विद्या ददाति विनयम्

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पाठ - 12 'कैदी और कोकिला' (विषय- हिन्दी, काव्य- खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर || Path 4 'Kaidi aur Kokila'

भाव (सारांश)

ब्रिटिश शासन की विविध यातनाओं का सूक्ष्म अंकन करने वाली कविता 'कैदी और कोकिला' स्वतन्त्रता सेनानियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की एक को झलक भी प्रस्तुत करती है। कवि 'कोयल' से पूछते हैं कि तुम यह बताओ कि क्या गा रही हो तथा बार-बार किसका संदेश लेकर आ रही हो। हम तो जेल की ऊँची दीवारों के घेरे में बदमाशों के बीच जेल में बन्द हैं। किन्तु तुम तो स्वतन्त्र हो फिर भी तुम इस तरह से क्यों हूक रही हो। क्या तुम्हें भी ब्रितानी शासन की क्रूरताओं का पता लग गया है। इसीलिए तड़पन भरी कुहक के द्वारा लोगों की सजग कर रही हो। हम यहाँ जेल में नाना प्रकार के कष्ट झेल रहे हैं। शायद इसीलिए तुम विद्रोह के बीज बोकर जनता को जगा रही हो। कवि कहते हैं कि तुममें और हममें बहुत अन्तर है तुम कहीं भी विचरण कर सकती हो किन्तु हम अपनी दशा पर रो भी नहीं सकते हैं। ऐसी विवशता की स्थिति में हम गाँधीजी की किस तरह सहायता कर सकते हैं।

लेखक परिचय-
माखनलाल चतुर्वेदी

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के एक गाँव में सन् 1889 में हुआ। मात्र 16 वर्ष की अवस्था में वे शिक्षक बने। बाद में अध्यापन कार्य छोड़कर उन्होंने प्रथा पत्रिका का संपादन शुरू किया। में देशभक्त कवि एवं प्रखर पत्रकार थे। उन्होंने कर्मवीर और प्रताप का भी संपादन किया। सन् 1968 में उनका देहांत हो गया।
हिम किरीटनी, साहित्य देवता, हिम तरंगिनी, वेणु लो गूंजे धरा उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्हें पद्मभूषण एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाएँ राष्ट्रीय भावना से युक्त हैं। उनमें स्वतन्त्रता की चेतना के साथ देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना मिलती है। इसीलिए उन्हें एक भारतीय आत्मा कहा जाता है। इस उपनाम से उन्होंने कविताएँ भी लिखी हैं। वे एक थे और स्वाधीनता आंदोलन के दौरान कई बार जेल गए। उन्होंने भक्ति, प्रेंम और प्रकृति संबंधी कविताएँ भी लिखी हैं।
चतुर्वेदी जी कविता में शिल्प की तुलना में भाव को अधिक महत्व देते lहैं। उन्होंने परंपरागत छंदबद्धता रचना के अनुकूल शब्दों का भी प्रयोग किया है।

महत्वपूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

पद्यांश (1) क्या गाती हो?
क्यों रह-रह जाती हो?
कोकिल बोलो तो ।
क्या लाती हो ?
संदेशा किसका है?
कोकिल बोलो तो ।
ऊँची काली दीवारों के घेरे में,
डाकू, चोरों बटमारों के डेरे में,
जीने को देते नहीं पेट भर खाना,
मरने भी देते नहीं, तड़प रह जाना ?
जीवन पर अब दिन-रात कड़ा पहरा है,
शासन है, या तम का प्रभाव गहरा है?
हिमकर निराश कर चला रात भी काली,
इस समय कालिमामयी जगी क्यूँ आली?

संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के 'कैदी और कोकिला' पाठ से लिया गया है। इसके कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

प्रसंग-इसमें कैदी कोयल से रात में हूकने का कारण पूछते हुए अपनी यातनाभरी जेल की कहानी सुनाते हैं।

व्याख्या - कवि कोयल से पूछते हैं कि तुम क्या गा रही हो? तुम बीच-बीच में रुक जाती हो और पता नहीं तुम किसका क्या संदेश लेकर आती हो, तुम ठीक-ठीक बता दो। कैदी अपने बारे में कहते हैं कि हम यहाँ ऊँची-ऊँची दीवारों के घेरे में डाकू, चोरों, राहजनों के साथ बंद हैं। हमें यहाँ भरपेट भोजन भी नहीं मिलता है और न भूखा रहकर मरने दिया जाता है। इस तरह हम दुख से बेचैन होते रहते हैं। हमारे ऊपर हर समय कड़ा पहरा रहता है। हम समझ नहीं पाते हैं यह दुःखद स्थिति शासन की कठोरता के कारण है या हमारे जीवन के गहन अंधकार का घातक प्रभाव है। हमको तो चन्द्रमा भी निराश करके चला जाता है इसलिए रात्रि भी काली है। ऐसे विषम समय में हे श्यामवर्णन सखी कोयल तू क्यों जाग रही है। इसका कारण बता दे।

विशेष -(1) ब्रिटिश हुकूमत द्वारा स्वतन्त्रता सेनानियों पर किए जाने वाले क्रूर व्यवहारों को बताया गया है।
(2) अनुप्रास अलंकार।
(3) प्रवाहमयी साहित्यिक भाषा में। विषय को प्रभावी ढंग से रखा गया है।

पद्यांश (2) क्या देख न सकती जंजीरों का गहना?
छथकड़ियाँ क्यों? यह ब्रिटिश राज का गहना,
कोल्हू पर चर्रक-चूँ जीवना की तान,
गिट्टी पर अंगुलियों ने लिखे गान।
हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जुआ,
खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ।
दिन में करुणा क्यों जगे रुलाने वाली,
इसलिए रात में गजब ढा रही आली?
इस शान्त समय में,
अंधकार को बेध, रो रही क्यों हो?
कोकिल बोलो तो?
चुपचाप मधुर विद्रोह-बीज
इस भाँति बो रही क्यों हो ?
कोकिल बोलो तो?

संदर्भ -प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के 'कैदी और कोकिला' पाठ से लिया गया है। इसके कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

प्रसंग -यहाँ कवि ने कोयल से पूछा है कि सम्भवतः तुम्हें ब्रिटिश शासन की क्रूरता की जानकारी हो गई है, इसीलिए तुम विद्रोह के बीज बो रही हो।

व्याख्या -जेल में बन्द कैदी कोयल से कहता है कि क्या तुमको हमारे हाथों में पड़ी लोहे की जंजीरों का आभूषण नहीं दिखाई दे रहा है? तुम जानना चाहती हो कि हमें ये हथकड़ियाँ क्यों पहनाई गई हैं, तो सुन लो यह ब्रितानी शासन का अलंकार, आभूषण है। जिसको हर स्वतन्त्रता सेनानी को पहना दिया जाता है। तुम जानना चाहती हो कि जेल में चलने वाले कोल्हू से चर्रक-चूँ की आवाज क्यों आ रही है, तो जान लो कि यह तो कैदियों की मस्ती भरी लय है। जेल में पत्थर की गिट्टियों पर अंगुलियों से गीत लिखे गए हैं। अर्थात् यहाँ कठोर कार्यों द्वारा अपने जोश का परिचय दिया गया है। कैदी बताते हैं कि मैं अपने पेट पर जुआ लगाकर चरस खींचता हूँ और पानी निकालता हूँ। ये कठिन कार्य सहज रूप में करके मैं ब्रिटिश शासकों के घमण्ड को चूर-चूर करता हूँ। हे कोयल! तुम्हारी यह रुला देने वाली करुणा भरी पुकार दिन में जाग्रत नहीं होती है इसीलिए रात के अंधेरे में तुम्हारी यह करुणामयी पुकार तीखे प्रहार कर रही है। कैदी कोयल से पूछते हैं कि तुम इस शान्त वातावरण में अंधेरे को चीर देने वाला रुदन क्यों कर रही हो, इस बात को मुझे बता दो। तुम मौन रहकर ही मीठे ढंग से विद्रोह के बीज इस तरह क्यों वो रही हो। आशय यह है कि तुम ब्रिटिश शासन की यातनाओं के विरुद्ध पुकार क्यों कर रही हो। इसका रहस्य मुझे बता दो।

विशेष -(1) कैदी कोयल के करुण रुदन से समझ जाते हैं कि कोयल भी ब्रितानी शासन के अत्याचारों से दुखी है इसीलिए करुण स्वर में बोल रही है।
(2) इन क्रूर कर्मों के प्रति विद्रोह का बीज भी वह वो रही है।
(3) अनुप्रास अलंकार।
(4) सरल, सुबोध खड़ी बोली में भावों की सशक्त अभिव्यक्ति हुई है।

पद्यांश (3) काली तू रजनी भी काली,
शासन की करनी भी काली,
काली लहर कल्पना काली,
मेरी काल कोठरी काली,
टोपी काली, कमली काली,
मेरी लोह श्रृंखला काली,
पहरे की हुकृति की व्याली,
तिस पर है गाली, ए आली,
इस काले संकट-सागर पर
भरने को मदमाती ।
कोकिल बोलो तो ?
अपने चमकीले गीतों को
क्यों कर हो तैराती?
कोकिल बोलो तो!

संदर्भ -प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के 'कैदी और कोकिला' पाठ से लिया गया है। इसके कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

प्रसंग -यहाँ कैदी सभी प्रकार से दुखद स्थिति का बखान करते हुए कोयल से पूछते हैं कि तुम अपने प्रभावपूर्ण गीतों को क्यों फैला रही हो ?

व्याख्या -कैदी कोयल से कहते हैं कि तुम काले रंग वाली हो। यह अंधेरी रात भी काली है और शासन के कारनामे भी काले (बुरे) हैं। देश में दुख की काली लहर फैली है। भविष्य की कल्पना भी दुख से काली ही है। जेल की जिस काल कोठरी में मैं रह रहा हूँ, वह भी काली है। मैने सिर पर जो टोपी पहन रखी है वह भी काली है और मेरे ओढ़ने का कंबल भी काला है। मेरे हाथों में पड़ी हथकड़ियाँ भी काली हैं। जेल के पहरेदार रूपी सांपिन की हुंकार भी काली भावना से भरी है। हे सखी ? इतने पर भी पहरेदार की गालियाँ मिलती है। दुखों के इस कष्टमय सागर पर मदमस्त होकर अपने प्राण देने को तत्पर कोयल तुम बताओ तो सही कि ऐसा क्यों कर रही हो? तुम अपने प्रभावपूर्ण गीतों को चारों ओर क्यों फैल रही हो? इसका रहस्य मुझे बता दो।

विशेष -(1) देश की कष्टमय स्थिति का चित्रण।
(2) पक्षी भी देश के संकट से त्रस्त हैं।
(3) अनुप्रास अलंकार।
(4) व्यावहारिक भाषा में भावों की सशक्त अभिव्यक्ति हुई है।

पद्यांश (4) तुझे मिली हरियाली डाली,
मुझे नसीब कोठरी काली ।
तेरा नभ-भर में संचार
मेरा दस फुट का संसार !
तेरे गीत कहावें वाह,
रोना भी है मुझे गुनाह !
देख विषमता तेरी-मेरी,
बजा रही तिस पर रणभेरी ?
इस हुंकृति पर,
अपनी कृति से और कहो क्या कर दूँ?
कोकिल बोलो तो!
मोहन के व्रत पर
प्राणों का आसव किसमें भर दूँ?
कोकिल बोलो तो।

संदर्भ -प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक के 'कैदी और कोकिला' पाठ से लिया गया है। इसके कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।

प्रसंग -यहाँ कवि स्वयं की तथा कोयल की स्थितियों की तुलना करते हैं तथा स्वयं को देश हित अर्पित करने का भाव व्यक्त करते हैं।

व्याख्या -कवि कोयल से कहते हैं कि तुमको निवास के लिए हरी-भरी डाली मिली है जबकि मेरे भाग्य में जेल की काली कोठरी है। तुम सम्पूर्ण आकाश में विचरण करने के लिए स्वतन्त्र हो जबकि मेरी दुनिया जेल की दस फुट की कोठरी तक सीमित है। तुमारे मीठे मीठे गीतों पर तुमको वाहवाही, प्रशंसा मिलती है और मेरे लिए रोना भी अपराध है। तुम अपनी और मेरी असमानता को देखकर भी मेरे सामने युद्ध का नगाड़ा बजा रही हो अर्थात् इतनी असमानता के बावजूद तुम मुझे युद्ध करने की चुनौती दे रही हो। तुम्हारी इस युद्ध की हुंकार पर मैं अपने कार्यों से और क्या करके दिखा दूँ, हे कोयल! मुझे बताओ तो सही देश की आजादी के लिए मोहनदास करमचन्द गाँधी जो आमरण व्रत कर रहे हैं, उसकी सफलता के लिए में अपने प्राणों को किस प्रकार अर्पित कर दूँ, इस बारे में मुझे बताओ तो।

विशेष-(1) कोयल स्वतन्त्र है कैदी परतन्त्र, दोनों में यही असमानता है।
(2) देशहित में प्राण अर्पित करने की भावना व्यक्त है।
(3) रूपक व अनुप्रास अलंकार।
(4) शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न अभ्यास-

प्रश्न 1. कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर - कोयल की कूक सुनकर कवि जानना चाहते हैं कि क्या कोयल का कुछ लुट गया है, या पागल हो गई हो अथवा तुमने किसी दावानल की भयंकर आग की लपटों को देखा है। कोयल से इसके बारे में ही वे पूछना चाहते हैं।

प्रश्न 2. किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है और क्यों?
उत्तर - ब्रिटिश शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है। क्योंकि अंधेरे के प्रभाव के कारण कुछ दिखता नहीं है इसलिए सही-गलत का बोध नहीं हो पाता है। उसी तरह ब्रितानी शासन में आँख बंद करके गलत-सही का विचार किए बिना ही कार्य किए गए हैं। सभी तरफ अंधेरगर्दी मची है। कैदियों को भरपेट भोजन तक नहीं दिया जा रहा है।

प्रश्न 3. कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जाने वाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर - पराधीन भारत की जेलों में विभिन्न प्रकार की यंत्रणाएँ स्वतंत्रता सेनानियों को दी जाती थीं। उनको भरपेट भोजन नहीं मिलता था। उनको किसी से मिलने की स्वतन्त्रता नहीं थी। उनके ऊपर कड़ा पहरा रहता था। शासन उनके साथ उचित-अनुचित सभी प्रकार के व्यवहार करता था। कैदियों के हाथों में हथकड़ियाँ पहनाई जाती थीं। उन्हें जुआ में जुतकर मोट खींचकर पानी निकालना होता था। वे कोल्हू खींचते थे।

प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) मृदुल वैभव की रखवाली सी कोकिल बोलो तो?
उत्तर - कोयल माधुर्य की सम्पदा का साकार रूप होती है। उसका स्वभाव, व्यवहार तथा स्वर मधुर होता है। वह अपने स्वर और व्यवहार से सभी के मन जीत लेती है। दर्द से चीखना, चिल्लाना उसका स्वभाव नहीं है। वह तो मृदुल वैभव की रखवाली करने वाली है। उसकी टीस भरी कूक सुनकर कवि पूछते हैं कि तुम इस प्रकार वेदना भरा स्वर क्यों निकाल रही हो, इसका कारण बता दो।

(ख) हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जुआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ ?
उत्तर - भाव यह है कि स्वतन्त्रता सेनानी कठोर यातनाओं को भी सहज रूप में सहन कर रहे थे। ब्रिटिश शासक उन्हें परेशान करने के लिए उनसे मोट खिंचवाते थे। किन्तु वे उन कार्यों को सहज एवं सामान्य मानते थे। इस तरह घमण्ड से भरे ब्रिटिश शासकों के घमण्ड को स्वतन्त्रता सेनानी चूर-चूर कर देते थे। कठोर कार्यों को सहज रूप में करते हुए देखकर अंग्रेज शासकों का अकड़ का कुँआ खाली हो जाता था ये शान्त हो जाते थे।

प्रश्न 5. कवि को कोयल से ईष्यां क्यों हो रही है?
उत्तर -कवि जेल की काल कोठरी में बन्द है। वहाँ उसे काली टोपी पहनने को मिली है. काला कम्बल ओढ़ने के लिए है, उनके हाथों में काली हथकड़ियाँ हैं। कड़े पहरे में पहरेदार की हुंकार सुननी पड़ती है। जबकि कोयल हरी-भरी डाली पर स्वतन्त्र होकर रहती है। वह सारे आकाश में कहीं भी विचरण कर सकती है, उसके गीतों को वाहवाही मिलती है किन्तु कवि के रोने पर भी बंदिश है। इस असमानता के कारण ही कवि को कोयल से ईर्ष्या हो रही है।

प्रश्न 6. कवि के स्मृति पटल पर कोयल के गीतों की कौन-सी मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं जिन्हें वह अब नष्ट करने पर तुली है?
उत्तर - कवि के स्मृति पटल पर कोयल मृदुल वैभव की रखवाली है। उसका स्वर मीठा है, उसका व्यवहार मधुर तथा कोमल है किन्तु बुरी तरह चीखकर पागलपन की हरकत करके अपने माधुर्यपूर्ण स्वभाव को नष्ट करने पर तुली है। इसीलिए कवि पीड़ा का अनुभव करते हैं।

प्रश्न 7. हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है ?
उत्तर - गहने शृंगार, साज-सज्जा के लिए पहने जाते हैं। इनसे पहनने वाले की शोभा बढ़ती है। स्वतन्त्रता सेनानियों की साज-सज्जा एवं शोभा हथकड़ियों से बढ़ती है। देश की आजादी के लिए हथकड़ियाँ पहनना गौरव की बात होती है। इसीलिए हथकड़ियों को गहना कहा गया है।

प्रश्न 8. 'काली तू...... ऐ आली' इन पंक्तियों में 'काली' शब्द की आवृत्ति से उत्पन्न चमत्कार का विवेचन कीजिए।
उत्तर - यहाँ पर काली शब्द की आवृत्ति विभिन्न अर्थों में हुई है। कालापन, बुरी नीयत बुरे कार्य, अंधेरी रात, दुख, अदृश्यता की स्थिति, भविष्य की निराशाजनक स्थिति आदि का प्रतीक है। इस पंक्ति में काली शब्द कोयल की बुरी नीयत, रात्रि की अदृश्यता, ब्रिटिश शासन के बुरे कार्य, देश में व्याप्त दुख की लहर, देश का बुरा भविष्य, कैदियों की कष्टदायक कोठरी, टोपी, कंबल, हथकड़ियाँ आदि सभी कष्टदायक हैं। काली शब्द इसी प्रकार की अभिव्यक्ति करता है। पहरेदारों का बुरा व्यवहार और गालियाँ भी बुरी नीयत का संकेत करती हैं।

प्रश्न 9. काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए-
(क) किस दावानल की ज्वालाएँ दीखीं?
उत्तर -
भाव सौन्दर्य - यहाँ पर कवि तथा कोयल की विषम स्थितियों को इंगित किया गया है। कोयल का मधुर स्वर सुनकर सभी वाह-वाही देते हैं, सभी प्रशंसा करते हैं। जबकि कैदी का रोना भी अपराध हो जाता है, इसके लिए उन्हें कठोर यातनाएँ दी जाती हैं। इस अन्तर को देखते हुए भी कोयल का कैदी को चुनौती देना उचित नहीं है। शिल्प सौंदर्य पद मैत्री तथा अनुप्रास अलंकार का सौन्दर्य दर्शनीय है। तार्किक शैली के कारण कथन में प्रभावोत्पादकता आ गई है। साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 10. कवि जेल के आस-पास अन्य पक्षियों का चहकना भी सुनता होगा लेकिन उसने कोकिल की ही बात क्यों की है?
उत्तर - जेल के आस-पास अन्य पक्षी भी चहकते होंगे किन्तु जो माधुर्य और भाव की तीव्रता कोयल के स्वर में होती वह औरों के स्वर में नहीं होती। इसलिए भावुक हृदय कवि ने भाव की तीव्र अनुभूति कराने वाली कोयल की ही बात की है।

प्रश्न 11. आपके विचार से स्वतन्त्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार क्यों किया जाता होगा ?
उत्तर - स्वतन्त्रता सेनानी ब्रिटिश शासन तथा उनके काले कारनामों का और अन्याय, अत्याचार का विरोध करते थे। परन्तु जो बातें सेनानियों को अनुचित लगती थीं वे ही बातें ब्रिटिश शासन के कानून थे। उनका उल्लंघन ब्रिटिश शासकों की नजर में अपराध था। इसलिए जिन्हें हम स्वतन्त्रता सेनानी मानते थे वे उनके लिए अपराधी थे। यही कारण है कि उनके तथा अपराधियों के साथ एक सा व्यवहार किया जाता होगा।

कक्षा 9 क्षितिज (हिन्दी) के गद्य खण्ड के पाठ, उनके सारांश एवं अभ्यास
1. पाठ 1 'दो बैलों की कथा' पाठ, का सारांश, अभ्यास एवं व्याकरण
2. सम्पूर्ण कहानी- 'दो बैलों की कथा' - प्रेंमचन्द
3. दो बैलों की कथा (कहानी) प्रेंमचन्द
4. 'ल्हासा की ओर' - यात्रावृत्त - राहुल सांकृत्यायन
5. पाठ- 2 'ल्हासा की ओर' (यात्रा-वृत्तान्त, लेखक- राहुल सांकृत्यायन), पाठ का सारांश, प्रश्नोत्तर, भाषा अध्ययन, रचना और अभिव्यक्ति (कक्षा 9 हिन्दी)

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6. पाठ - 3 'उपभोक्तावाद की संस्कृति' (विषय हिन्दी गद्य-खण्ड कक्षा - 9) प्रश्नोत्तर अभ्यास
7. साँवले सपनों की याद– जाबिर हुसैन, प्रमुख गद्यांश एवं प्रश्नोत्तर।
8. नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया — चपला देवी, Class 9th Hindi क्षितिज पाठ-5 अभ्यास व प्रश्नोत्तर
9. पाठ 6 'प्रेंमचंद के फटे जूते' (विषय- हिन्दी गद्य-खण्ड कक्षा- 9) पाठ का सारांश एवं प्रश्नोत्तर
10. पाठ- 7 'मेरे बचपन के दिन' (विषय- हिन्दी कक्षा- 9 गद्य-खण्ड) सारांश एवं प्रश्नोत्तर

कक्षा 9 क्षितिज (हिन्दी विशिष्ट) के पद्य खण्ड के पाठ, उनके सार, अभ्यास व प्रश्नोत्तर को पढ़ें।
1. पाठ 9 साखियाँ और सबद (पद) भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
2. पाठ 10 'वाख' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
3. पाठ 11 'सवैये' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
4. पाठ 12 'कैदी और कोकिला' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
5. पाठ 13 'ग्रामश्री' भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
6. पाठ 14 चंद्र गहना से लौटती बेर केदारनाथ अग्रवाल भावार्थ एवं अभ्यास
7. पाठ - 15 'मेघ आए' (विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
8. पाठ - 16 'यमराज की दिशा' (विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
9. बच्चे काम पर जा रहे हैं' (पाठ - 17 विषय - हिन्दी काव्य-खण्ड कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

कक्षा 9 संस्कृत के पाठों व प्रश्नोत्तर पढ़ें।
1. पाठः प्रथमः 'भारतीवसन्तगीतिः' (विषय - संस्कृत कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
2. पाठः द्वितीयः 'स्वर्णकाकः' (विषय - संस्कृत कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर
3. पाठः तृतीयः 'गोदोहनम्' विषय - संस्कृत (कक्षा- 9) सारांश, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

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I Hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
rfhindi.com

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Comments

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    zwh3sq

    Posted on June 06, 2024 04:06AM

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    s8pkd4

    Posted on June 06, 2024 04:06AM

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    Posted on June 06, 2024 04:06AM

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    Posted on June 06, 2024 04:06AM

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    Posted on June 06, 2024 04:06AM

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    Posted on June 06, 2024 01:06PM

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