञा से सर्वनाम, विशेषण और क्रिया कैसे बनते हैं?
3. सर्वनाम क्या है? | संज्ञा और सर्वनाम में अन्तर || सर्वनाम के प्रकार
4. पुरूषवाचक सर्वनाम – उत्तमपुरूष, मध्यमपुरूष और अन्यपुरूष
5. निजवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. निश्चयवाचक सर्वनाम और अनिश्चयवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
2. सम्बन्धवाचक सर्वनाम और प्रश्नवाचक सर्वनाम क्या होते हैं?
3. संयुक्त सर्वनाम क्या होते हैं?
4. विशेषण किसे कहते हैं? | विशेषण के प्रकार एवं उसकी विशेषताएँ
5. गुणवाचक विशेषण और संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. संख्यावाचक विशेषण | निश्चित और अनिश्चित विशेषण || पूर्णांकबोधक और अपूर्णांकबोधक विशेषण
2. कार्यालयों में फाइलिंग (नस्तीकरण) क्या है?
3. राष्ट्रीय गीत "वन्दे मातरम" का हिन्दी अनुवाद।
4. संयुक्त व्यन्जन किसे कहते हैं इनके उदाहरण
5. हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्णों में रकार लग सकता है?
6. अ और आ का उच्चारण स्थान एवं संबंधित तथ्य
7. अनुतान क्या है? अनुतान के उदाहरण एवं प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. व्याकरण क्या है
2. वर्ण क्या हैं वर्णोंकी संख्या
3. वर्ण और अक्षर में अन्तर
4. स्वर के प्रकार
5. व्यंजनों के प्रकार-अयोगवाह एवं द्विगुण व्यंजन
6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. लिपियों की जानकारी
2. शब्द क्या है
3. लोकोक्तियाँ और मुहावरे
4. रस के प्रकार और इसके अंग
5. छंद के प्रकार– मात्रिक छंद, वर्णिक छंद
6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
7. अलंकार और इसके प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. शब्द क्या है- तत्सम एवं तद्भव शब्द
2. देशज, विदेशी एवं संकर शब्द
3. रूढ़, योगरूढ़ एवं यौगिक शब्द
4. लाक्षणिक एवं व्यंग्यार्थक शब्द
5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
6. अनेकार्थी शब्द क्या होते हैं उनकी सूची
7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द
11. द्विरुक्ति शब्द क्या हैं? द्विरुक्ति शब्दों के प्रकार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. 'ज' का अर्थ, द्विज का अर्थ
2. भिज्ञ और अभिज्ञ में अन्तर
3. किन्तु और परन्तु में अन्तर
4. आरंभ और प्रारंभ में अन्तर
5. सन्सार, सन्मेलन जैसे शब्द शुद्ध नहीं हैं क्यों
6. उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक शब्द क्या है.
7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. समास के प्रकार, समास और संधि में अन्तर
2. संधि - स्वर संधि के प्रकार - दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि
3. वाक्य – अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
4. योजक चिह्न- योजक चिह्न का प्रयोग कहाँ-कहाँ, कब और कैसे होता है?
5. वाक्य रचना में पद क्रम संबंधित नियम
6. कर्त्ता क्रिया की अन्विति संबंधी वाक्यगत अशुद्धियाँ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. विराम चिन्हों का महत्व
2. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
3. लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर भाषा में इनकी उपयोगिता
4. प्रेरणार्थक / प्रेरणात्मक क्रिया क्या है ? इनका वाक्य में प्रयोग
5. पुनरुक्त शब्द एवं इसके प्रकार | पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अन्तर

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. गज़ल- एक साहित्य विधा
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? शांत रस एवं वात्सल्य रस के उदाहरण
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. घनाक्षरी छंद और इसके उदाहरण
2. काव्य का 'प्रसाद गुण' क्या होता है?
3. अपहनुति अलंकार किसे कहते हैं? एवं विरोधाभास अलंकार
4. भ्रान्तिमान अलंकार, सन्देह अलंकार, पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
5. समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द– अपेक्षा, उपेक्षा, अवलम्ब, अविलम्ब शब्दों का अर्थ

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य क्या होते हैं?
2. कुण्डलियाँ छंद क्या है? इसकी पहचान एवं उदाहरण
3. हिन्दी में मिश्र वाक्य के प्रकार (रचना के आधार पर)
4. मुहावरे और लोकोक्ति का प्रयोग कब और क्यों किया जाता है?
5. राष्ट्रभाषा क्या है और कोई भाषा राष्ट्रभाषा कैसे बनती है?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1.अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
2. पुनरुक्त शब्दों को चार श्रेणियाँ
3. भाषा के विविध स्तर- बोली, विभाषा, मातृभाषा
4. अपठित गद्यांश कैसे हल करें?
5. वाच्य के भेद - कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. भाव-विस्तार (भाव-पल्लवन) क्या है और कैसे किया जाता है?
2. राज भाषा क्या होती है, राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है?
3. छंद किसे कहते हैं? मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
4. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
5. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. रस के अंग – स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव
2. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण
3. काव्य के भेद- श्रव्य काव्य, दृश्य काव्य, प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य, पाठ्य मुक्तक, गेय मुक्तक, नाटक, एकांकी
4. अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ, अकर्मक से सकर्मक क्रिया बनाना
5. योजक चिह्न (-) का प्रयोग क्यों और कहाँ होता है?
6. 'पर्याय' और 'वाची' शब्दों का अर्थ एवं पर्यायवाची और समानार्थी शब्दों में अंतर
7. 'हैं' व 'हें' तथा 'है' व 'हे' के प्रयोग तथा अन्तर || 'हैं' और 'है' में अंतर || 'हैं' एकवचन कर्ता के साथ भी प्रयुक्त होता है
8. अनुनासिक और निरनुनासिक में अंतर
9. हिन्दी की क्रियाओं के अन्त में 'ना' क्यों जुड़ा होता है? मूल धातु एवं यौगिक धातु
10. अनुस्वार युक्त वर्णों का उच्चारण कैसे करें?

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों हेतु 'गाय' का निबंध लेखन
2. निबंध- मेरी पाठशाला

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. मित्र को पत्र कैसे लिखें?
2. परिचय का पत्र लेखन
3. पिता को पत्र कैसे लिखें?
4. माताजी को पत्र कैसे लिखें? पत्र का प्रारूप
5. प्रधानपाठक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र
6. कक्षाध्यापक को छुट्टी के लिए आवेदन पत्र।
7. विभिन्न कारणों से छुट्टी के लिए आवेदन पत्र
8. स्थानांतरण प्रमाण पत्र हेतु आवेदन पत्र कैसे लिखें ?
9. स्थानांतरण प्रमाण पत्र की द्वितीय प्रति प्राप्त करने हेतु आवेदन
10. अवकाश हेतु आवेदन का प्रारुप
11. सरकारी पत्र क्या होते हैं? इनकी विशेषताएँ एवं प्रारूप

I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

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